बुधवार, 18 जनवरी 2017

Navjot Singh Sidhu's Home Coming

चुनावी बयार किस ओर बह रही है, फिजाओं की नजाकत और दीवारों पर लिखी इबादत इस बात को साफ-साफ बयां कर देती हैं। काफी समय तक ईधर-उधर भटकने के बाद कांग्रेस में शामिल हुए क्रिकेटर से राजनीति में आए नवजोत सिंह सिद्धू का मंगलवार को अमृतसर में विशाल रोडशो  भी  स्पष्ट  कह रहा है “ पंजाब में चुनावी बयार किस ओर बह रही है “। कांग्रेस में  शामिल होने के बाद  नवजोत सिंह सिद्धू  6 माह बाद अमृतसर लौटे और “घर वापसी“ पर लोगों ने उनका जबरदस्त स्वागत किया।  सिद्धू  के काफिले को एयरपोर्ट से स्वर्ण मंदिर (गोल्डन टेंपल) तक की 11 किमी दूरी को तय करने में 6 घंटे से भी अधिक का समय लग गया। लोगों में इस कद्र उत्साह था कि अपने पति का बेसब्री से इंतजार कर रही श्रीमती नवजोत कौर सिद्धू को भी उनसे मिलने घंटों लग गए। रास्ते में सिद्धू को “आम आदमी पार्टी“ का प्रत्याशी  भी चुनाव प्रचार करते मिला मगर अमृतसर ईस्ट से कांग्रेस प्रत्याषी के विशाल  काफिले के समक्ष यह भी बौना नजर आया। पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए 4 फरवरी को वोट डाले जाने है। मतदान से पहले कांग्रेस नेताओं की जनसभाओं में भारी भीड जुट रही है। नवजोत सिंह सिद्धू की अपनी लोकप्रियता है और उन्हें  स्पष्टवादी  और खरी-खरी सुनाने के लिए जाना जाता है। उनका  शायराना अंदाज, हाजिर जबावी और आलोचकों की चुटकियां लेने की कला सिद्धू को औरो से कहीं अलग बना देती है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि सिद्धू कांग्रेस के लिए पंजाब में वरदान साबित हो सकते हैं। सिद्धू ने यह कहकर कांग्रेस का मान बढाया है कि “ वे तो जन्मजात कांग्रेसी हैं“।  बहरहाल, कांग्रेस इस बार पंजाब में सत्ता में आने के लिए कोई कसर नहीं छोड रही है। पंजाब में कांग्रेस को इस बार सत्तारूढ  शिरोमणि अकाली दल -भाजपा  गठबंधन के साथ-साथ आम आदमी पार्टी से भी कडी चुनौती मिल रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आप के  राष्ट्रीय   संयोजक अरविंद केजरीवाल काफी पहले से पंजाब में प्रचार कर रहे हैं और उनकी जनसभाओं में जुटी भीड भी इस बात के संकेत हैं कि कांग्रेस को आप से भी मुकाबला करना पड रहा है। तिकोना मुकाबला और उस पर एंटी इंकूबेंसी लहर  अमूमन सत्तारूढ दल के खिलाफ काम करता है। कांग्रेस के पंजाब में अपने पक्के वोट हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी इस वोट बैंक में मोदी लहर सेंध नहीं लगा पाई थी। अमूमनम हर चुनाव में “ 10 से 15 फीसदी“ स्विंग वोट ही चुनाव नतीजे तय करते  है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के उम्मीदवार और प्रदेश  कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री प्रकाश  सिंह बादल के खिलाफ लंबी  और सांसद रवनीत बिट्टू को उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के खिलाफ जलालाबद हलके  से उतार कर बडा दांव खेला है। यह अकालियों को घेरने की सटीक नीति है। चुनाव बयार सत्तारूढ गठबंधन के पक्ष में नही बह रही है, मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की जनसभाओं में विरोध के स्वर उठना इस बात के संकेत है।  शिरोमणि अकाली दल के पास राज्य में पिता-पुत्र बादल दो ही स्टार प्रचारक है और इन दोनों को उनके हलकों में घेरे रखना कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अकाली-भाजपा के लिए प्रचार करेंगे तो सही मगर विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव जैसी “मोदी लहर“ नही दिख रही है। प्रदेश  कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं और सबसे ज्यादा लोकप्रिय भी। लोकसभा चुनाव में अमृतसर लोकसभाई हलके से भाजपा के कद्दावर नेता अरुण जेटली को मोदी लहर के बावजूद एक लाख से भी ज्यादा मतों से हराना कैप्टन की लोकप्रियता का प्रंमाण है। उस समय  शिअद अध्यक्ष एवं उप मुखयमंत्री सुखबीर बादल ने कैप्टन की जमानत जब्त कराने का दावा कर अपनी जगहंसाई की थी। इतना तय है कि कैप्टन वयोवृद्ध अकाली नेता को लंबी में जबरदस्त चुनौती देंगें।