शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016

कारोबारी (अ)सुगमता

आर्थिक सुधारों को संजीदगी से लागू करने और लालफीताषाही तथा लाइसेंस राज खत्म करने के बावजूद भारत में बिजनेस करना (कारोबार सुगमता) अभी भी आसान नहीं है। विश्व  बैंक की ताजा समीक्षा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। 190 अर्थव्यवस्थाओं की फेहरिस्त में भारत 130वें स्थान पर है। पिछले साल वह 131वें स्थान पर था। भारत की तुलना में इजराइल, मलेशिया, कजाख्स्तान, दुबई और हांग कांग इस मामले में कहीं बेहतर है। मगर भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि विश्व  बैंक ने आर्थिक सुधारों को संजीदगी से लागू करने के सरकार के प्रयासों की सराहना की है और एक पूरा अध्याय इस पर समर्पित किया गया है। इस अध्याय में कहा गया है कि भारत ने देश  में कारोबारी माहौल बनाने के लिए सकारात्मक प्रयास किए हैं और इनके सुखद परिणाम भी सामने आ रहे हैं।  उधोग और व्यापार जगत को माकूल सुविधएं दी गई हैं। कानूनी अडचनें दूर की गई हैं और निवेश  के लिए बेहतर माहौल बनाया गया है। तथापि कारोबारी सुगमता के लिए अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। वीरवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नौकरशाही से इस बात का विश्लेषण  करने को कहा कि भारत में कारोबारी सुगमता के लिए माकूल माहौल कैसे बनाया जा सकता है। भारत 130वें स्थान पर क्यों है, शीर्ष  पर क्यों नही इस बात पर भी मंथन किया जाना चाहिए। देश  में मुक्त रुप से निवेश  तभी आएगा जब कारोबारी सुगमता वाला माहौल हो और इसके लिए उन तमाम बाधाओं को दूर करना होगा, जिनसे निवेशकों को आए दिन परेशानी होती हो। निवशकों को सबसे ज्यादा कोफ्त आलतु-फालतू की कागजी औपचारकिताएं से होती है और इन्ही कागजी लफ्डों से करप्शन पनपती है। भारत में कहने के लिए लाइसेंस और इंस्पेक्टरी राज खत्म हो गया है मगर अमल में ऐसा कुछ भी नहीं है। भारत में अभी भी उधोग लगाने के लिए सौ तरह के झंझट हैं और सरकारी दफ्तरों की खाक छाननी पडती है। देश  के अग्रणी उधोगपति आदि गोदरेज ने कुछ समय पहले इस बात पर निराशा  जताई थी कि लाइसेंस और इस्पेक्टरी राज खत्म किए जाने के बावजूद अभी भी केन्द्र और संबंधित राज्य सरकार से कई तरह की अनुमति लेनी पडती है। इसमें न केवल समय जाया होता है, बल्कि कई जगह कर्मचारियों की मुठ्ठी गर्म करनी पडती है। देश  में कारोबार करना कितना सुगम है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक अग्रणी औद्योगिक  घराने को महाराष्ट्र  में संयंत्र लगाने के लिए कई माह इंतजार करने के बाद भी अनुमति नहीं मिल पाई। हिमाचल के मनाली में अमेरिका के प्रतिष्ठित  फोर्ड औधोगिक घराने को कई साल इंतजार करने के बाद खाली हाथ अमेरिका लौटना पडा। भारत में कारोबार करने में स्थानीय सियासी हित भी आडे आते हैं। हिमाचल में फोर्ड के मामले में यही हुआ था। पंजाब और महाराष्ट्र  ने लालफीतशाही को काफी हद तक कम  किया है। श्रम कानून भी नरम किए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने कारोबार स्थापित करने के लिए निर्धारित 76 अनुमतियों (परमिशन) को घटाकर 35 कर दिया है मगर अभी भी इन्हें काफी ज्यादा माना जा रहा है। भारत में सख्त और उत्पादन विरोधी कर व्यवस्था भी बिजनेस में अडचन डालती है। तरह-तरह और जगह-जगह कर लगना और इस क्रम में घुसखोरी को बढावा मिलने से भारत में कारोबारी खासे परेशान किये जाते हैं। जीएसटी अभी तक लागू नहीं हो पाया है। भारत की तुलना में शीर्ष पर रहने वाले सिंगापुर और न्यूजीलैंड में कारोबार करना बेहद सुगम है और दोनों  मुल्कों में एक दिन में ही कारोबार स्थापित किया जा सकता है। निवेशक वहीं जाएगा, जहां उसे सुगमता से कारोबार करने का माहौल मिलेगा। भारत दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था है और अगर देश को दुनिया में अपना परचम लहराना है तो कारोबारी सुगमता का माहौल निर्मित करना होगा।