शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

Save Punjab

पंजाब के बठिंडा जिले के मौड मंडी में  मंगलवार को कांग्रेस प्रत्याशी  की चुनाव जनसभा में  बम विस्फोट लंबे समय तक आतंक से पीडित रहे राज्य के लिए अशुभ संकेत है। इस  विस्फोट  में तीन बच्चों समेत 6 लोग मारे गए और 9 की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। विस्फोट में दो बमों का प्रयोग किया गया था। पुलिस के मुताबिक गनीमत है दूसरा बम पूरी तरह से फट नहीं पाया, वरना काफी ज्यादा लोग ह्ताहत हो सकते थे। पुलिस को मौके से मिले कुकर में छर्रेनुमा सामान मिला है। पुलिस के साथ-साथ चुनाव आयोग को भी पूरा विष्वास है कि यह आतंकी हमला था और मौके पर मिले प्रमाण इसी ओर इशारा करते हैं। कहते हैं “तूफान आने से पहले मरघट जैसी  शांति होती है“। चार फरवरी को होने वाले मतदान से मात्र चार दिन पहले कांग्रेस  प्रत्याशी  हरमंदर जस्सी की चुनावी सभा में आतंकी हमला आने वाले “तूफान” के  स्पष्ट  संकेत है। कांग्रेस प्रत्याशी  हरमंदर जस्सी को पहले जैड सिक्योरिटी मिली हुई है। जस्सी सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम इंसा के समधी हैं और डेरा-सिख विवाद के कारण उन्हें जैड सिक्योरिटी मिली हुई थी। इसमें एक वुलेट प्रूफ गाडी और 20 सुरक्षा कर्मी होते हैं। मगर जिस रोज उनकी जनसभा में आतंकी हमला हुआ, उससे कुछ समय पहले उनकी वुलेट प्रूफ गाडी खराब हो गई थी और उसे मरम्मत के लिए चंडीगढ भेजा गया था।     जस्सी का पूरा परिवार निशाने पर है। इस हमले के एक दिन बाद बुधवार को डेरा मुखी ने विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल-भाजपा को अपना समर्थन देने का ऐलान किया जबकि उनके समधी जस्सी कांग्रेस के प्रत्याशी  हैं। 2007 के विधानसभा चुनाव में सिरसा डेरा ने कांग्रेस का खुला समर्थन किया था। 2012 के चुनाव  में डेरा सच्चा सौदा किसी भी दल के समर्थन में खुलकर नहीं आया था । पंजाब में सिरसा डेरे के काफी समर्थक है। इसी बात के  दृष्टिगत  सभी दल डेरा मुखी से मिलकर उनसे समर्थन मांग चुके हैं। पिछले षुक्रवार 27 जनवरी को पंजाब प्रदेश  कांग्रेस अध्यक्ष डेरा मुखी से मिले थे। बहरहाल, मौड मंडी हमले से सरकार और पुलिस प्रशासन को अत्याधिक चौकस रहने की जरुरत है।  वीरवार को चुनाव प्रचार  खत्म हो गया और प्रत्याशियों और उनके समर्थकों का पूरा जोर घर-घर जाकर वोट मांगने पर रहेगा। मतदान की पूर्व  संध्या पर मतदाताओं को लुभाने के लिए शराब और अन्य प्रलोभन बांटे जाते है़। चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव आयोग लाखों पेट्ट्यिां शराब , हेरोइन और अन्य नशीले पर्दाथ  पकडे जा चुके हैं। भारी मात्रा में नकदी भी पकडी जा चुकी है। चुनाव के समय नशेडियों में नशी  की सप्लाई के कूपन तक बांटे जाते हैं। ये सब हथकंडे मतदाताओं को लुभाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।  नशा  पंजाब को बुरी तरह से खाए जा रहा है। आतंक के बाद पंजाब के सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था  पर सबसे घातक वार भी नशे  ने किया है। देश  की कुल नशीली पदार्थों की 60 फीसदी सप्लाई अकेले पंजाब में की जाती है। पंजाब के ग्रामीण चेत्रों का 70 फीसदी युवा नशे  की चपेट में है।  कैग की रिपोर्ट  में भी खुलासा किया गया था कि 2005 से 2011 के दौरान पांच सलों में  पंजाब  में शराब की खपत में 60 फीसदी का इजाफा हुआ था। नशे  ने लाखों परिवार को तबाही की कगार पर लाकर खडा कर दिया है। मौजूदा अकाली-भाजपा सरकार ने दस सालों में नशे  के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यही स्थिति पंजाब के लिए सबसे बडा खतरा है। नशे  में डूबा व्यक्ति किसी भी हद तक जा सकता है। देशद्रोही ताकतें यही चाहती है। पंजाब को अगर बचाना है, तो  राज्य को नशे  से अविलंब मुक्ति दिलानी होगी। पंजाब का जनादेश  यही तय करेगा।