बुधवार, 28 दिसंबर 2016

भारत की एक और छलांग

सोमवार को अग्नि-5 का सफल परीक्षण करने के साथ ही भारत ने न्यूक्लियर टकनॉलॉजी में एक और लंबी छलांग  लगाई   है। अग्नि-5 भारत की अब तक की सबसे शक्तिशाली न्यूक्लियर  मिसाइल है। इसके साथ ही भारत दुनिया के उन ताकतवर न्यूक्लियर पॉवर देशों के क्लब में  शामिल हो गया है, जिनके पास 5000 किलोमीटर और उससे अधिक दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें हैं। अग्नि-5 से भारत की नाभिकीय प्रतिरोधक क्षमता और मजबूत होगी और वह अपने चिर प्रतिद्धंदी चीन का मुकाबला करने में सक्षम होगा। भारत सरकार ने हालांकि अग्नि-5 की मारक क्षमता का खुलासा नहीं किया  है पर चीन का दावा है कि इस मिसाइल की मारक  क्षमता छह से आठ हजार किलोमीटर हो सकती है।  इंटरकॉन्टिनेंटल बेलिस्टिक मिसाइल की न्यूनतम मारक क्षमता ही 5500 किमी  होती है, इसलिए चीन अग्नि की मारक क्षमता न्यूनतम छह हजार बता रहा है। अग्नि-5 बीस मिनट में चीन समेत आधी दुनिया को अपनी जद में ले लेगी। चीन के अलावा, पाकिस्तान, रुस, मलेशिया  और इंडोनेशिया भी इसकी जद में आते हैं। अग्नि पांच से भारत यूरोप तक हमले करने में सक्षम हो जाएगा। चीन और भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रुस इंटरकॉन्टिनेंटल बेलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) से लैस हैं। अग्नि-5 से एक साथ कई परमाणु हथियार छोडे जा सकते हैं और छोडे जाने के बाद इन्हें रोका नहीं जा सकता। अग्नि-5 को 85 फीसदी स्वदेशी  तकनीक से बनाया गया है और इस पर 2500 करोड रु का खर्च  आया है। भारत के लिए यह फर्क  की बात है कि मात्र चार साल में भारत ने मिसाइल टकनॉलॉजी में तीव्रगामी प्रगति की है। 2012 में जहां भारत 700 किमीं मारक वाली अग्नि मिसाइल बना रहा था, वहीं  2016  में वह 5000 किमी से ज्यादा दूरी की मारक क्षमता वाली  इंटरकॉन्टिनेंटल बेलिस्टिक मिसाइल बनाने में सक्षम है। पूरी उम्मीद है कि अगले तीन सालों में भारत 10,000 किमी क्षमता वाली  इंटरकॉन्टिनेंटल बेलिस्टिक मिसाइल बनाने में सक्षम हो जाएगा। तथापि, भारत अभी भी बेलिस्टिक मिसाइल क्षमता में चीन से काफी पीछे है। चीन का मुख्य लक्ष्य 2020 तक अमेरिका से आगे बढ जाने का है। ताजा आकलन है कि चीनी नौसेना 2020 तक अमेरिकी नौसेना को पीछे छोड देगी और उसके पास अमेरिका से भी ज्यादा परमाणु पनडुब्बियां और हथियार हो जाएंगेें। चीन 2020 तक न्यूक्लिर पॉवर में अमेरिका से आगे निकल जाना चाहता है। चीन ने पिछले साल ही 3000 से 4000 किमी मारक क्षमता वाली डीएफ-26 बेलिस्टिक  मिसाइल  तैयार की है जिसकी मारक क्षमता अमेरिका के ग्याम (बडा सैन्य अड्डा् तक है। इसीलिए इस घातक मिसाइल कौ “ग्याम किलर“ भी कहा  जाता है। चीन की सीएसएस-4 फ्लोरिडा को छोडकर पूरे अमेरिका को अपनी जद में लिए हुए है। चीन की डीएफ (डॉग फेन्ग)- 5 की मारक क्षमता 13,000 किमी है। यानी अमेरिका का हर शहर इस   इंटरकॉन्टिनेंटल बेलिस्टिक मिसाइल की जद में है। चीन की डीएफ 31-ए मिसाइल की मारक समता 11,200 किमी है। सबसे बडी 16,000 किमी मारक क्षमता वाली  इंटरकॉन्टिनेंटल बेलिस्टिक मिसाइल रुस के पास है। 2015 में प्रकाशित मिल्ट्री रिपोर्ट के अनुसार चीन के पास लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली 50से 60 सिलो आधारित  इंटरकॉन्टिनेंटल बेलिस्टिक  मिसाइलें हैं और समूचा अमेरिका उनकी जद में है। पेंटागन ने भी माना है कि चीन की मिसाइलें अमेरिका के लिए सबसे बडा खतरा है।  भाारत के लिए चीन की बढती न्यूक्लियर ताकत खासी चिंता का विषय  है। निसंदेह, मिसाइल टकनॉलॉजी में भारत तेजी से आगे बढ रहा है मगर चीन के मुकाबले अभी हम काफी पीछे हैं। चीन हमारा पडोसी है और इसकी न्यूक्लियर क्षमता का मुकाबला करने के लिए हम जितने जल्दी सक्षम होंगे, भारत का सुरक्षा कवच उतनी तेजी से मजबूत होगा। दो पडोसी न्यूलियर ताकतवर देश  भारत को चैन से रहने दे सकते।