“क्लीन इंडिया, शाइन इंडिया“ वित्त मंत्री अरुण जेटली के इस साल के बजट का मूल मंत्र रहा है। नोटबंदी के प्रतिकूल असर को पाटने के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 में वित्त मंत्री ने मांग को उठाने, बजट घाटे को बांध कर रखने और जनाकाक्षांओं को पूरा करने के हरसंभव प्रयास किए हैं। वित्त मंत्री के अनुसार बजट में अमेरिकी फेडरल नीति से घटते विदेशी निवेश , प्रोटेक्शनिज़्म, भारतीय कंपनियों को संभावित खतरा और तेल की बढ्ती कीमतों से दरपेश चुनौतियों को सामने रखा गया है। 2017-18 में बजटीय घाटे को 3.2 फीसदी रख कर वित्त मंत्री ने कुशल वित्तीय प्रबंध का परिचय दिया है। मुद्रा स्फीति को नियंत्रित रखने के लिए यह जरुरी है। देश के लाखों युवको को तुरंत रोजगार की दरकार है। नोटबंदी ने रोजगार के अवसरों को खासा संकुचित किया है। वित्त मंत्री ने भले ही राज धर्मं का पालन करते हुए नोटबंदी की तारीफ की है, मगर बजट की “दिशा और दशा ” साफ-साफ कहती है कि विमुद्रीकरण का अर्थव्य्वस्था पर बुरा असर पडा है। इसके लिए सार्वजनिक व्यय को ज्यादा से ज्यादा बढाने की अविलंब जरुरत थी। इसे समझते हुए वित मंत्री ने देश में सडकों, हवाई अडडों और रेल लाइनों के नेटवर्क को सुदृढ और विस्तृत करने के लिए 59 खरब डॉलर के निवेश का प्रस्ताव किया है। मनरेगा का बजट 38500 करोड रु से बढाकर 50,000 करोड रु किया गया है। इसके तहत 10 लाख तालाब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इतने भारी-भरकम निवेश से निश्चित तौर पर रोजगार के अधिकाधिक अवसर सृजित होंगे। व्यवस्था को क्लीन करने के लिए मोदी सरकार के सतत प्रयास उसकी सबसे बडी उपलब्धि है। काले धन के खिलाफ मुहिम को जारी रखते हुए वित्त मंत्री ने तीन लाख रु से ज्यादा की नगदी के लेन-देन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इससे व्यवस्था को क्लीन करने और डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। राजनीतिक चंदे पर भी लगाम लगाई गई है।अर्थव्यवस्था से काला धन बाहर निकालना सरकार की प्राथमिकता है। जो लोग अब तक नगदी देकर काली कमाई से प्रापॅर्टी और वाहन खरीदते रहे हैं, वे अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। वित्त मंत्री ने इस बात का भी पूरा ख्याल रखा है कि चैक बाउंस की समय खपाऊ अदालती प्रकिया को और आसान् और सटीक बनाया जाए। कारोबारी चैक में पेमेंट करने से इसलिए गुुरेज करते हैं कि चैक बाउंस होने की स्थिति में उन्हें लंबी अदालती प्रकिया से गुजरना पडता है। कराधान का सिद्धांत है कि कर प्रगतिशील होना चाहिए और “गरीब को राहत और अमीर पर आफत“ आयकर का मूलमंत्र होना चाहिए। कर दरों को बढाने की बजाय, इसका दायरा बढाना ज्यादा कारगर होता है। इसी सिद्धान्त पर चलते हुए वित्त मंत्री ने आयकर में कुछ छूट दी है। तीन लाख रु सालाना तक की आय को आयकर से मुक्त रखा गया है। 5 लाख रु तक की आय पर कर 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करके वित्त मंत्री ने कर दायरे को बढाया है। इससे जो लोग आयकर चुकाने में आगे नहीं आते हैं, उन्हें मामूली सा आयकर देकर आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। पिछले साल केवल 3.70 करोड ने आयकर रिटर्न भरा था। इनमेंसे मात्र 76 लाख ऐसे है, जिन्होंने अपमी आय 10 लाख से ज्यादा दिखाई है जबकि पिछले साल दो करोड भारतीय लाखों खर्च करके विदेशों में सैर-सपाटे पर गए थे। 5 लाख तक कर घटाकर वित्त मंत्री को उम्मीद है कि मामूली सा कर (लगभग 2500 रु) चुका कर ज्यादा से ज्यादा लोग आयकर चुकाएंगें। 50 लाख से 1 करोड रु की आय वालों पर सरजार्ज लगाया गया है। बजट में कुल मिलाकर बीस हजार करोड रु की राहत दी गई है। बजट ग्रोथ उन्मुख है और वित्त मंत्री की यह शायरी “नई दुनिया हे, नया दौर है, नई है उमंग; कुछ थे पहले के तरीके, कुछ है आज के ढंग; रोशनी आके जब टकराई है, तो काले धन को बदलना पडा है अपना रंग“ इसका निचोड है।ं
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