नोटबंदी के एक माह बाद भी देश में व्याप्त वित्तीय अव्यवस्था में कोई संतोषजनक सुधार नहीं हो पाया है। दो लाख मेंसे अधिकांश ऑटोमेटिड टैलर मशी नें (एटीएम) खाली पडी हैं। पूरे देश में मात्रा 44,000 एटीएम काम कर रहे हैं। बैक एक दिन में अधिकतम 6 हजार से ज्यादा नगदी नहीं दे रहे हैं। नोटबंदी से अब तक देश में 85 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। काले धन को समाप्त करने के लिए सरकार विमुद्रीकरण करे, इस पर लोग-बाग सरकार के साथ है पर इसके लिए आम आदमी को अपनी जान देनी पडे, पूरी दुनिया में ऐसी मिसाल नहीं मिलती है। गर्भवती महिला ने अपना ही पैसा लेने के लिए कतार में खडे-खडे बच्चे को जन्म दिया हो, ऐसी मिसाल भी दुनिया में नहीं मिलती है। अपना ही कमाया पैसा नहीं मिलने से कई शादियां टूट चुकीं हैं। उन मां-बाप पर क्या गुजर रही है, जो ताउम्र पाई-पाई जमा करने के बावजूद जमा पैसा नहीं निकाल पाने के कारण अपनी बेटियों का ब्याह तक नहीं कर पा रहे हैं। नगदी की कमी के कारण कई लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पाया है। गरीबों के उपचार के लिए दान देने वालों ने भी अपना हाथ खींच लिया है। पूरे देश में आम आदमी एक महीने से हाल-बेहाल है। इतना सब होने के बाद भी सरकार काले धन को बाहर निकालने के लिए उठाए गए नोटबंदी कदम पर खूब इतरा रही है। नोटबंदी से कितना काला धन बाहर निकला है, इसका अभी पुख्ता आकलन नही हुआ है। तथापि, अनुमान है कि देश में 75 लाख करोड की सकल घरेलू आय (जीडीपी) का लगभग 8 फीसदी अथवा 6 लाख करोड नगदी काले धन के रुप में छिपाया गया है। अर्थशास्त्रियों का भी यही आकलन है कि लगभग साढे लाख करोड की नगदी काला धन है। 31 मार्च, 2016 को देश में 500 और 1000 रु की 14.5 लाख करोड रु की नगदी बाजार में थी और नोटबंदी के दिन भी इतनी ही मुद्रा थी। इस हिसाब से इस नोटबंदी के दिन 6 लाख करोड की नगदी काले धन के रुप में थी और 8.5 लाख करोड व्हाइट मनी। सरकार का दावा है कि 9 नवंबर से 7 दिसंबर तक देश के विभिन्न बैंकों में 11.5 लाख करोड के पुराने नोट बैंकों में जमा किए जा चुके हैं। पर सबसे बडे सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का आकलन है कि इस 11.5 लाख करोड रु मेंसे लगभग 10 से 15 फीसदी की गिनती दो बार हुई है। यानी लगभग 10 लाख करोड के 500 और 1000 रु के नोट जमा हुए हैं और इसमें से अधिकतर 8.5 लाख करोड व्हाइट मनी है। इमानदार आदमी अपने पुराने नोट बदलने के लिए दौडा-दौडा बैंक पहुंचा और कई दिनों तक कतार में लगा रहा मगर काला धन छिपाने वाले कहीं भी कतार में नजर नहीं आए। यानी 14.5 लाख करोड रु की नगदी मेंसे 6 लाख करोड का अधिकतर काला धन अभी भी बाहर आना बाकी है। काला धन ज्यादातर सोना, गहने और मकान जैसी अचल संपति में छिपाया जाता है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में माना है कि 5 करोड रु की नगदी बाहर नहीं आएगी। वीरवार को चेन्नई में मारे गए छापों में 100 किलो सोना और 80 करोड के नए नोट की करंसी का जब्त किया जाना भी यही दर्शाता है कि नोटबंदी से काला धन वालों पर पूरी तरह से नकेल नहीं डल पाई है। इसके यही अभिप्राय है कि नोटबंदी से 6 लाख करोड रु मेंसे 5 लाख करोड रु की समानांतर अर्थव्यवस्था जारी रहेगी और मिल मिलाकर एक लाख करोड रु ही बाहर आया है। सेंटर फॉर मॉनिटिरिंग दी इंडियन इकॉनॉमी का आकलन है कि 31 दिसंबर, 2016 तक विमुद्रीकरण की सरकारी लागत 1.29 लाख करोड रु तक पहुंच जाएगी। इन आंकडों से यही निष्कर्ष निकलता है कि नोटबंदी से काला धन तो बाहर नहीं निकला मगर देश में वित्तीय अफरा-तफरी जरुर फैली है।
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