आजाद भारत के कर्नाटक राज्य (तब मैसूृर) में जन्मी-पली और कन्नड सिनेमा से तमिल फिल्मों में पर्दापण कर नायिका से सियासी क्वीन बनी जयराम जयललिता के निधन से एक युग का अंत हो गया है। वे आम औरत की तरह कतई नहीं थी। उन्होंने कई परंपराएं तोडीं और नई परंपराएं कायम की। मीडिया के लिए जयललिता एक एग्निमा थीं, विरोधियों के लिए तीखी मिर्च, समर्थकों के लिए “अम्मा“। भारत में महिला को बुलंदियां छूने के लिए जितना संघर्ष करना पडता है, जयललिता ने उससे कहीं ज्यादा स्ट्रगल किया। और संघर्ष इतना किया कि अम्मु की शख्सियत आसमान को छूने लग पडी। तमिल नाडु में अपने जमाने में कल्ट माने जाने वाले एमजीआर (एम जी रामचन्द्रन) की राजनीतिक विरासत को पाना और निभाना आसान नहीं था। पर जयललिता ने यह भी संभव कर दिखाया। उन्होंने एमजीआर को भी पीछे छोड दिया। वे इरादों की पक्की थीं और जिस बात की ठान लेती, उसे पूरा करके ही हटतीं । तमिल नाडु विधानसभा में एक बार द्रमुक सदस्य ने उनका पल्लू खींच लिया था। इससे गुस्साई जयललिता ने तब सदन में ही द्रमुक सरकार को गिराने का संकल्प लिया और इसे 1991 में मुख्यमंत्री बनकर पूरा करके छोडा। राजनीति सूझबूझ में जया की सानी नहीं थी। 1990 में मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू किए जाने पर तमिल नाडु में विकट स्थिति खडी हो गई थी। ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण दिया जाना था मगर सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के अनुसार आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा नही दिया जा सकता था। ओबीसी को आरक्षण दिए जाने से तमिल नाडु में आरक्षण की सीमा 69 फीसदी को पार कर रही थी। यह सुप्रीम कोर्ट व्यवस्था की अवहेलना होती। तब जयललिता ने विधानसभा में 69 फीसदी आरक्षण सीमा का विधेयक पारित करवाकर केन्द्र को भी विवश कर दिया क़ि इसे संविधान की नौंवी अनुसूची में डालकर आरक्षण को न्यायिक समीक्षा से ही बाहर किया जाए। इसी वजह बाद में संविधान में 76वां संशोधन हुआ। जयललिता अडियल इतनी कि 2001 में राज्य के दो लाख कर्मचारी जब अचानक हडताल पर चले गए, तब पंगु प्रशासन से क्षुब्ध मुख्यमंत्री जयललिता ने सभी हडताली कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया। किसानों को दी जा रही मुफ्त बिजली बंद कर दी और लॉटरी को भी समाप्त कर दिया। 2004 में कांचीपुरम में एक मंदिर के मैनेजर की हत्या में कांची पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती का नाम आया, तब जयललिता उन्हें गिरफ्तार करवाने से भी पीछे नहीं हटी। अक्कडपन, प्रतिशोध और रुखापन उनके स्वभाव का अहम हिस्सा थे। द्रमुक की सरकार बनने पर जब मुख्यमंत्री करुणानिधि ने उनके गहने जब्त किए गए, जया ने 14 साल तक गहने नहीं पहने। बाद में मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने करुणानिधि को आधी रात गिरफ्तार करवाया था। दो साल की थी, पिता चल बसे। पिता की कमी उन्हें ताउम्र खलती रही। संभवतय, इसी वजह पुरुषो के प्रति उनका पूर्वाग्रह बना रहा। इसी वजह समकालीन राजनीतिक नेताओं को उन्होंने मर्दानगी दिखाने का कोई अवसर नहीं दिया । जयललिता अविवाहिता रहीं। पुरुषों को या तो दिल में जगह दी या चरणों में। बचपन में अम्मु नाम रखा गया और राजनीति में आने पर जयललिता गरीबों, कमजोर तबकों और महिलाओं की अम्मा बन गईं। तमिल नाडु में बाहृमण विरोधी मानसिकता द्रविड आंदोलन की नींव बनीं थी। तमिल नाडु में पिछडों का बाहुल्य है और मगर विडम्बना देखिए कि जयललिता ब्राहृण होते हुए भी पिछडों के दिलों पर राज करती रही और उन्ही के समर्थन से लगातार पांच बार राज्य की मुख्यमंत्री बनी। गरीबों के लिए जयललिता ने अम्मा नमक, अम्मा सीमेंट, अम्मा फार्मेसी, अम्मा कंटीन और अम्मा पीने का पानी जैसी स्कीमें शुरू की। गरीब और कमजोर तबके जयललिता की आंखों में अपने सपनों को देखते। उनके निधन से तमिल नाडु की सियासत में जो शुन्य आया है, उसे लंबे समय तक भरा नहीं जा सकता ।
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