बुधवार, 11 जनवरी 2017

Not Condemnation But BSF Jawan Complaint Needs Consideration

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान कौ फेसबुक पर खाने की घटिया क्वालिटी की   शिकायत से देश -विदेश  में बवाल मच गया है। बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव की यह  शिकायत पूरी दुनिया में मीडिया और सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है और पाकिस्तान में इसका खूब मजाक उडा जा रहा है।  शिकायतकर्ता  जवान ने सोमवार रात को फेसबुक पर अपना मोबाइल भी डाला है। बीएसएफ जवान ने फेसबुक पर अपनी  शिकायत में जली हुए परौंठे और पानी जैसी पीली दाल की फोटो डाली है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने इस  शिकायत पर जाँच  बैठा दी है और  शिकायत करने वाले जवान का तबादला कर दिया है। जवान की  शिकायत से क्षुब्ध बीएसएफ ने  स्पष्टीकरण  दिया है कि “तेज बहादुर यादव का अतीत  शिकायत भरा रहा है। करियर के  शुरु में उन्हें नियमित काउसिंलिंग की जरुरत पडती थी। लगातार  शराब पीने, बगैर इजाजत के गायब रहने और सीनियर अफसरों से दुर्व्यवहार करने के उन पर आरोप लगते रहे हैं“। सीमा सुरक्षा बल की जिस यूनिट में तेज बहादुर तैनात था, वह सेना के अधीन काम कर रही थी और इस यूनिट का राशन सेना से ही आ रहा था। बहरहाल, सोशल मीडिया और टीवी चैनल्स पर सवाल किया जा रहा है कि अगर जवान पर  शराब पीने, बगैर अनुमति के गायब रहने और अफसरों से बुरा सलूक करने के संगीन आरोप थे, तो उन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई़? अनुशासनहीन जवान को बीएसएफ क्यों सहन करती रही़? जाहिर है बीएसएफ अब अपनी छवि को बचाने के लिए जवान के खराब सर्विस रिकार्ड का हवाला देकर अपना पल्लू झाड रही है। पूर्व सैन्य अधिकारी इस बात से  सहमत  नहीं  है कि सीमा सुरक्षा बल में डाइट को लेकर इस तरह की खामी हो सकती है। सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान समेत सैनिकों की डाइट को लेकर एक फुलप्रूफ सिस्टम है और खाने की क्वालिटी की बार-बार जांच की जाती है। इसके अलावा हर सैनिक की  शिकायत निपटान के लिए भी एक पूरी पद्धति है और जवान की शिकायत का तुरंत निपटान किया जाता है। तथापि  इतना फूलप्रूफ सस्ते होने के बावजूद अगर सीमा सुरक्षा बल जवान ने  शिकायत  की हे  तो इसे  टाला नहीं जा सकता। जवान यादव ने फेसबुक पर जो फोटो पोस्ट किए हैं, उनमें अगर जरा भी सच्चाई है तो मुद्दा बेहद गंभीर हैं। सेना के राशन सप्लाई में गडबडी की अक्सर  शिकायतें सामने आती रही हैं।  कैग ने अपनी  रिपोर्ट में खराब खाने का हवाला दिया है । 2011 में राशन के गोलमाल के लिए ले, जनरल स्तर के अधिकारी को जनरल कोर्ट  मार्शल  ने तीन साल की कडी कैद की सजा दी थी। 2008 में सियाचीन में तैनात सेनिकों के लिए आवंटित राशन को कथित रुप से ब्लैक में बेचने के लिए 3 अफसरों समेत 13 सैनिकों को जांच में दोषी पाया गया था।  आर्मी के एक अध्ययन से यह बात भी सामने आई है कि सेना के लॉजिस्टीक में व्याप्त कई खामियों से सैनिकों की जान खामख्वाह खतरे में पड जाती है। मंगलवार को एक अग्रणी समाचार पत्र में प्रकाशित खबर में बयाया गया है कि अध्ययन में सेना की 50 खामियों को उजागर किया गया है। इनमें  शारीरिक कवच (बॉडी आर्मर), नाइट विजन गियर और त्रुटिपूर्ण ईंधन भडारण जैसी कमियां  शामिल है। इस रिपोर्ट में सतर्क किया गया है कि अगर  सेना ने अपनी अग्रिम चौकियों (फॉरवर्ड बेसिस ) में ईंधन भडारण (फ्यूल स्टोरेज) को और ज्यादा सुरक्षित नहीं किया तो हजारों जवानों की सुरक्षा खतरे में पड सकती है। उडी में 14 सैनिक इसलिए जिंदा जल कर मारे गए थे क्योंकि उनके टैंट एकदम फ्यूल डंप के साथ सटे थे। हालांकि  रिपोर्ट से बीएसएफ जवान के आरोपों से कोई वास्ता नहीं है मगर यह भी सच्चाई है कि सेना इन दिनों तरह-तरह की लॉजिस्टिक समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे समय में जवान की डाइट संबंधी  शिकायत का फौरन निपटान होना चाहिए।