पंजाब के बारे यह बात जगत प्रसिद्ध है कि अगर सडक पर चलते भी किसी पंजाबी को विदेश जाने का न्यौता दिया जाए, तो वह फौरन तैयार हो जाएगा और अपना अब सब कुछ बेच-बाच कर आपके साथ चल देगा। इसी कारण दुनिया में सबसे ज्यादा प्रवासी पंजाब से है। दुनिया में सबसे ज्यादा 1.6 करोड (16 मिलियन) भारतीय अप्रवासियों मेंसे 1.2 करोड (12 मिलियन) पंजाबी हैं। एनआरआई आय में भी भारत सबसे आगे है। 40 फीसदी एनआईआर आय से केरल देश में सबसे आगे है जबकि 13 फीसदी रेमिटेंसस के साथ पंजाब दूसरे स्थान पर है। पंजाब में विदेश जाने के जनून की वजह से ही राज्य में “कबूतरबाजों“का धंधा पनपा है। विदेश जाने के “पंजाबी जनून“ का ख्याल करते हुए सत्तारूढ शिरोमणि अकाली दल ने इस बार अपने चुनावी घोषणा पत्र (मेनिफेस्टो) में अमेरिका और कनाडा में एक लाख एकड जमीन खरीद कर किसानों को वहां बसाने का वायदा तक किया है। पहली बार देश के किसी राजनीतिक दल ने “ब्रेन गेन की बजाय ग्रेन ड्रेन“ का नारा बुलंद किया है। यह बात दीगर है कि अकाली दल का यह वायदा उसकी सहयोगी पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “ब्रेन गेन“ नारे से एकदम उलट है। अकालियों ने 2012 में मतदाताओं को लैपटॉप देने का वायदा किया था। पांच साल गुजर गए मगर अकाली सरकार इस वायदे को पूरा नहीं कर पाई। पंजाब के किसान अपने परिश्रम और देसी उपजाऊ खेती तकनीक के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते है। जॉर्जिया समेत दुनिया के कई देशो में पंजाब के किसानों ने जमीन खरीद कर स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था में खासा योगदान दिया है। अफ्रीका के कई देश पंजाब के किसानों को वहां आने का न्योता देते रहते हैं। अकालियों का यह चुनावी वायदा किसानों को आकर्षित कर सकता है। बहरहाल, पंजाब के विकास में अप्रवासी पंजाबियों की बहुत बडी भूमिका रही है। अप्रवासियों ने पंजाब के दोआबा और मालवा बेल्ट का काया कल्प कर डाला है। अब तक अप्रवासी पंजाबी राज्य में 15,000 करोड रु से अधिक का निवेश कर चुके हैं। जगह-जगह अस्पताल, स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थाए खोली गईं हैं। गांव-गांव में अप्रवासी भारतीयों के आलीशान भवन और संस्थागत विकास क्षेत्र की आर्थिक सपन्नता की गवाह हैं। पंजाब का जनमानस मानता है कि राज्य का विकास कराने में सरकार से ज्यादा अप्रवासी पंजाबियों का हाथ है। इस बात के दृष्टिगत पंजाब में अप्रवासी पंजाबी किसी भी पार्टी के पक्ष में हवा बना सकते हैं। पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रचार में इस बार अप्रवासी पंजाबी बढ-चढ कर भाग ले रहे हैं। आम आदमी पार्टी के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए हर रोज विदेशों से अप्रवासी पंजाब आ रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने दस हजार अप्रवासियों को पंजाब में चुनाव प्रचार के लिए आमंत्रित किया है और इन मेंसे अधिकांश पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पिछले साल अप्रैल में अप्रवासी पंजाबियों से मिलकर अपने चुनाव प्रचार की शुरूआत की थी। पंजाब के विधानसभा चुनाव कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों के लिए खासे अहम है। आम आदमी पार्टी की दिल्ली से बाहर कितनी पकड है, पंजाब के चुनाव यह तय करेंगे। कांग्रेस का पूरे देश में करीब-करीब सफाया हो चुका है। उत्तर भारत में अभी कांग्रेस हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सत्ता में है। उत्तराखंड में भी पंजाब के साथ चुनाव हो रहे है और विभिन्न चुनाव सर्वेक्षणो में वहां भाजपा का पलडा भारी बताया जा रहा है। वैसे भी इस पहाडी राज्य में अब तक कांग्रेस और भाजपा की बारी-बारी सरकार बनती रही है। हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं और अगर कांग्रेस की पंजाब में सरकार बनती है, तो इसका सकारात्मक असर हिमाचल प्रदेश के चुनाव पर पड सकता है। इतना तय है कि इस बार पंजाब के चुनावी समर में अप्रवासी पंजाबियों की अहम भूमिका रहेगी।
सोमवार, 30 जनवरी 2017
Udate Punjabis To Have Big Say In Punjab Assembly Elections
Posted on 7:37 pm by mnfaindia.blogspot.com/






