मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

Tamil Nadu Crisis Must End

तमिल नाडु में व्याप्त सियासी संकट अब खत्म हो जाना चाहिए। छह फरवरी को मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम और उनके मंत्रिमंडल के इस्तीफे के बाद पार्टी की महामंत्री को विधायक दल के नेता चुने जाने से  शशिकला के शपथ ग्रहण को टाले जाने से राज्य में  अनिश्चतिता  व्याप्त है। राज्यपाल, आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद ही मुख्यमंत्री की  शपथ को लेकर  कोई फैसला लेना चाहते हैं। संवैधानिक तौर पर राज्यपाल का यह फैसला एकदम सही है। मंगलवार  को सुप्रीम कोर्ट  द्धारा   शशिकला  को आय के ज्ञात स्त्रोतों  से अधिक संपत्ति जोडने के मामले में  सजा सुनाए जाने से उनका सफर यहीं  खत्म  हो गया  है ।  शशिकला ए.बी.ए. दस साल तक  चुनाव नहीं लड़ सकती है ।   उन्हें चार साल जेल में रहना पडेगा।   पिछले साल जून से सुप्रीम कोर्ट  में फैसला सुरक्षित है।  शाशिकला इस मामले में  पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के साथ प्रमुख आरोपी है। सितंबर, 2014 में बंगलुरु की विषेश अदालत ने इसी मामले में जयललिता,  शशिकला और उनके दो  रिश्तेदार  को चार-चार साल की कैद और 100 करोड रु के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस मामले में जयललिता और  शशिकला जेल में भी रहना पडा था। तब अपनी जगह  अम्मा ने पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाया था। जून 2015 में कर्नाटक हाई कोर्ट  ने जयललिता और शशिकला समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले को कर्नाटक सरकार, द्रमुक और भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शशिकला के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करने वाले कार्यवाहक मुख्यमंत्री  पन्नीरसेल्वम की सारी उम्मीदें भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई  थी । इस समय एआईएडीएमके के अधिकांष विधायकों का समर्थन  शशिकला  के साथ है हालांकि एक-दुक्के पन्नीरसेल्वम के पक्ष में मगर पार्टी के अधिकांष कर्यकर्ता  शशिकला के खिलाफ हैं। सोमवार को  शशिकला ने फिर अपनी ताकत दिखाई और बागी पन्नीरसेल्वम पर तंज कसते हुए कहा“ हमने पन्नीरसेल्वम जैसे हजार देखें हैं, मैं डरती नहीं हूं“। सोमवार को ही पुलिस ने मद्रास हाई कोर्ट (हाई कोर्ट का नामकरण नहीं बदला है) को सूचित किया कि शशिकला ने किसी भी विधायक को नजरबंद नहीं कर रखा है। सभी अपनी मर्जी से रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं। पन्नीरसेल्वम ने ही हाई कोर्ट में विधायकों को  शशिकला की कैद से मुक्त कराने की याचिका दायर की थी। बहरहाल, शशिकला को जयललिता की “राजनीतिक विरासत“ संभालने से रोकने में  पन्नीरसेल्वम  समर्थ  नहीं लग रहे हैं। तीन बार मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बावजूद पनीरसेल्बम अपना राजनीतिक कद नहीं बढा पाए। जयाललिता के रह्ते ऐसा करना संभव ही नहीं था।  234 सदस्यीय विधानसभा में एआईएडीएमके के 129 विधायक  शशिकला के साथ हैं। सोमवार को शशिकला ने इन सब विधायकों को पत्रकारों के समक्ष पेश  भी किया। बहरहाल, यह बात हैरतअंगेज है कि स्वेच्छा से मुख्यमंत्री पद त्यागने और विधायक दल की बैठक में स्वंय  शशिकला का नाम प्रस्तावित करने के बाद अचानक पन्नीरसेल्वम ने पलटी क्यों मारी? जाहिर है इसके पीछे कोई बडी ताकत है। दक्षिण भारत में पन्नीरसेवम के माध्यम से एक और राज्य पर अपना भगवा झंडा गाडने का  केन्द्र में सतारूढ भाजपा को सुनहरा मौका हाथ लगा है। मगर जमीनी सच्चाई यह है कि  सुप्रीम कोर्ट का फैसला  शशिकला के खिलाफ जाने के बावजूद पन्नीरसेल्वम का पलडा भारी नहीं पड सकता। विधायक पन्नीरसेल्वम के पक्ष में पलटी मारेंगें, इसकी उम्मीद कम है। शशिकला आसानी से हार मानने वाली नहीं है। एआईएमडीएमके में व्यक्तिगत  निष्ठा  और अवसरवादिता को ज्तादा महत्व है। अगर खुद मुख्यमंत्री नही बन सकती, वे जयललिता की तरह अपने पार्टी के किसी वफादार को अपना उतराधिकारी चुन सकती हैं। पार्टी के विधायकों पर उनकी मजबूत पकड है और बागी पन्नीरसेल्वम को कद छोटा करने मे  शशिकला कोई कसर नहीं छोडेंगी।  सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही  शशिकला  ने बिना समय गवाएं  अपना उत्तराधिकारी चुन लिया।  सपुरमे कूट के फैसले के बाद भी  तमिल नाडु में राजनीतिक उथल-पुथल जारी रह सकती है।