गुरुवार, 3 नवंबर 2016

Enough. Rhetoric On Teaching Pakistan A lesson Wont Do. Its Tome For Action

  भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक से बौखलाई पाकिस्तान सेना की लगातार गोलीबार से नियंत्रण रेखा और आसपास के इलाकों में स्थिति लगभग युद्ध जैसी बनी हुई है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान अब तक 61 बार युद्ध विराम का उल्लंघन कर चुका है।  आतंकियों को भारत में घुसपैठ को कवर देने के लिए पाकिस्तानी सेना जानबूझकर रिहायशी  इलाकों को गोलीबारी का निशाना बना रही है। 30 अक्टूबर को आतंकियों की घुसपैठ पर जारी वीडियो से साफ पता चलता है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों का ध्यान बंटाने के लिए फायरिंग करते हैं और इस दौरान आतंकी बार्डर क्रास कर जाते हैं। इस वीडियो में तीन आतंकी रेंगते हुए बार्डर क्रास करने का प्रयास कर रहे हैं।  मंगलवार को जम्मू के सांबा और राजौरी जिले की अंतरराष्ट्रीय  सीमा पर पाकिस्तानी सेना दिनभर फायरिंग करती रही। इससे दो मासूम बच्चों और चार महिलाओं समेत आठ लोग मारे गए, 24 घायल हो गए। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने पाकिस्तान फायरिंग का करारा जवाब देते हुए पाकिस्तान सेना की 14 पोस्टें तबाह कर दी। बुधवार को बीएसएफ ने तबाह की गई पाकिस्तानी पोस्ट्स का वीडियो भी जारी किया। उधर, पाकिस्तान का दावा है कि भारतीय सेना की फायरिंग से उसके 6 नागरिक मारे गए। मगर भारतीय सेना का कथन है कि पाकिस्तान सफेद झूठ बोल रहा है क्योंकि  वह नागरिकों पर नहीं, अलबत्ता पाकिस्तानी पोस्टों पर फायरिंग करती है। दूसरी ओर पाकिस्तान रिहायशी इलाकों पर फायरिंग करता है। सीमा पर हालात युद्ध जैसे है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद युद्ध  शुरु होने की आशंका से सरकार ने पंजाब और जम्मू-कश्मीर  समेत बार्डर के दस किलोमीटर में स्थित सभी रिहायशी  इलाकों को खाली करवा दिया था मगर कुछ समय बाद लोग-बाग अपने-अपने गांव लौट गए थे। जम्मू क्षेत्र में बार्डर के आस-पास रहने वालों लोगों को स्थानीय प्रशासन ने रात को बत्ती गुल रखने और  अनजान व्यक्ति को किसी भी तरह की जानकारी देने से मना कर रखा है और इसके लिए जगह-जगह नोटिस चस्पा किए गए है। अमूमन, युद्ध की स्थिति में बत्ती को गुल रखने के लिए कहा जाता है। निसंदेह, सीमा पर युद्ध जैसे हालात है और यह सिलसिला जितना लंबा चलेगा, हालात उतने ही बिगडते जाएंगें। पाकिस्तान प्रायोजित आतंक ने कश्मीर  घाटी को करीब-करीब तबाह कर रख दिया है। आए दिन के प्रदर्शन, बंद और हिंसक माहौल से घरेलू एव लघु उधोग बंद पडे हैं। पर्यट्न उधोग पूरी तरह लूट चुका है और लोगों को रोजी-रोटी के लाले पडे हुए हैं। आम तौर पर गुलजार रहने वाल बाजार सूने पडे हैं। चौतरफा, दहशत का माहौल है। सरकार और प्रशासन  नाम की  कोई चीज नहीं है। स्कूल-कॉलेजिज बंद पडे हैं और अगर स्कूल खुलते हैं तो आतंकी उनमें आग लगा देते हैं। पिछले दो माह में 25 से ज्यादा स्कूलों को फूंका जा चुका है। स्थिति इस कद्र खराब है कि सोमवार को उच्च न्यायालय को मंडलीय प्रशासन और पुलिस से पूछना पडा कि घाटी में स्कूल को कौन जला रहा है मगर प्रषासन कोई जवाब नहीं दे सका। राज्य के 15 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर है मगर राज्य सरकार लाचार है। इसके यही अर्थ निकलते हैं कि जम्मू-कश्मीर  में आतंकी और अलगाववादियों सरकार से ज्यादा प्रभावी हैं और वे जो चाहें कर सकते हैं। मगर अब जनमानस का धैर्य  जवाब दे रहा है, वह सियासी नेताओं की “ पाकिस्तान से बदला लिया जाएगा“, अथवा “एक-एक सैनिक और नागरिक की मौत का हिसाब चूकता किया जाएगा“ जैसी गीदड-भभकियों से आजिज आ चुके हैं। भाजपा पाकिस्तान को माकूल जवाब नहीं देने के लिए पिछली सरकार पर  “नपुंसक और नामर्द“ जैसी फब्तियां कसा करती थी। तब भाजपा 56 इंच का सीना  फुलाकर शेघी बघारा करती थी कि अगर वह सत्ता में होती तो पाकिस्तान को करारा जवाव देती।  मोदी  जी, अब पाकिस्तान को करारा जवाब देने का समय आ गया है।