वस्तु एवं सेवा कर (गुडस एवं सर्विसिस टैक्स-जीएसटी) की दरें तय होने से अब इस बात की पूरी उम्मीद है कि अगले अप्रैल (2017) से पूरे देश में एक समान कर व्यवस्था लागू हो जाएगी। जीएसटी के लागू होने से आम आदमी से जुडी काफी वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं और इससे जनमानस “अच्छे दिन“ की उम्मीद कर सकता है। गत वीरवार को जीएसटी परिषद ने लंबी जद्दोजेहद के बाद जीएसटी की चार दरों को अंतिम रुप दे दिया। न्यूनतम दर 5 फीसदी और अधिकतम 28 फीसदी तय की गई है। खाधान्न को जीएसटी से मुक्त रखा गया है। इससे खाने-पीने की वस्तुओं का सस्ता होना तय है। किस वस्तु पर कितना कर लगाया जाएगा, ओर कर असेसी कोन होगा हालांकि अभी यह तय नहीं है मगर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ कह दिया है कि खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं को 5 फीसदी के न्यूनतम दर के दायरे में रखा जाएगा और विलासिता वाली वस्तुओं पर अधिकतम 28 फीसदी जीएसटी लगाया जाएगा। महंगाई पर काबू पाने के लिए मुद्रा स्फीति बास्केट में शरीक खाद्यान्न समेत सभी आवश्यक वस्तुओं को कर मुक्त रखा गया है। इन वस्तुओं के कर मुक्त रहने से मुद्रा स्फीति में खासी गिरावट आ सकती है। अभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में 50 खाद्य वस्तुओं को शामिल किया जाता है। चाय और मसाले को 5 फीसदी जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है। अभी चाय पर 5 से 6 फीसदी कर लगाया जाता है। मसालों पर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कर लगाए जाते हैं। आम आदमी के उपभोग की काफी सारी वस्तुओं पर अभी 30 फीसदी की दर से कर लगाए जाते हैं। इसी वजह एफएमसीजी (फॉस्ट मूविंग कंज्युमर गुडस) काफी महंगे होते हैं। नई कर व्यवस्था मेॅ इन वस्तुओं पर अधिकतम 18 फीसदी जीएसटी लगाया जा सकता है। साबुन, षेविंग क्रीम, टूथपेस्ट और इस तरह की पर्सनल केयर वस्तुओं को 12 फीसदी दायरे में लाया जा सकता है। अभी इन सब वस्तुओं पर 30 फीसदी कर लगाया जा रहा है। इससे उपभोग की कई वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं। इसी उम्मीद से शुक्रवार को कोलगेट एवं हिंदुस्तान युनिलीवर जैसी एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में 2 से 4 फीसदी का उछाल दर्ज हुआ। सिनेमा देखना सस्ता हो सकता है अगर सरकार इंटरटेंमेंट को सर्विस सेक्टर में शामिल करती है तो। अभी मनोरंजन टैक्स 24 से 26 फीसदी के बीच है। सर्विस टैक्स 15 से बढाकर 18 फीसदी किया जा सकता है। सरकार इसे 12 फीसदी के स्लैब में लाने से रही। हां, आवश्यक सेवाओं (अस्पताल जैसी) पर 12 फीसदी जीएसटी लगाया जा सकता है। इलेक्ट्रानिक हाउसहोल्ड गुडस को भी 18 फीसदी जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है। अभी इन वस्तुओं पर भी 30 फीसदी कर है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वीरवार को यह भी स्पष्ट किया कि निम्न एवं मध्यम तबकों से जुडी उपभोग की वस्तुओं को निम्न कर के दायरे में लाया जाएगा मगर धनाढ्य तबकों के उपभोग की वस्तुओं पर अधिकतम 28 फीसदी कर लगाया जा सकता है। छोटी कारें सस्ती हो सकती है। इन पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया जा सकता है। सबसे ज्यादा फायदा तंबाकू उत्पाद को हो रहा है। जीएसटी की अधिकतम दर 28 फीसदी है। इस स्थिति में तंबाकू उत्पाद पर भी 28 फीसदी जीएसटी ही लगेगा। अभी इन पर 60 फीसदी कर लगाया जाता है। बहरहाल, जीएसटी के लागू होते ही आम आदमी को महंगाई से राहत मिल सकती है बशर्ते उत्पादक कर में मिलने वाली राहत को उपभोक्ता तक पहुंचाए। अभी तक का अनुभव इस मामले में अच्छा नहीं है। उत्पादक कर रियायतों को उपभोक्ता तक पास ऑन करने में तरह-तरह के बहाने लगाता है। अगर जीएसटी के लागू होने पर कीमतों में कमी होती है, तो आम आदमी के लिए इससे अच्छी कोई बात नहीं हो सकती। अब अप्रैल 2017 का इंतजार रहेगा।
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