मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

तुम डाल-डाल, हम पात-पात

 काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बेनामी संपति पर जोरदार प्रहार करने जा रहे हैं। रविवार को इस साल  की आखिरी “मन की बात“ में प्रधानमंत्री मोदी ने लोकप्रिय जुमले को उ्द्धृ्त करते हुए  कहा “ भ्रष्टाचारी   डाल-डाल तो हम पात-पात“। प्रधानमंत्री ने कहा कि बेनामी संपति पर अकुंश  लगाने के लिए जल्द ही कानून को और धारदार बनाया जाएगा। इस मामले में मोदी सरकार ने पहल भी कर दी है। सोमवार को आयकर अधिकारियों ने बसपा सुप्रीमो सुश्री मायवती के भाई आनंद कुमार की बेनामी संपत्तियों की जाँच   शुरु कर दी है। उन पर अथाह बेनामी संपत्ति बनाने का आरोप है।  उनसे जुडे कई बिल्डरों को भी आयकर विभाग ने नोटिस भेजे हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव की बेला पर मोदी सरकार के इस कदम में “राजनीतिक स्वार्थ की “गंध“ आ रही है पर इस कार्रवाई को काले धन के खिलाफ सरकार की सख्ती का हिस्सा माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर दुख व्यक्त किया है कि बेनामी संपत्ति कानून 1988 से अस्तित्व में है मगर इसके तहत न तो नियम बनाए गए और अगर दिखाने के लिए  थोडे-बहुत बनाए भी गए, तो उन्हें अधिसूचित नहीं किया गया। इसी वजह यह कानून कई सालों से निष्क्रिय  पडा है। ऐसे कानून का क्या फायदा जो किसी काम न आए़।  काली कमाई करने वाली इसी का फायदा उठा रहे हैं। बेनामी संपत्ति काले धन को छिपाने का प्रमुख स्त्रोत है। काली कमाई करने वाले किसी दूसरे (विश्वास  पात्र अथवा परिजन) के नाम संपत्ति खरीदकर कर लेते हैं। कानून में व्याप्त खामियों को भुनाते  अधिकारियो की आंखों में धूल झोंकते हुए कर चोर आसानी से काले धन से अकूत संपति जमा कर लेते हैं। मोदी सरकार ने हाल ही में 1988 के कानून को प्रभावी बनाने के लिए इसमें आवष्यक सशोधन किए हैं। सरकार का दूसरा प्रहार बेनामी संपत्ति पर है। आयकर रिटर्न की गहन जांच-पडताल, काली कमाई करने वालों पर आयकर एवं प्रवर्तन निदेशालय के छापे और बेनामी संपत्तियों की विश्वसनीय  जानकारी  हासिल कर सरकार ने ऐसी संपत्तियों  की जांच पडताल  शुरु भी कर दी है। 31 दिसंबर के बाद उन खातों को भी खंगाला जाएगा, जिनमें नोटबंदी के बाद से अढाई लाख से ज्यादा की नगदी जमा की गई है। विमुद्रीकरण के बाद अब कर अधिकारी का सारा ध्यान बेनामी संपति को बेनकाब करने पर है। आंकडों के अनुसार 2014 के बाद से काले धन में निरंतर गिरावट आ रही है। 2014 में सरकार का अपना आकलन था कि  वाणिज्यकरण से फल-फूल रहे  शिक्षा सेक्टर, माइनिंग की काली कमाई और रियल इस्टेट के बेनामी सोदों के कारण काला धन देश  की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 75 फीसदी तक पहुच चुका था। इस तरह देश  में काले धन की समानांतर अर्थ व्यवस्था की गहरी पैठ हो चुकी थी। ताजा अध्ययन के मुताबिक  जून 2016 तक काले धन में खासी गिरावट आ चुकी है  और अब यह जीडीपी का 30 फीसदी (लगभग 30 लाख करोड) तक गिर चुका  है । अगर सरकार बेनामी संपत्ति कानून को  धारदार बनाने में सफल हो गई तो अगले तीन सालों में काला धन  जीडीपी का 10 फीसदी से भी कम रह जाएगा। इन आंकडों  पर अगर  विश्वास   किया जाए तो दो साल के कार्यकाल में मोदी सरकार की काले धन के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के हैरतअ्ंगेज परिंणाम सामने आ रहे हैं। काले धन के खिलाफ जो काम पिछले सरकारें साढे छह दशक में नहीं कर पाईं, वह करिश्मा  मोदी सरकार मे मात्र दो साल में कर दिखाया है। तथापि, अकूत बेनामी संपत्ति को चिहिंत कर इन्हें  जब्त करना चुनौतीपूर्ण कार्य है और  भ्रष्ट नौकशाही  हर बार की तरह इस मुहिम के कार्यवन्यन में भी पीछे रह सकती है। वैसे अगर सरकार अथाह बेनामी संपत्ति को जब्त करने में सफल हो जाती है तो देश  के सभी 5 करोड शहरी और ग्रामीण बेघरों को आशियाना मुहैया कराया जा सकता है।