प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के पंजाब दौरे के ठीक दो दिन बाद नाभा सेंट्रल जेल से खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के दुर्दांत आतंकी हरमिंदर सिंह मिंटू और कश्मीर सिंह के साथ-साथ चार गैंगस्टरों को दिन-दहाडे भगाने की घटना ने न केवल पंजाब को, अलबता पूरे देश को शर्मसार किया है। इस घटना ने फिर पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति का जनाजा निकाला दिया है। इससे यह संदेश जाता है कि आतंकी और गैंगस्टर जिस जेल से चाहें, कैदियों को भगा ले जा सकते हैं। पंजाब पुलिस की तो बात ही छोडिए! नाभा जेलब्रेक से पंजाब पुलिस की बची-खुची विश्वसनीयता भी जाती रही है। पंजाब पुलिस के बारे यह आम धारणा है कि पैसे दिए बिना इस फ़ोर्स में पत्ता भी नहीं हिलता है। और मुठ्ठी गर्म करने पर कुछ भी करवाया जा सकता है। नाभा जेलब्रेक मामले में जिस तरह सुबह पुलिस की वर्दी पहन और दो कैदियों को लेकर गैंगस्टर अपने साथियों को छुडाने आते हैं, उससे साफ होता है कि इस कांड में पुलिस की मिलीभगत है। बगैर पुलिस की मदद के गैंगस्टर इस तरह कांड कर ही नहीं सकते। जेल में कब और कहां से कैदी को लाया आना है, बगैर जेल सुपरिटेंडेंट की अनुमति के इस काम को अंजाम नहीं दिया जा सकता। जेल में सुरक्षागार्ड थे तो सही मगर गैंगस्टरों द्वारा धडाधड 100 से ज्यादा गोलियां दागने का मुकाबला तक नही कर पाए। नाभा सेट्रंल जेल में गैंगस्टर इतने धडल्ले और बेफिक्री से 6 कैदियों को भगा कर ले जाएं, और पुलिस देखती रह जाए, इसके क्या अर्थ लगाए जाएं? इससे साफ है कि गैंगस्टरों को जेल से कैदियों को भगाने में मदद की गई। पंजाब पुलिस का अमला जितना भारी-भरकम हे, उसकी कारगुजारी उतनी ही हल्की है। सात-सात डीजीपी, एक दर्जन से भी ज्यादा (एडीजीपी), लगभग तीन दर्जन आईजी और डीआईजी की लंबी चौडी फौज। अफसरों की फौज के रहते पुलिस जवानों को उनकी और वीवीआईपीजी की सुरक्षा करने के अलावा न तो फुर्सत है और न ही आमा जनता की सुरक्षा के लिए फोर्स । पंजाब पुलिस मुख्यालय में तैनात करीब 114 अफसरों की सुरक्षा के लिए ही 464 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में हर अति महत्वपूर्ण व्यक्ति ( वीआईपी) की सुरक्षा के लिए कम-से-कम तीन पुलिसकर्मी तैनात है मगर 800 लोगों की सुरक्षा के लिए बमुश्किल एक पुलिसकर्मी उपलब्ध है। तीन साल पहले 2013 में सुप्रीम कोर्ट में पेश हलफनाामे में पंजाब सरकार ने माना था कि राज्य के करीब 1290 वीआईपीज की सुरक्षा के लिए पंजाब सरकार ने 4121 पुलिसकर्मी तैनात कर रखे हैं। पंजाब पुलिस के पास अफसरों समेत कुल मिलाकर 77, 583 की फोर्स है और इस तरह दो करोड 70 लाख जनता की हिफाजत के लिए बहुत कम पुलिस कर्मी है। इन्हीं कर्मचारियों मेंसे जेलों की सुरक्षा , यातायात व्यवस्था और अन्य सुरक्षा संबंधी इंतजामों के लिए भी जुटाने पडते है। पुलिसकर्मियों की भारी कमी से जूझ रही फोर्स के जवानों को डयूटी का बहुत ज्यादा द्बाव झेलना पडता है। न तो साप्ताहिक अवकाश मिल पाता है और न ही आराम। एक अध्ययन के मुताबिक डयूटी का भारी दबाव पडने के कारण पुलिसकर्मी की मनोस्थिति, कुश लता, तत्परता और स्थिति विशेष से निपटने की क्षमता पर खासा असर पडता है। पंजाब पुलिस की यही त्रासदी है। एक तो काम का अत्याधिक बोझ और उस पर अफसरों की बगार। अक्सर जेल के कर्मियों को अफसरों ं के घरेलू काम में भी लगाया जाता है। नाभा कांड से पता चलता है कि पंजाब का जेल प्रशासन कितना मुस्तैद ( प्लीज रीड भ्रष्ट्र ) है। नाभा जेल कांड ने प्रधानमंत्री द्वारा पंजाब सरकार को कानून-व्यवस्था पर दी गई शाबसी की भी कलई खोल दी है। पंजाब में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने जा रहे है। नाभा जेल जैसी घटनाएं बादल सरकार की छवि और खराब कर सकती है। बादल सरकार को सुरक्षा व्यवस्था और अधिक चाक-चौबंद करनी होगी।
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