पाकिस्तान प्रयोजित आतंक ने एक बार फिर अपना भयावह चेहरा दिखा दिया है और भारत की सैन्य ताकत को चुनौती दी है। उडी हमले के 72 दिन बाद आतंकियों ने सेना पर फिर हमले करके दो सैन्य अधिकारियों समेत सात जवानों की जानें ले लीं। आतंकी पुलिस की वर्दी में थे। मंगलवार को ही जनरल कमर जावेद बाजवा ने पाकिस्तान सेना के अध्यक्ष का पदभार संभाला था। एक ओर नए सेनाध्यक्ष नियंत्रण रेखा पर तनाव को कम करने की बातें कर रहे थे, तो दूसरी ओर पाकिस्तान के पिठ्ठू आतंकी भारतीय सेना पर हमले कर रहे थे। पाकिस्तान तनाव कम करने के लिए बातचीत की पेशकेश कर रहा है, तो आतंकियों को ढाल बनाकर भारत पर हमले कर रहा है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान किस तरह दोगली बातें करता है। मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में एक साथ दो हमले हुए। पहला हमला जम्मू के नगरोटा में सेना कैंप पर किया गया। इसमें 2 मेजर समेत 7 सैनिक शहीद हो गए। हमले के दौरान आतंकियों ने महिलाओं और बच्चों को भी बंधक बनाया, जिन्हें सुरक्षित छुडा लिया गया। दूसरा हमला नगरोटा से 70 किमी दूर चमलियाल में हुआ। मुठभेड मे 3 आतंकी मारे गए मगर बाद में सर्च ऑपरेशन के दौरान हुए विस्फोट में सीमा सुरक्षा दल के डीआईजी समेत 5 जवान घायल हो गए। बहरहाल, उडी हमले के बाद से अब तक पाकिस्तान से आए आतंकियों ने सैन्य ठिकानों पर चार बडे हमले किए हैं। भारतीय सेना ने तीन को तो विफल कर दिया मगर वह राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर स्थित नगरोटा हमले को विफल नहीं कर पाई। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार सात आतंकी चमलियाल के रास्ते भारतीय सीमा में घुस आए । हमेशा की तरह पाकिस्तान रेंजर्स ने उन्हें कवर किया। तीन आतंकी तो सीमा सुरक्षा बलों ने चमलियाल में ही मार गिराए मगर चार आतंकी सुरंग के रास्ते 70 मिलोमोटर की दूरी पर स्थित नगरोटा सैन्य कैंप पहुंच गए। मुख्य गेट पर सुरक्षा गार्ड को ग्रेनेड से मार गिराया और सेना के 16 कोर के कैंप में घुस आए। महिलाओं समेत सैनिकों के परिजनं को बंधक बना लिया। इसके बाद आतंकियों से मुठ्भेड में दो मेजर समेत 7 सैनिक मारे गए। हमले में दो मेजर की शहादत से साफ है कि आतंकी बडे सैनिक अधिकारियों को निशाना बनाना चाहते थे। नगरोट हमले ने एक बार फिर सैन्य ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खडा कर दिया है। सितंबर में उडी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर स्थित सभी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चाक-चौबंद(?) किया गया था । मगर ताजा हमले से लगता है कि देश ने उडी हमले से भी कोई सबक नहीं सीखा है। पहले पठानकोट, फिर उडी और अब नगरोटा। और हर बार वही सुरक्षा में भरी चूक और आतंकी इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं। सैन्य ठिकानों पर साल में तीन-तीन आतंकी हमले। आतंकी सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने और देश की सैन्य शक्ति को चुनौती देने के मकसद से जानबूझकर सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे है। मुठ्ठी भर आतंकियों द्वारा अभेध भारी सुरक्षा सपन्न सैन्य ठिकानों में घुसकर सैनिकों की हत्या करना इस बात के संकेत हैं कि सुरक्षा बल आतंकियों को रोके नहीं रोक पा रहे हैं। नगरोटा हमले में किसी स्थानीय सूत्र का हाथ है, इस बात से कहीं ज्यादा अहम यह है कि खुफिया एजेंसियों की चेतावनी के बावजूद एतिहाती सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए गए ? खुफिया एजेंसियां सतर्क नहीं भी करती, तो भी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था को हर हाल में चाक-चौबंद किया जाना चाहिए था। हाफिज सइद समेत पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के सरगना आए दिन भारत को सबक सिखाने की धमकियां देते रहते हैं। इस साल अब तक आतंकी नौ बडे हमले कर चुके हैं और इनमें सुरक्षा बलों के 76 जवान मारे जा चुके है। आखिर यह सिलसिला कब तक चलता रहेगा। निश्चित तौर पर, एक और बडे सर्जिकल स्ट्राइक की जरुरत है।
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