शुक्रवार, 16 दिसंबर 2016

भ्रष्ट बैंकिग व्यवस्था

 कहावत है “ एक तो कंगाली, उस पर आटा गीला“। देश  में नोटबंदी से उत्पन्न नगदी संकट को लेकर यह कहावत हूबहू चरितार्थ  होती है। लोग सौ-सौ रु की नगदी के लिए भी मारे-मारे फिर रहे हैं मगर भ्रष्ट  बैंककर्मी हैं कि करोडों के करारे-करारे नोट काली कमाई करने वालों को खुले हाथ से बांट रहे हैं। नोटबंदी के बाद से  बैंक तो जैसे “राजा“ बन गए हों। जितने चाहें पुराने नोट बदलने के लिए खुला न्यौता देने के साथ-साथ फर्जी खाते खोलने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं जबकि कानूनन ऐसा करना अपराध है। वीरवार को नोएडा के एक्सिस बैंक में 20 कंपनियों के 100 से ज्यादा फर्जी खाते पकडे गए जिनमें 8 नवंबर के बाद से 60 करोड रु जमा किए जा चुके हैं। कानूनन, यह संगीन अपराध है। इससे पहले एक्सिस बैंक के 19 कर्मचारियों को मनी लॉड्रिंग में संलिप्त पाने पर निलंबित कर दिया गया था। इस घटना के बाद एक्सिस बैंक ने कुछ  जौहरियों और सोना व्यापारियों के खातों को भी बंद कर दिए  थे । एक्सिस सोना आयात करने वाला देश  का सबसे बडा बैंक है। नोटबंदी के बाद से देश  में जौहरियों द्धारा   दोगुने-तिगने दामों पर  पुराने नोटों लेकर सोना-गहने बेचने के मामले भी सामने आए हैं। नवंबर में चंडीगढ में आबकारी एवं कर अधिकारियों ने तीन जोहरियों को ऐसा करते रंगे हाथ पकडा था। आईटी अधिकारियों को ऐसी सूचना भी मिली है कि नोटबंदी के बाद दिल्ली के एक सोना व्यापारी ने 600 करोड का सोना बेचकर बैंक में जमा करवाए जबकि नियमानुसार ऐसा नहीं किया जा सकता । शुरु-शुरु में 500 और 1000 रु के पुराने नोटों पकडे जाते थे मगर जैसे ही नए नोट बैंकों में आने लग पडे, इन्हें “बेचने“ का धंधा शुरु हो गया। 12 दिसंबर तक देश  में 164.57 करोड रु के नए नोट काली कमाई करने वालों को “बेचे“ जा चुके थे। सरकार की ताजा नीति के अनुसार एटीम से 2000 रु ( 2500 पर एटीएम में 500 अथवा 100 के नोट नहीं होने से 2000 ही निकलते हैॅ्) से ज्यादा कैश  नहीं निकाला जा सकता। इस स्थिति के  दृष्टिगत  इतनी बडी रकम को एटीएम से निकालना दो चार- लोगों के लिए कतई मुमकिन नहीं था। इसके लिए 658, 282 लोगों की जरुरत पडती। यानी यह कैश  देश  के  658, 282 लोगों को मिल सकता था। नगदी निकालने के ताजा प्रतिबंध के अनुसार  इतनी बडी रकम को चैक से निकालने के लिए भी 68, 571 बैंक खाता धारकों की जरुरत पडती। इस रकम से देश  के 1374 एटीएम आसानी से पूरी कैश  क्षमता से चलते। स्पष्ट  है भ्रष्ट बैंककर्मियों की मिलीभगत के बगैर इतनी बडी रकम काला धंधा करने वालों के हाथ लग ही नहीं सकती थी।  बैंकिग सेक्टर के उदारीकरण ने  व्यवस्था को और ज्यादा लचर कर दिया है। सरकार की सबसे बडी सिरदर्दी भी यही है कि देश  के 44 करोड खाता धारकों को कैसे खंगाला जाए। देश  में इस समय आयकर विभाग में लगभग 25,000 कर्मचारियों की कमी है। 55,000 आयकर कर्मी 76,000 का काम कर रहे हैं और इससे उन पर काम का खासा दबाव पड रहा है। पहली जनवरी से आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय के साथ मिलकर नोटबंदी के दौरान मनी लॉड्रिंग का पता लगाने के लिए बैंक खातों की एसेसमेंट शु रु करने जा रहा है मगर इसके लिए भी विभाग को अतिरिक्त टॉफ की दरकार है। नगदी संकट जल्द दूर होने नहीं जा रहा है। सरकार ने वीरवार को फिर कहा कि अभी तक 5 खरब रु  के करीब की नगदी सिस्टम में डाली जा चुकी है। इसकी तुलना में नोटबंदी से 500 और 1000 रु की 15.44 खरब की नगदी निकाली गई है। सरकार नगदी संकट को दूर करने के लिए धडाधड 500 रु के नोट छापने जा रही है मगर 10 खरब रु से ज्यादा नगदी की कमी को पूरा करने में महीने लग सकते हैं।