सोमवार, 5 दिसंबर 2016

पाकिस्तान की कुटिल हरकत

 अमेरिका के नव-निर्वाचित  राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच  टेलिफोन पर हुई बातचीत की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। पाकिस्तान ने छल-कपट करके जिस तरह से इस बातचीत को बढ-चढ कर अपने पक्ष में पेश  किया है, उससे इस्लामाबाद फिर पूरी दुनिया के सामने नंगा हो गया है। पाकिस्तान प्रैस इंफॉर्मेशन ब्यूरो ने बाकायदा प्रैस विज्ञप्ति जारी करके दावा किया है कि नव-निर्वाचित  राष्ट्रपति  ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा है कि “ आप  (शरीफ)  बहुत अच्छा काम कर रहा है जो हर तरफ साफ नजर आ रहा है“। पाकिस्तान का यह भी दावा है कि ट्रंप ने पाकिस्तान को गजब का देश  बताते हुए कहा है कि उसके लोग बहुत समझदार हैं“। मुमकिन है नए राश्ट्रपति ने नवाज शरीफ के बधाई संदेश  के जवाब में ऐसा कहा हो। अमूमन, जब भी दो देशों  के राज्याध्यक्ष  अथवा बड़े नेता एक-दूसरे से बात करते हैं, तो कटुता की बजाए  शालीनता और प्यार-मोहब्बत से औपचारिक बातें करते हैं मगर इसका यह कतई मतलब नहीं होता है कि इससे रातों-रात द्धिपक्षीय संबंध सुधर जाएंगे। अमेरिका के लिए पाकिस्तान आज भी “आतंक“ को पालने-पोसने वाला देश  है और नव-निर्वाचित  राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान कई बार यह बात कह चुके हैं। पाकिस्तान के इस महिमामंडन पर टीम ट्रंप ने स्पष्टीकरण भी दिया है कि नवाज शरीफ ने नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बधाई देने के लिए फोन किया था और इस दौरान दोनों नेताओं में “सकारात्मक“ बातचीत हुई। पाकिस्तान ने इस बातचीत को मसालेदार बनाकर अपने फायदे के लिए भुनाने की कोशिश की है। टीम ट्रंप के अनुसार पाकिस्तान सरकार का बयान मूल बातचीत से एकदम बेमेल है। इसे खूब बढा-चढा कर महिममंडित किया गया है। किसी देश  द्धारा   दो बडे नेताओं के बीच बातचीत को बढा-चढा कर पेश  करने का  यह अनोखा मामला है। पाकिस्तान की इस हरकत से कूटनीति  शर्मसार हुई है। अमेरिकी मीडिया ने भी पाकिस्तान  की इस बेजा हरकत पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि यह प्रोटोकोल के गंभीर उल्लघनं का मामला है। अब दुनिया को पता चला है कि पाकिस्तान कितना झूठ  बोलता है। कोई भी समझदार नेता नवाज  शरीफ की तरह “अपने मुंह, मियां मिठ्ठू“ नहीं करेगा। नव-निर्वाचित राष्ट्रपति ने अभी शपथ भी ग्रहण नहीं की है। अभी वे अपनी टीम के गठन की प्रकिया में है। पाकिस्तान के प्रति ट्रंप की नीति क्या होगी, इसका खुलासा उनके व्हाइट हाउस पहुंचने के बाद ही होगा। मगर इतना तय है कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच मौजूदा तल्ख संबंध जल्द सुधरने वाले नहीं है। ट्रंप ही नहीं, निवृतमान राष्ट्रपति  बराक ओबामा भी पाकिस्तान को “आंतक“ मददगार देश  बता दे चुके हैं और कई बार उसे आतंकियों पर नकेल डालने की सलाह दे चुके हैं। सच यह है कि पाकिस्तान का वजूद ही आतंक पर टिका है। वहां की सरकार के लाख चाहने के बावजूद पाकिस्तान आतंकियों की पीठ थपथपाने से अपने हाथ नहीं खींच सकता । मगर अमेरिका अथवा दुनिया का कोई भी सभ्य देश  उसकी इस विवशता को सहने से रहा। ट्रंप ने अपने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान जब-जब भी पाकिस्तान का उल्लेख किया, छाती ठोंक कर पाकिस्तान को सबक सिखाने की कसमें खाईं। सोशल मीडिया पर ट्रंप ने साफ-साफ लिखा था“ इसे सीधा समझ लें, पाकिस्तान हमारा दोस्त नही है। हमने उसे अरबों डॉलर की मदद दी पर हमें क्या मिला। विश्वासघात , अपमान और उससे भी बुरा। अब समय आ गया है कि उससे सख्ती से निपटा जाए। भारत के साथ मिलकर उसे सबक सिखाउंगा“। नव-निर्वाचित राष्ट्रपति व्हाइट हाउस पहुंचकर यह सब भूल जाएंगे, पाकिस्तान को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए। बहरहाल, छल-कपट से किसी भी देश  की विदेश  नीति की दिश नहीं बदली जा सकती। विश्वासघात , झूठ-फरेब, छल-कपट पाकिस्तान की फितरत है। पाकिस्तान की ताजा हरकत ने भी यही साबित किया है। कहते हैं “कुते की पूंछ  को 12 साल भी तेल में रखा जाए, वह सीधी नहीं होगी। पाकिस्तान पर यह कहावत सौ फीसदी मौजूं होती है।