देश के सबसे विशाल प्रांत उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की बेला पर राजनीतिक दलों ने मर्यादा पुरषोतम राम का सियासी फायदा उठाने की जैसे लूट मचा रखी है। अब तक भगवा भारतीय जनता पार्टी को अयोध्या और राम मंदिर को सियासी हितों के लिए भुनाने पर कोसा जाता रहा है मगर अब तो समाजवादी पार्टी भाजपा से भी एक कदम आगे निकल गई है। भीषण पारिवारिक कलह से पीडित यदुवंशी परिवार की समाजवादी पार्टी ने सोमवार को अयोध्या में इंटरनेशनल थीम पार्क बनाने का ऐलान कर सभी को चौंका दिया। यही वही सरकार है जिसने अयोध्या में राम मंदिर बनाने आए भक्तों पर गोलियां बरसाईं थी और अयोध्या में विवादित स्थल पर बाबरी मस्जिद बनाने का संकल्प ले रखा है। मुलायम सिंह यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी को अल्पसंख्यकों और पिछडे तबकों का खैरख्वाह माना जाता है। यहां तक कि मुसलमानों के हितों की रक्षा के लिए प्राण तक न्यौछावर करने का संकल्प लेने वाले मुलायम सिंह यादव को भाजपाई “मुल्ला सिंह“ यादव के नाम से छींटाकशी किया करते हैं। समाजवादी पार्टी अयोध्या में राममंदिर को बनाने की मुखर विरोधी रही है। मुलायम सिंह संसद में अयोध्या में बाबरी मस्जिद बनाने का संकल्प भी दोहरा चुके हैं। अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराने और राममंदिर को चुनावी मुददा बनाने के लिए मुलायम सिंह यादव और उनकी पार्टी के लोग भाजपाइयों को जी भर कर कोसा करते हैं। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा अयोध्या में रामायण संग्रहालय के निर्माण का पहले ही ऐलान कर चुकी है। संग्रहालय के लिए भाजपा ने अयोध्या स्थित विवादित राम मंदिर- बाबरी मस्जिद स्थल से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर 25 एकड जमीन का चयन भी किया है। मंगलवार को केन्द्रीय पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री महेश शर्मा ने अयोध्या में इस साइट का निरीक्षण किया। केन्द्र सरकार अयोध्या में रामायण संग्रहालय के साथ-साथ कृश्ण और बुद्ध सर्किट का भी निर्माण कर रही है। केन्द्र सरकार का कहना है कि यह सब पिछले दो साल से पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए किया जा रहा है। इसी की काट के लिए अखिलेश सरकार ने अयोध्या थीम पार्क बनाने का फैसला लिया है। यही तर्क समाजवादी पार्टी भी दे रही है मगर दोनों दलों के स्पष्टीकरण जनता के गले नहीं उतर रहे हैं। पांच साल से उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ सपा सरकार को अब तक अयोध्या में थीम पार्क बनाने का विचार नहीं आया। और अगर विधानसभा चुनाव में सपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो इस प्रस्ताव का स्वतः दफन हो जाना तय है। जाहिर है अखिलेश सरकार का अयोध्या थीम पार्क बनाने का फैसला विशुद्ध राजनीतिक है और मतदाताओं को रिझाने के मकसद से लिया गया है। और भाजपा का रामायण संग्रहलाय की योजना भी “ चुनावी“ रणनीति का हिस्सा है। इस मामले में भाजपा के सहयोगी संगठन विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल भी संतुष्ट नहीं है। और-तो-और भाजपा के वरिष्ठ नेता सांसद विनय कटियार ने रामायण संग्रहालय को “ चुनावी लॉलीपॉप“ बताया है। विनय कटियार भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं और वे राष्ट्रीय स्वंय सेवक के काफी करीब हैं। दरअसल, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है। इन हालात में केन्द्र सरकार राम ंमंदिर का निर्माण करने की स्थिति में नहीं है। लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण भाजपा का प्रमुख चुनाव मुद्दा रहा है। मोदी सरकार यह बात जानती थी कि अदालत का फैसला जल्द आने वाला नहीं है। इसीलिए वैकल्पिक तौर पर अयोध्या में रामायण संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया गया ताकि विधनसभा चुनाव में इसे भुनाया जा सके । मगर इस प्रस्ताव पर भी अभी कोई ठोस प्रगति नही हुई है। और अब अखिलेश सरकार का थीम पार्क भाजपा का गणित बिगाड सकता है। बहरहाल, मर्यादा पुरुषोतम को सियासी हितों के लिए भुनाना दर्शाता है कि समकालीन राजनीतिक दल मान-मर्यादा का कितना सम्मान करते हैं।
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