शनिवार, 7 जनवरी 2017

और वे सोए-सोए चले गए

ओम पुरी को अपनी मौत का आभास हो गया था। महान सिने और रंगमंच कलाकार ने  2015 में बीसीसी को एक साक्षात्कार में कहा था, “सोए-सोए चल देंगे“। आपको पता चलेगा कि ओमपुरी का कल सुबह 7 बज कर 22 मिनट पर निधन हो गया“। और ठीक ऐसा ही हुआ। शुक्रवार 6 जनवरी को सुबह करीब साढे सात बजे उनका दिल का दौरा पडने से निधन हो गया। जिंदादिल ओम पुरी मौत से कुछ घंटे पहले अपनी आने वाली फिल्म “रामभजन जिंदाबाद“ के लिए  शूट कर रहे थे। देर रात तक दोस्तों से बतियाते रहे और फिर ऐसे सोए कि दोबारा नहीं उठे। ओमपुरी गजब के कलाकार थे और उन्हें जो भी किरदार दिया जाता, उसे एकदम जीवंत बना देते। ओम पुरी ने अदाकारी का एक नया अध्याय लिखा ।  आर्ट  सिनेमा को सफल बनाने में ओम पुरी, नसीरुद्यीन शाह और शबाना आजमी की अहम भूमिका रही है।  भाग्य की विडंबना देखिए कि जिस बॉलीवुड ने शुरु में उनके चेहरे और आवाज का मजाक उडाया, वही बाद में इनसे  सबसे अधिक लाभान्वित हुआ । उन्होंने 100 से ज्यादा हिंदी और 20 हॉलीवुड फिल्मों में काम किया। मशहुर ब्रितानवी निदेशक रिचर्ड  एटनबरो की फिल्म “गांधी“ में ओम पुरी ने महज तीन मिनट का किरदार निभाया था मगर इस अदने से किरदार को उन्होंने इस कद्र जीवंत बना दिया कि फिल्म के अहम किरदार तक उनके सामने बौने लगे। “अर्ध सत्य“ और “आरोहण“ में लाजबाव अभिनय के लिए ओम पुरी को “ बेस्ट एक्टर“ के नेशनल अवार्ड  से नवाजा गया था। सरकार ने उन्हें पद्मम श्री   से भी नवाजा  और उन्हें आर्डर ऑफ ब्रिटिश अम्पायर भी मिला ।  1999 में बनी अंग्रेजी बजट फिल्म “ईस्ट इज ईस्ट“ से उहें अंतरराष्ट्रीय  पहचान मिली । इस फिल्म में ओम पुरी ने पाकिस्तानी का किरदार निभाया था। ओम पुरी हर तरह का किरदार निभाने में निपुण थे। कॉमेडी में भी उनकी कोई सानी नहीं थी। उनकी “जानो भी दो यारो“ आज भी  श्रेष्ठ   कॉमोडी फिल्म मानी जाती है। मूलतः हरियाणा के अंबाला में जन्मे ओम पुरी का बचपन तंगी में बीता मगर उहें शुरु से थियेटर से बेहद लगाव था। इसी लगाव के कारण वे अंबाला से चंडीगढ आ गए और एक वकील के मुंशी  बन गए। पर थियेटर के प्रति लगाव के कारण ही ओम पुरी ने वकील की मुशीगिरी छोड दी। चंडीगढ में उनके नाटक का मंचन होना था। इसके लिए उन्हें तीन दिन का अवकाश  चाहिए था मगर वकील छुट्टी देने से साफ मुकर गए। इस पर ओम पुरी ने नौकरी को ही लात मार दी। उनके साथियों को जब इस बात का पता चला कि ओम पुरी की नौकरी छूट गई है, उन्होंने प्रिसिंपल से बात की। जैसे-तैसे ओम पुरी को लैब सहायक की नौकरी मिल गई। और इसके बाद ओम पुरी ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में नौकरी  की और रंगमंच के दांव-पेंच भी सीखे। ओम पुरी साफगोई और स्पष्टवादी  थे, इसलिए कई बार उनकी बातों का गलत अर्थ निकाला जाता। सर्जिकल स्ट्राइक पर उनके बयान “ उन्हें आर्मी में भर्ती होने के लिए किसने कहा था, और किसने हथियार उठाने को कहा था“ पर खासा बवाल मचा और उन पर मामला भी दर्ज  हुआ। बाद में उन्हें इस पर माफी मांगनी पडी। सफलता ने उनके कदम चूमे पर उनका पारिवारिक जीवन उथल-पुथल भरा रहा। उन्होंने दो शादियां की मगर दोनों टूट गईं। उनकी दूसरी पत्नी नंदिता पुरी ने अपनी पुस्तक में ओम पुरी की निजी जिंदगी को लेकर कुछ ऐसी बातें सार्वजनिक की, जिससे उनके जीवन में भूचाल सा आ गया । इसका उन्होंने बहुत बुरा माना । अपने पुत्र ईशान से उन्हें बेहद लगाव था मगर उन्हें इस बात का अफसोस था कि उन्हें बेटे से मिलने नहीं दिया जाता। कलाकार कभी नहीं मरता क्योंकि उनकी कला हमेशा  जिंदा रहती है। ओम पुरी के निधन से भारतीय सिनेमा में जो  शून्य आया है, उसे भरना आसान नहीं है।