बुधवार, 21 दिसंबर 2016

पहले चीन, अब ब्रिटेन

दो सौ साल से भी ज्यादा समय तक भारत पर उपनिवेशवादी राज करने वाले ब्रिटेन को भारत ने मात्र सात दशक की आजादी के बाद पीछे छोड दिया है। पिछले डेढ़ सौ साल में पहली बार भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) ब्रिटेन से ज्यादा हो गया है। अब भारत अमेरिका, चीन,जापान, फ्रांस और जर्मनी के बाद दुनिया की छठी सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। और वह दिन भी दूर नहीं है जब भारत जापान, फ्रांस और जर्मन को भी जीडीपी में पीछे छोड देगा। ताजा आकलन है कि अगले चार साल में 2021 तक भारत जीडीपी में तीसरे पायदान पर पहुंच जाएगा। वैसे 8.7 खरब डॉलर की परचेंजिंग पॉवर पेरिटी के लिहाज से भारत दुनिया में पहले ही तीसरे पायदान पर है। साल 2016 भारत के लिए बेहतरीन रहा है और इस दौरान भारत ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इस साल फरवरी में भारत ने चीन को तीव्रतम ग्रोथ में पीछे छोड दिया था। भारत इस समय दुनिया की तेजी से आगे  बढती  नबंर वन अर्थव्यवस्था है। और अब  वर्षान्त  तक भारत ब्रिटेन को पछाड कर छठी सबसे बडी अर्थव्यवस्था बन गई है। पहले आकलन था कि भारत मौजूदा ग्रोथ की रफ्तार से 2020 में जीडीपी के मामले में ब्रिटेन से आगे निकल पाएगा। लेकिन ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन (ईयू) से बाहर निकलने के बाद उसकी मुद्रा में 20 फीसदी से भी ज्यादा गिरावट आने से भारत आगे निकल गया है। ताजा आकलन के अनुसार पॉउंड की मौजूदा विनिमय दर के हिसाब से ब्रिटेन का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2.29 खरब (ट्रिलियन) डॉलर आंका गया  है। इसकी तुलना में भारत की जीडीपी मौजूदा विनिमय दर पर 2.30 खरब डॉलर है। अमेरिका 18.5 खरब (ट्रिलियन) डॉलर के साथ पहले नंबर पर है। 11.3 खरब डॉलर की चीनी अर्थव्यवस्था दूसरे नंबर पर, 4.93 खरब डॉलर के साथ जापान तीसरे, 3.40 खरब डॉलर की जर्मन अर्थव्यवस्था चौथे और 2.49 खरब डॉलर जीडीपी वाला फ्रांस पांचवे स्थान पर है। यूरोपियन यूनियन छोडने से पहले ब्रिटेन की जीडीपी 2.65 खरब डॉलर की थी और वह पांचवे नंबर पर था मगर ईयू से बाहर आने के बाद वह फ्रांस से पिछड कर छठे नबर पर और अव सातवें पायदान पर पहुंच गया है। भारत का ग्रोथ रेट क्योंकि ब्रिटेन से कहीं ज्यादा है, इसलिए आने वाले  समय में इंडिया इग्लैंड से कहीं आगे निकल जाएगा। 2016 में ब्रिटेन की ग्रोथ रेट 1.7 फीसदी और 2017 में 1.1 फीसदी रहने का अनुमान है। अगर नोटबंदी का बहुत ज्यादा असर नहीं हुआ तो भारत की ग्रोथ रेट 2016 और 2017 में 7.6 फीसदी को भी पार कर सकती है। यह चीन की ग्रोथ रेट से भी ज्यादा है। चीन की 2016 और 2017 में ग्रोथ रेट 7 फीसदी से नीचे रहने की संभावना है। तथापि ब्रिटेन को जिस तरह से यूरोपियन यूनियन को भारी खमियाजा भुगतना पड रहा है, भारत को भी “ नोटबंदी“ से तगडा झटका लग सकता है। अधिकांश  अग्रणी अर्थशास्त्रियों का आकलन है कि नोटबंदी से भारत के सकल घरेलू उत्पाद में दो फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। इससे भारत का 2021 में तीसरे पायदाने पर आने का सफर बाधित हो सकता है। ताजा पायदान से हमें ज्यादा इतराने की जरुरत नहीं है। प्रति व्यक्ति आय में ब्रिटेन अभी भी भारत से कही आगे है। भारत की 130 करोड आबादी के लिए 2.30 खरब डॉलर की जीडीपी कम पडती है और उसकी प्रति व्यक्ति आय (पर केपिटा इंकम) 1.18 लाख रु के करीब है तो ब्रिटेन की प्रति व्यक्ति आय भारत से 23 गुना ज्यादा 27.78 लाख रु है। इससे पता चलता है कि भारत में आर्थिक विषमता कितनी अधिक है। फॉस्ट ग्रोथ के तब तक कोई मायने नहीं जब तक यह आर्थिक विषमता को कम करने की जगह इसे और  बढ़ाए । भारत की 40 फीसदी आबादी  आज भी गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करती है और उसे दो समय का भरपेट भोजन भी नहीं मिल पाता  ।