शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

मौत पर भी सियासत

देश  के  सियासी नेताओं को हर छोटी-बडी घटना पर राजनीति करने की तो जैसे लत पड गई हो। और-तो-और अब मौत पर भी जमकर सियासत की जा रही है।  अब इस बात पर बहस हो रही है कि क्या खुदकषी करने वाला शहीद होता है या नहीं ? मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर वन रैंक, वन पेंशन के लिए धरना दे रहे हरियाणा के पूर्व सैनिक द्वारा जहर खाकर आत्महत्या करने की दुखद घटना से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मौत पर राजनीतिक रोटियां सेंकने का मौका लपक लिया। भिवानी के पूर्व सैनिक की मौत की खबर सुनते ही कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री दौडे-दौडे मृतक पूर्व सैनिक के परिजनों को सांत्वना देने अस्पताल पहुंचे मगर पुलिस ने  दोनों को मिलने नहीं दिया और एहतिहातन कस्टडी में ले लिया गया। पुलिस बारी-बारी नेताओं को गिरफ्तार करती और फिर छोड देती। बुधवार को दिनभर यह नौटंकी चलती  रही। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को दो बार हिरासत में लिया गया और फिर छोड दिया गया।  पुलिस ने मृतक के परिजनों को भी नहीं बख्शा  और उनके बेटों को दिनभर थाने में बैठाए रखा। परिजनों के पुलिस हिरासत में रहने से मृतक पूर्व  सैनिक का पोस्ट-मार्टम तक नहीं हो सका।  आधी रात पोस्ट-मार्टम के बाद पुलिस मृतक राम किश न के शव को हरियाणा लेकर गई। वीरवार को रामकिशन के अंतिम संस्कार में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शामिल हुए मगर हरियाणा से ही संबंधित केन्द्रीय मंत्री और पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह नदारद रहे । हरियाणा के मुख्यमंत्री और अन्य शीर्ष   भाजपा नेता भी रामकिश्न को अंतिम श्रद्धाजंलि देने भिवानी जिले के गांव बामला नहीं पहुंचे। इन सब घटनाओं का एक ही मतलब है कि सरकार पूर्व सैनिक की अत्महत्या से डर गई थी। रामकिश्न सेना से सूबेदार पद से रिटायर हुए थे। उन्हें  इस बात का गुस्सा था कि वन रैंक, वन पैंशन की अधिसूचना जारी होने के बाद भी उन्हें माहवार 3,000 रु कम पेंशन मिल रही थी। पिछले कई दिनों से रामकिश्न इस मामले को लेकर परेशान थे और इस विसंगति को दूर करने के लिए संघर्ष   कर रहे थे। रामकिश्न की ही तरह अधिकांश  पूर्व सैनिक वन रैंक, वन पेंशन से खुश  नहीं है क्योंकि इससे उन्हें कोई फायदा नहीं हो रहा है। पूर्व  सैनिक पूरी पेंशन पाने के लिए 33 साल की  शर्त  को हटाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वन रैंक, वन पेंशन के तहत 2013 को बेस ईयर बनाया गया है। पूर्व  सैनिक 2014 के पक्ष में है। पूर्व  सैनिक पेंशन  समीक्षा पांच साल की जगह सालाना करने की मांग कर रहे हैं।  वन रैंक, वन पेंशन स्कीम के तहत स्वेच्छा से रिटायरमेंट लेने वालों को अधिक फायदा हो रहा है, अन्य को नहीं। पूर्व  सैनिक इस विसंगति को भी दूर करने की मांग कर रहे हैं। इन मांगों के लिए पूर्व  सैनिक आज भी दिल्ली में संघर्ष   कर रहे हैं। पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिह का यह बयान दुर्भाग्यपूर्ण है कि मौत के समय मृतक की मानसिक हालत की जांच की जानी चाहिए। मृतक को कांग्रेस का वर्कर बता कर पूर्व सेनाध्यक्ष ने लंबे समय से अपनी मांगों के लिए लड रहे पूर्व सैनिकों के जख्मों पर नमक छिडका है। जनरल वीके सिंह जैसे योद्धा से इस तरह के वक्तव्य की उम्मीद नहीं की जा सकती। सियासी दलों का इस मामले को राजनीतिक रंगत देना भी दुखद है। केजरीवाल ने मृतक रामकिश्न को शहीद का दर्जा और एक करोड रु की मदद देकर मामले को गर्मा दिया है। कांग्रेस एक कदम आगे बढते हुए रामकिश्न को भगत सिंह बता रही है। हर बार की तरह इस बार भी मूल मुददा पीछे छोड छूट गया है। इस तरह के मामले में संवेदना व्यक्त की जानी चाहिए, सियासत नहीं।