गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

येदियुरप्पा को राहत

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा को सीबीआई कोर्ट से बडी राहत मिली है। सीबीआई कोर्ट ने येदियुरप्पा को 40 करोड रु के घूसखोरी मामले से बरी कर दिया है। येदियुरप्पा को इस मामले में तीन सप्ताह तक जेल में रहना पडा था और उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक गंवानी पडी थी। कोर्ट ने उनके दो पुत्रों और दामाद समेत 13 अन्य को भी बरी कर दिया है। येदियुरप्पा और उनके परिवार पर आरोप था कि बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने 2010 में राज्य में स्थित एक स्टील कंपनी की कायदे-कानून के बाहर जाकर मदद की थी। इस स्टील कंपनी को माइनिंग लाइसेंस दिलवाने के लिए 40 करोड रु की घूस ली थी। 20 करोड येदियुरप्पा के दो पुत्रों और दामाद के बैंक अकांउट में 20 करोड जमा कराए गए थे। इसके अलावा 20 करोड प्रेरणा एजुकेशनल ट्रस्ट में जमा कराए गए थ। इस ट्रस्ट को येदियुरप्पा के पुत्र चलाते हैं। ये सब आरोप सीबीआई ने अदालत में दायर चार्जशीट में लगाए थे। येदियुरप्पा का एक पुत्र अभी कर्नाटक विधानसभा का सदस्य है। 2011 में मामले सामने आने पर येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद भी छोडना पडा था। अदालत से बरी होने के बाद येदियुरप्पा का पार्टी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनने का रास्ता साफ हो गया है। कर्नाटक में मई 2018 में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा के  राष्ट्रीय  अध्यक्ष अमित  शाह येदियुरप्पा को पहले ही पार्टी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर चुके हैं। कर्नाटक में अभी कांग्रेस की सरकार है। दक्षिण भारत में कर्नाटक एकमात्र ऐसा राज्य है जहां भाजपा का वर्चस्व है और राज्य मे पार्टी की  सरकार भी सत्तारूढ रही है। 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पहली बार स्पष्ट  बहुमत मिला था और येदियुरप्पा  दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे। इससे पहले 12 नवंबर, 2007 को बीएस येदियुरप्पा राज्य में भगवा पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बने थे मगर तब भाजपा को जनता दल (एस) का समर्थन नहीं मिलने पर 7 दिन बाद उनकी सरकार गिर गई थी। कनार्टक में भाजपा और जनता दल (एस) का बेमेल राजनीतिक गठबंधन की दिलचस्प गाथा है। 2005 में राज्य में धर्म सिंह के नेतृत्व में गठबंधन सरकार को गिराने के बाद भाजपा और जनता दल (एस) ने सरकार बनाई और तय हुआ पहले बीस महीने जेडी (एस) के एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री होगे और उनके बाद अगले बीस महीने भाजपा के येदियुरप्पा। बीस माह तक सब सही चलता रहा मगर जब भाजपा की बारी आई, कुमारस्वामी अपनी बात से मुकर गए और पद छोडने से मना कर दिया। इससे खफा भाजपा गठबंधन से बाहर आ गई और राज्य राष्ट्रपति  शासन के अधीन आ गया। नवंबर 2007 में भाजपा-जनता दल (एस) में फिर समझौता हुआ और येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बन गए मगर जेडी (एस) फिर अपनी बात से मुकर गई और भाजपा की सरकार 7 दिन में ही गिर गई।  2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पहली बार अपने बूते स्पष्ट  बहुमत मिला और येदियुरप्पा फिर मुख्यमंत्री बने। 2013 के विधानसभा चुनाव आते-आते  येदियुरप्पा भाजपा छोड चुके थे और उन्होने चुनाव अपनी अलग क्षेत्रीय पार्टी के बैनर में लडा पर कोई खास सफलता नहीं मिली।  2014 में लोकसभा चुनव से पहले येदियुरप्पा फिर भाजपा में षामिल हो गए। बहरहाल, येदियुरप्पा कर्नाटक के ताकतवर लिंगायत समुदाय से हैं। कर्नाटक में लिंगायत की सबसे अधिक 17 फीसदी आबादी है। और इस समुदाय की राज्य में राजनीतिक दलों को स्पष्ट  बहुमत दिलाने में अहम भूमिका रहती है। 2008 के विधानसभा चुनाव में लिंगायत ने भाजपा को  स्पष्ट  बहुमत दिलाने में महत्वपूर्ण  भूमिका निभाई थी और 2013 में येदियुरप्पा के अपमान से आहत इस समुदाय ने भाजपा का साथ नहीं दिया था। इसी जमीनी सच्चाई के दृष्टिगत भाजपा ने येदियुरप्पा को पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष और मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया है जबकि अभी चुनाव डेढ साल दूर है। घूसखोरी के आरोप से दोषमुक्त होने से येदियुरप्पा अब विरोधियों पर भारी पड सकते हैं।