बुधवार, 23 नवंबर 2016

नोटबंदी महंगा सौदा ?

छह राज्यों एवं केन्द्र  शासित पुडुचेरी में 4 लोकसभाई और 10 विधानसभाई हलकों के लिए कराए गए चुनाव में सत्तारुढ दलों को ही कामयाबी मिली है। भाजपा इस पर फूल नहीं समा रही है और जीत का श्रेय प्रधानमंत्री की नोटबंदी कार्रवाई को दिया जा रहा है। मगर सच्चाई यह है कि इन उप-चुनाव में हर जगह सत्तारुढ दल ही जीता है। मध्य प्रदेश  और असम में भाजपा सत्तारुढ है, इसलिए इन दोनों राज्यों की लोकसभाई और विधानसभाई सीटें पार्टी ने जीती है। अरुणाचल प्रदेश  में भी भाजपा दल-बदलू सरकार को समर्थन दे रही है, इसलिए इस राज्य की विधानसभा सीट भाजपा के बट्टे-खाते में गई है। पश्चिम  बंगाल की दोनों लोकसभाई सींटें और एक विधानसभाई सीट सतारूढ दल तृणमूल कांग्रेस ने जीतीं है और तमिल नाडु की तीनों विधानसभा सीटें  सतारूढ  एआईएडीएमके के खाते में गई हैं। पुडुचेरी की एकमात्र सीट  सतारूढ कांग्रेस ने और त्रिपुरा की दोनों विधानसभाई सीटें वहां सतारूढ माकपा ने जीती हैं। कुल मिलाकर उप-चुनाव के परिणाम इस बार भी अलग नहीं है। अपवाद को छोडकर अब तक सतारूढ दल के  उप-चुनाव जीतने की परंपरा रही है। छह राज्यों के उपचुनाव में तीन में भाजपा जीती है तो चार में विपक्षी दल। इसके क्या मायने लगाए जाएं। बहरहाल, नोटबंदी निसंदेह  राष्ट्रहित में है मगर देशवासियों को इसकी बहुत बडी कीमत चुकानी पड रही है। अब तक 70 से ज्यादा लोग बेमौत मारे जा चुके हैं। 20,000 करोड रु  से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। तथापि,  बेंकों में अब तक 5,44,571 करोड रु जमा कराए गए हैं। इन मेंसे 33,006 करोड रु के नोट बदले गए हैं और 5, 11, 565 करोड रु जमा कराए गए हैं। आरबीआई के मुताबिक इस दौरान लोगों ने 1, 03,316 करोड रु की नगदी निकाली है। अनुमान है कि देश  में 500 और 1000 रु के लगभग 14 लाख करोड रु के अवैध नोट हैं। इसका अर्थ  है कि लगभग दस लाख करोड रु के अवैध नोट अभी भी बाहर नहीं आए है और अगर इन सब नोटों को बदला जाता है तो इसमें कम-से-कम 90 दिन का समय लग सकता है। इस हिसाब से देश  को सामान्य स्थिति में लौटने के लिए कम-से-कम चार माह का समय और लग सकता है। भारत जैसे विशाल देश  में जहां बेरोजगारों की लंबी कतार लगी है, इतना लंबा समय भारी पड सकता है। नगदी का संकट होने से लोगों की क्रय शक्ति (परचेजिंग पॉवर) काफी कमजोर हो गई हैं और इससे वाणिज्य और व्यापार जगत की 70 फीसदी से भी अधिक की ग्राहकी  कम हुई है। इससे मांग भी कमजोर पडती है। मांग के कमजोर पडने से अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी बढती है। देश  में असंगठित कामगारों की संख्या काफी ज्यादा है और अगर कामगारों को  15-20 दिन का रोजगार भी नहीं मिलता है, तो उनके भूखों मरने की नौबत आ सकती है। सबसे ज्यादा बुरी हाल रियल्टी सेक्टर का है। यह सेक्टर लंबे समय से मंदी से पीडित है और अब नगदी सकट से इस सेक्टर में और ज्यादा मंदी व्याप्त हो सकती है। इस  सेक्टर का अधिकतर कारोबार नगदी पर चलता है। 500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने से इस सेक्टर की कमर टूट गई है। नोटबंदी का सबसे बुरा असर देश  की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड रहा है। देश  में 6.8 लाख देहातों में से अधिकांश  में बैंक नहीं है और इनमें सारा काम नगदी पर चलता है। नोटबंदी से सारा कामकाज ठप्प पड गया है। मौजूदा रबी फसल की बुआई पर  प्रतिकूल असर पडा है। पुराने नोट एकदम बंद होने से किसानों को बीज और खाद लेने के लाले पडे हुए हैं। इसी वजह सरकार ने सोमवार को किसानों को बीज और खाद खरीदने के लिए पुराने 500 रु के नोट चलाने की अनुमति दी है। निष्कर्ष  यह है कि नोटबंदी भले ही दीर्घकाल में अच्छे परिणाम लाए मगर फिलहाल इस कार्रवाई ने आम आदमी की कमर तोड कर रख दी है।