तमिल नाडु में शशिकला के वफादार ईके पलनीसामी द्वारा वीरवार को मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के साथ ही राज्य में व्याप्त अनिश्चितता ख़त्म हो गई है। वीरवार सुबह राज्यपाल से मुलाकात में पलनीसामी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस पर राज्यपाल ने उन्हे सरकार बनाने का न्यौता दिया। उनके प्रतिद्धंद्धी और तीन बार मुख्यमंत्री रहे ओ पनीरसेल्वम विधायकों का समर्थन नहीं जुटा पाए और सरकार बनाने की दौड में पिछड गए। पलनीसामी के साथ 31 मंत्रियों ने भी शपथ ली है। पलनीसामी को 15 दिन के भीतर विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा। लोकतंत्र में शक्ति परीक्षण का यही एकमात्र विश्वसनीय तरीका है। पलनीसामी को शशिकला की वफादारी का फल मिला है। शशिकला से बगावत के कारण इस बार जयललिता के वफादार पनीरसेल्वम पिछड गए। समकालीन भारतीय राजनीतिक दलों में शीर्ष नेता के प्रति वफादारी अन्य बातों से कहीं ज्यादा मायने रखती है। ऐसा भारत में ही संभव है कि 25 साल की दोस्ती से मुख्यमंत्री का पद भी हाथों-हाथ मिल जाए। जयललिता की करीबी शशिकला मुख्यमंत्री बन गईं होती अगर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में जेल की सजा नहीं सुनाई होती। इसे भाग्य की विडवंना ही कहा जाएगा कि शशिकला मुख्यमंत्री बनते-बनते अब जेल पहुंच गईं और चार साल तक वहां आम कैदी की तरह सश्रम काम करेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को शशिकला, उनकी ननद इलावरसी और भतीजे वीके सुधाकरण को चार-चार साल कैद की सजा दी। अदालत ने जेल में शशिकला को क्लास ए श्रेणी की सुविधा देने की मांग भी ठुकरा दी। उन्हें चार साल जेल में आम कैदी की तरह काटने पडेंगे। दस साल तक शशिकला चुनाव नहीं लड सकती मगर इसके बाद वे फिर विधायकों के समर्थन से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो सकती हैं। जेल जाने से पहले शशिकला ने इस बात के पुख्ता प्रबंध किए कि पार्टी और सरकार पर उनकी मजबूत पकड बनी रहे। अपने वफादार पलनीसामी को मुख्यमंत्री बनाने के साथ-साथ शशिकला ने अपने दो रिश्तेदारों को एआईएडीएमके का पदाधिकारी नियुक्त किया। इनमेंसे एक को पार्टी का डिप्टी जनरल सैक्टरी नियुक्त किया है। वे वही शख्स हैं जिन्हें 2011 में जयललिता ने पार्टी से ही निकाल दिया था। पलनीसामी मुख्यमंत्री तो होंगे मगर पार्टी की शशिकला बॉस बनी रहेंगी और रिश्तेदार उनके बाद पार्टी के अगले बॉस होंगे। इससे साफ है कि शशिकला जेल से रिमोट कंट्रोल के जरिए पार्टी और सरकार चलाएंगी। मुख्यमंत्री पलनीसामी को अपना कोई ठोस जनाधार नहीं है। वे 1996 और 2006 में दो बार विधानसभा और एक बार 2004 में लोकसभा का चुनाव हार चुके है मगर जयललिता और शशिकला के वफादार रहे हैं। उनकी वफादारी का प्रमाण इस बात से मिलता है कि 2011 और 2016 के बीच जयललिता ने कई मंत्रियों को हटाया मगर पलनीसामी बने रहे। उन पर कई बार करप्शन के आरोप लग चुके हैं और हर बार शशिकला ने उन्हें मुसीबत से उभरा है। मगर शशिकला के लिए जेल से पार्टी और सरकार को चलना इतना आसान नहीं होगा। पनीरसेल्वम के अलावा उनके उनके प्रमुख प्रतिद्धंद्धी उनके कैंप में लगातार सेंध लगाने की कोशिश करते रहेंगे। पनीरसेल्वम की तरफ से वरिष्ठ नेता सांसद वी मैत्रेयन ने वीरवार को निर्वाचन आयोग से शिकायत की है कि शशिकला को पार्टी के संविधान अनुसार जनरल सैक्टरी नहीं चुना गया है। पार्टी संविधान के अनुसार जनरल सैक्टरी को प्राथमिक सदस्यों द्वारा चुना जाना चाहिए। शशिकला को जनरल काउंसिल ने चुना है। पनीरसेल्वम कैंप शशिकला को चौतरफा घेरना चाहते हैं। तथापि जमीनी सच्चाई यह है कि पनीरसेल्वम और उनके समर्थक पार्टी से बाहर रह कर ज्यादा देर तक टिक नहीं सकते। पार्टी के भीतर रहकर, वे ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं। एआईएडीएमके को सता में बनाए रखने और प्रतिद्धंद्धी द्रमुक से मुकाबला करने के लिए जयललिता सरीखी नेता की जरुरत है। यही बात शशिकला के पक्ष में जाती है। संभावना यही है कि देर-सबेर पनीरसेल्वम और उनके समर्थक पार्टी में लौट आएंगे।
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