बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

ट्रंप का पाक “ट्रंप कार्ड“

अमेरिका के नए  राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप की एक घुडकी से पाकिस्तान सहम गया है। आनन-फानन में नवाज शरीफ सरकार ने 2008 के मुंबई नर संहार के साजिशकर्ता जमात-उद-दावा एवं लश्कर   प्रमुख हाफिज सईद को घर में नजरबंद कर दिया है। भारत के साथ-साथ अमेरिका भी सईद को मुंबई नरसंहार का मास्टरमाइंड मानता है और उस पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है। अमेरिका ने 2012 में छह नागरिकों की हत्या के लिए हाफिज सईद पर दस मिलियन डॉलर का इनाम घोषित  कर रखा है। आतंकी सईद और उनके आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लग भी जाता मगर चीन बार-बार संयुक्त राष्ट्र  संघ  में इस मामले में अडंगा अडाता रहा है। चीन को पाकिस्तान के साथ वहां के आतंकी संगठन भी प्रिय है। चीन भारत को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं चूकता है। तथापि, आतंक के खिलाफ पाकिस्तान को वैश्विक  लड़ाई  में  शामिल कराने के लिए राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप के पास ऐसा “ट्रंप कार्ड“ है जिससे पाकिस्तान को  शांति के मार्ग पर चलने के सिवा कोई विकल्प नहीं रह जाएगा। यह आम धारणा है कि अगर अमेरिका को छींक भी आ जाए, तो पूरी दुनिया को जुकाम हो जाता है। और अगर राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप हो, तो कहने ही क्या। शपथ ग्रहण करते ही ट्रंप ने सात मुस्लिम देशों  के लोगों की अमेरिका में एंट्री पर रोक लगा दी । मेक्सिको के साथ लगती अमेरिकी सीमा पर दीवार खडी करने के आदेश  जारी कर दिए । चुनाव के दौरान दोनों ट्रंप के प्रमुख वायदे थे। इन फैसलों से पूरी दुनिया मे हडकंप मच गया है। बुद्धिजीवी, कलाकार, सियासी नेता और आम नागरिग सभी  ट्रंप के खिलाफ अमेरिका समेत पूरी दुनिया में जगह-जगह प्रदर्शन  कर रहे है। मंगलवार को अमेरिकी संसद के निचले सदन में एच1-बी वीजा होल्डर्स  का वेतन दोगुना करने संबंधी बिल पेश  होते ही भारत की पांच शीर्ष  कंपनियों के  शेयर मुंह  गिर गए और एक घंटे में इनकी  50,000 करोड रु की  मार्केट वैल्यू स्वाह हो गई।  ट्रंप अपने फैसलों पर अडिग हैं हालांकि ग्रीन कार्ड होल्डरों की मुक्त एंट्री पर प्रस्तावित प्रतिबंध लगाने के उनके फैसले को भारी विरोध के बाद व्हाइट हाउस को वापस लेना पडा था। सोमवार को व्हाइट हाउस ने चेताया था कि सात मुस्लिम मुल्को  की तर्ज पर  पाकिस्तानियों की अमेरिका में एंट्री पर विचार किया जा रहा है। पाकिस्तान के लिए उसके नागरिकों की अमेरिका में एंट्री प्रतिबंधित करना उसके लिए शर्म की बात होगी। यही राष्ट्रपति  का “ट्रंप कार्ड“ है। इसका तुरंत असर भी हुआ और दिन ढलते-ढलते नवाज सरकार ने हाफिज सईद को नजरबंद कर लिया। बहरहाल, आतंकी सईद को नजरबदी महज ड्रामा है।  ट्विटर पर यह प्रतिक्रिया “ हाफिज सईद को घर में नजरबंद किया गया है, यानी अब चिकन बिरयानी की होम डिलीवरी की जाएगी“, हाफिज सईद की नजरबंदी की प्रासंगिकता को दर्शाती  है।  मुंबई नरसंहार में 174 निर्दोष  लोगो के हत्यारे के लिए नजरबंदी सजा नहीं सम्मान है। पाकिस्तान में भी इसे नाटक ही बताया जा रहा है। हाफिज को लाहौर की उसी मस्जिद में नजरबंद रखा गया है, जहां से वह भारत के खिलाफ आतंकी वारदातों की साजिश  रचा करता है। जमात-उद-दावा एवं लश्कर  के सुरक्षा गार्डस बाहर पहरा दे रहे हैं। पुलिस का पहरा सिर्फ दिखावे को है। हाफिज इससे पहले भी समय-समय पर नजरबंद किया जा चुका है। दिसंबर, 2001 में भारतीय संसद पर हमले को लेकर भी सईद को हिरासत में लिया गया था मगर मार्च 2002 में रिहा कर दिया गया। इसके बाद अक्टूबर 2002 में फिर उसे नजरबंद रखा गया था। इसके बावजूद हाफिज सईद ने 2008 में मुंबई नर संहार की साजिश  रची। भारत सरकार भी हाफिज सईद की नजरबंदी को महज ड्रामा मान रही है। भारत यूएनएससी के नियम 1267 के तहत सभी आतंकी संगठनों, उनकी संपत्तियों और उनसे जुडे आतंकियों के खिलाफ सख्त  एक्शन  की मांग कर रहा है। आतंकी सरगने के खिलाफ नजरबंदी की कार्रवाई कोई सख्त  एक्शन  नहीं है।