प्रोफेशनल कोर्सों के आखिले में भारी गोलमाल के लिए लंबे समय से देश भर में चर्चित व्यापामं (मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल) स्कैम में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से “मुन्नाभाईयों“ को सबक मिल जाना चाहिए। इस फैसले ने स्पष्ट जता दिया है कि कानून की आंखों में धूल झोॅककर और धन-बल से डिग्रियां नहीं ली जा सकती। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में एमबीबीएस कर रहे 634 छात्रों के दाखिले ही रदद कर दिए। 2008 से 2012 के दौरान मध्य प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कालेजों में नकल करके दाखिला लेकर एमबीबीएस कर रहे 634 छात्रों को अब डिग्री नहीं मिलेगी। इन छात्रों मेंसे लगभग 200 छात्र एमबीबीएस कर चुके चुके हैं और कुछ इंटर्नशिप कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि पहली कक्षा के बच्चे को भी नकल करने का अंजाम समझ में आता है। फिर प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला लेने वाले इस अंजाम से नादान थे, इस पर विश्वास नहीं होता। अदालत का कहना था कि सभी आरोपी छात्रों को अच्छी तरह पता था कि मैरिट पर इन्हें दाखिला नहीं मिलेगा, इसलिए इन्होंने नकल का सहारा लिया। मध्य प्रदेश सरकार ने एमबीबीएस और इंजीनियरिंग जैसे व्यावसायिक कोर्सों में दाखिले और सरकारी नौकरियों मे इनकी भर्ती के लिए मध्य प्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल गठित कर रखा है। मध्य प्रदेश में व्यावसायिक कोर्सों के सभी दाखिले और भर्तियां व्यापमं के माध्यम से ही की जाती हैं। 2013 मे खुलासा हुआ था कि व्यापमं द्वारा ली जा रही मेडिकल परीक्षा में बडे पैमाने पर नकल करवाई जा रही है। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था। जांच पर 2008 से 2013 के बीच 634 छात्रों को नकल करके दाखिला लेने के लिए दोषी पाया गया। व्यापमं की परीक्षाओ और भर्ती में नकल और धांधलियों के आरोप 1990 से ही लग रहे थे। 2000 में इस मामले में पहली प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज भी की गई मगर इसके बावजूद सरकार नही जागी। 2007-08 की ऑडिट रिपोर्टे में व्यापमं में व्याप्त धांधलियों का पहली बार पता चला। इंदौर के एक एक्टिविस्ट ने जनहित याचिका में मामले की जांच की मांग की। इस पर सरकार ने जांच कमेटी गठित की। जाच हुई और धांधलियों का खुलासा हुआ। 2013 में इंदौर पुलिस द्वारा 20 लोगों की गिरफ्तारी पर इस घोटाले का भांडा फूटा। पकडे गए इन लोगों ने पुलिस को बताया कि 2009 की व्यापमं परीक्षा में इन्होंने मूल परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी थी। इसके बाद गिरोह का सरगना पकड गया। पूछताछ में पूर्व शिक्षा मंत्री समेत कई सियासी नेताओं, नीकरशाहों और व्यापमं के कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहे परीक्षा घोटाले का अनावरण हुआ। भारी-भरकम रकम लेकर ऐसे नकली परीक्षार्थी तैयार किए जाते, जो पहले व्यापमं अथवा अन्य परीक्षा उर्तीण कर चुके होते । व्यापमं के भ्रष्ट कर्मचारियों की मदद से एडमिट कार्ड के फोटो तक बदल दिए जाते। पैसे लेकर परीक्षा में जमकर नकल करवाई जाती। जांच में पता चला कि व्यापम की पूरी परीक्षा व्यवस्था में भारी गोलमाल किया जा रहा था। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इस घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में व्यापक स्तर पर परीक्षा घोटाले की पुष्टि की। व्यापमं मामले से जुडे 40 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। आरोप है कि इनमें काफी वे लोग हैं, जो इस घोटाले के गवाह थे। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी छात्रों की माफी की तमाम दलीलें दर किनारे करते हुए कहा है कि उच्च चरित्र और सुदृढ नैतिक मूल्यों से ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है, मुन्न्नाबाईयों से नहीं। अभी भी देश की मेडिकल शिक्षा में भारी खोट है। व्यावसयिक सिक्षा का व्यापारीकरण करके सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों को “मुनाभाई“ तैयार करने की खुली छूट दे रखी है। केपिटेशन फीस देकर मेडिकल अथवा व्यावसायिक कालेजों में दखिला लेना भी व्यापमं घोटाले जैसा ही है। व्यापमं स्कैम ने परीक्षा लेने वाली सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खडा किया है। नकल से दाखिले करवाने वाली परीक्षा संस्थाओं पर कौन भरोसा करेगा?
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