साउथ अमेरिका के प्रमुख तेल उत्पादक देश वेनेजुएला ने भी भारत की देखादेखी अपनी मुद्रा बोलिवर का विमुद्रीकरण करके माफिया के काले धन पर प्रहार क्या किया, पूरे देश में हिंसा फैल गई। वेनेजुएला के राश्ट्रपति निकोलस मादुरो ने 11 दिसंबर को देश में प्रचलित मुद्रा की सबसे बडी 100 बोलिवर करंसी की नोटबंदी (विमुद्रीकरण) की थी। एक सप्ताह बाद राष्ट्रपति को अपना फैसला स्थगित करना पडा। सरकार ने विमुद्रीकरण के लिए 72 घंटे की मोहलत दी थी। जिस समय बोलिवर का विमुद्रीकरण किया गया, तब इसकी कीमत डॉलर के मुकाबले दो सेंट से भी कम रह गई थी। 100 बोलिवर भारतीय 675 रुपयों के बराबर है। काले धन ने वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को तबाह कर रखा है। पूरे 2016 में इस देश में काले मुद्रा का दबदबा रहा। कहते हैं द्धितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी मुद्रा ( मार्क) की हालात यह हो गई थी कि लोगों को बोरों में भर कर करंसी ले जानी पडती और सामान जेब में डाल कर लाया जाता। लगभग यही स्थिति वेनेजुएला की है। वेनेजुएला की मुद्रा इस कद्र कमजोर हो चुकी है कि दुकानदार सामान तोलने की बजाए अब मुद्रा तोल रहे हैं। वेनेजुएला की कुल प्रसारित मुद्रा में 77 फीसदी हिस्सा 100 बोलिवर का था। इसके विमुद्रीकरण से महंगाई से पीडित जनता की क्रिसमिस से पहले बची-खुची क्रय शक्ति भी जाती रही। नोटबंदी के बाद से फैली हिंसा में तीन लोग मारे गए। हताशा में लोगों ने 100 बोलिवर से या तो सिगरेट जलाई अथवा उन्हें विरोधस्वरुप लैंपपोस्टों और दीवारों पर चिपका दिया । नई करंसी नहीं मिलने और पुरानी नहीं चलने पर गुस्साए लोगों ने दुकानें लूट लीं और जगह-जगह कानून अपने हाथ में ले लिया। भारत की ही तरह नोटबंदी के कारण पुराने बोलिवर जमा कराने के लिए बैंकों के समक्ष लोगों का हजूम उमड पडा। तीन लोगों की मौत, लूट-पाट और हिंसक प प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति मादुरो को नोटबंदी का फैसला दो जनवरी तक टालना पडा। बेलगाम महंगाई पर नियंत्रण पाने और माफिया द्धारा जमा की जा रही अवैध करंसी को निष्क्रिय करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया था। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का आरोप है कि विदेशी साजिश के तहत नई मुद्रा से भरे तीन हवाई जहाज वेनेजुएला नहीं पहुंच पाए, जिस वजह लोगों को नई करंसी नहीं मिल पाई। मूलतः, वेनेजुएला तेल उत्पादक समृद्ध देश है और इसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तेल के अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर निर्भर है। पिछले कुछ समय से तेल की कीमतों में भारी गिरावट के कारण वेनेजुएला गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। माफिया और काली कमाई करने वालों ने भारी मात्रा में 100 बोलिवर की अरबों करंसी कोलंबिया और ब्राजील में छिपा रखी है। इससे वेनेजुएला में महंगाई चरम पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का आकलन है वेनेजुएला मैम मुद्रा-स्फीति 475 फीसदी से भी अधिक है। वेनेजुएला की स्थिति भारत से एकदम भिन्न है। भारत में महंगाई दर पहले की तुलना में काफी कम है। वेनेजुएला में काले धन की समस्या भारत से भी ज्यादा गंभीर है। ब्लैक मार्केट रेट को नियंत्रित करने के लिए वेनेजुएला में दो एक्सचेंज रेट है। इसके बावजूद भी करंसी की ब्लैक मर्केट को रोका नहीं जा सका है। बहरहाल, भारत सरकार को वेनेजुएला की स्थिति से सबक लेना चाहिए। वेनेजुएला की तरह अब नोटबंदी पर जनता का गुस्सा फूटने लग पडा है। कई जगह बैंक कर्मियों को जनता के गुस्से का सामना करना पड रहा है। भारतीय जनमानस के धैर्य की तारीफ की जानी चाहिए। जनमानस ने सरकार को सामान्य स्थिति लाने के लिए लंबा समय दिया है। गाय भी लंबे समय तक खूटे से बंधने रहने पर सींग मारती है। सरकार को अब तो नोटबंदी पर चाक-चौबंद हो जाना चाहिए।
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