सितंबर मे जम्मू-काश्मीर में उडी सेना ब्रिगेड हेडक्वाटर्स पर आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच नियत्रंण रेखा पर जबरदस्त तनाव बना हुआ है। और यह तनाव कभी भी युद्ध विभीषिका में बदल सकता है। उडी आतंकी हमले में भारतीय सेना के 17 जवान शहीद हुए थे और 19 गंभीर रुप से घायल हो गए थे। तब से भारत और पाकिस्तान की सेनाएं “जैसे-को-तैसा“ की सामरिक रणनीति से एक-दूसरे पर हमले कर रही हैं। 30 सितंबर से बाद से अब तक 18 भारतीय जवान मारे जा चुके हैं। पाकिस्तान के तो कहीं ज्यादा सैनिक मारे गए हैं। मंगलवार को भारतीय सेना के तीन जवान मारे गए। हमला कश्मीर घाटी के कुपवाडा के माछिल में घात लगाकर किया गया। हमलावरों ने एक सैनिक का सर कलम कर दिया गया और उसके शव को क्षत-विक्षत कर डाला। जेनेवा कन्वेशन के तहत ऐसा करना घोर अमानवीयता है मगर पाकिस्तान को मानवाधिकारों से कोई सरोकार नहीं है। 28 अक्टूबर के बाद आतंकियों द्धारा भारतीय सैनिक का शव क्षत-विक्षत करने की यह दूसरी बर्बरतापूर्ण घटना है । इस बर्बरता से क्षुब्ध भारतीय सेना ने इसका बदला लेने का संकल्प लिया है। भारतीय सेना ने बुधवार को पाकिस्तान के खिलाफ बडी सैन्य कार्रवाई शुरू भी कर दी है। ताजा सूचना के मुताबिक भारतीय सेना ने पूंछ, राजौरी और केल सेक्टर्स में पाकिस्तान की चार चौकियों को निषाना बनाया । पाकिस्तान ने दावा किया गया कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भारतीय सेना की गोलीबारी से 11 बस यात्री मारे गए और कप्तान समेत तीन सैनिकों के मरे जाने की पुष्टि की है। पाकिस्तान के अग्रणी समाचार पत्र की खबर के अनुसार भारतीय सेना ने पाकिस्तान के तातापानी, लयात और नेकयाल में भारी फायरिंग की। इसी दौरान एक बस भी फायरिंग की चपेट में आ गई। पाकिस्तान के इन दावों पर विश्वास करना कठिन है। भारतीय सेना कई बार यह बात स्पष्ट कर चुकी है कि वह पाकिस्तान की तरह निर्दोष लोगों पर फायरिंग नहीं करती। पाकिस्तान ने बुधवार को पांच जगह युद्ध विराम का उल्लघंन किया। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से अब तक पाकिस्तान 300 से भी अधिक बार युद्ध विराम का उल्लघंन कर चुका है। बहरहाल, युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं। दोनों ही पडोसी देश न्यूक्लियर हथियार से लैस हैं और युद्ध की स्थिति में इसके भयावह परिणाम हो सकते है। 1965, 1971 और कारगिल युद्ध से दोनों देशों को भारी जान-माल का नुकसान सहना पडा था। 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के 20 से ज्यादा लडाकू जहाज, 200 टैंक और 3800 जवान मारे गए थे। भारत के भी 3000 जवान मारे गए थे। 1971 के युद्ध में तो पाकिस्तान का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था और मुल्क दो हिस्सों में बंट गया था। कारगिल युद्ध के समय भारतीय वायुसेना पाकिस्तान पर बमबारी की पूरी तैयारियां कर चुकी थी और अगर ऐसा होता तो युद्ध और अधिक भीषण हो जाता। भारत और पाकिस्तान इस सच्चाई को भली-भांति जानते हैं कि युद्ध से दोनों देशों की अवाम का ही नुकसान होता है। भारत से कहीं ज्यादा पाकिस्तान में गरीबी और भुखमरी है। इसीलिए, दोनों मुल्को के चरमपंथियो द्वारा अपनी-अपनी सरकार को युद्ध के लिए उकसाए जाने के बावजूद अब तक दोनों युद्ध से बचे हुए हैं। मगर “जैसे- को तैसा“ रणनीति भी युद्ध जैसी है और दोनों पडोसी ज्यादा देर तक इस स्थिति में नहीं रह सकते। सीमा पर तनातनी और गोलीबारी नई बात नही हैं। कहते है, सैनिक हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकते और हाथ खोलने के लिए दुश्मन पर अक्सर निशाना साधते हैं। भारत-पाकिस्तान सीमा पर हालात युद्ध जैसे हैं और जैसे-को-तैसे की चिंगारी के युद्ध विभीषिका में बदलते देर नहीं लग सकती। युद्ध से बचने और सीमा पर तनाव कम करने के लिए भारत और पाकिस्तान के पास द्धिपक्षीय बातचीत ही एकमात्र रास्ता है।
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