देश की शीर्ष अदालत की अवमानना पर आमादा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को सर्वोच्च न्यायालय ने फिर जोरदार झटका दिया है। और यह सिला तब तक चलता रहेगा, जब तक बोर्ड लोढा समिति की सिफारिशों को अक्षरश लागू नहीं कर लेता। सुधार लाने में बीसीसीआई की ना-नुकर से खफा सुप्रीम कोर्ट ने गाठ शुक्रवार को बोर्ड के पर ही कतर डाले। कोर्ट ने लोढा पैनल से कहा है कि वह बीसीसीआई के बडे कॉन्ट्रैेक्ट देने के लिए अपना स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करे। अब तक दिए गए बडे कॉन्ट्रैेक्ट और अन्य अकाउंट्स की भी जांच कराए। सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को निर्देश दिए हैं कि जब तक लोढा पैनल की सिफारिशें लागू नहीं की जाती, तब तक राज्यों के क्रिकेट बोर्ड को कोई भी ग्रांट जारी नहीं की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को फिर निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक लोढा समिति की सिफारिशों को लागू किया जाना चाहिए। अगली सुनवाई दिसंबर 3 को रखी गई है। और अगर तब तक बीसीआईआई लोढा समिति की सिफारिशें लागू नहीं करती, सुप्रीम कोर्ट बीसीसीआई को भंग करके अपने प्रशासक नियुक्त कर सकता है। यह बात सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है। बीसीसीआई ने लोढा समिति की सिफारिशों को लागू करने से साफ मना करते हुए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्याचिका दायर की थी। 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को अस्वीकार करते हुए बीसीसीआई को निर्देश दिए थे कि उसे लोढा समिति की सिफारिशें हर हाल में लागू करने होगी। इस पर भी बीसीसीआई ना-नुकर करती रही। ताजा फैसले से बीसीसीआई की कॉन्ट्रैक्ट अवार्ड करने की पॉवर जाती रही है। बीसीसीआई को अगले दस साल (2019 से) के लिए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मीडिया राइटस देने हैं। हाल ही में बीसीसीआई ने इसके लिए निविदाएं आंमंत्रित की थीं और इसके जबाव में ट्विटर और फेसबुक जैसी लोकप्रिय सोशल साईट्स ने भी गहरी रुचि दिखाई थी। इन दोनों के अलावा सोनी, स्टार टीवी और रिलायंस जियो भी मैदान में है। 2018 तक के आईपीएल मीडिया राइटस सोनी के पास हैं और इसके लिए सोनी ने दस साल पहले 1.6 अरब डॉलर की बोली लगाई थी। इस बार बीसीसीआई को आईपीएल की मीडिया राइटस बोली से 4.5 अरब डॉलर के आय का अनुमान है। मगर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से बीसीसीआई की जगह अब लोढा समिति का ऑडिटर फैसला करेगा। लोढा समिति की सिफारिशें लागू करने पर बीसीसीआई के कई मौजूदा दिग्गज प्रभावित हो रहे हैं। बीसीसीआई को मंत्रियों और नौकरशाहों की जद से बाहर रखना, एक पद-एक व्यक्ति, दो से ज्यादा टर्म पर प्रतिबंध, एक राज्य-एक वोट और आयु सीमा (अधिकतम 70 साल) लोढा समिति की प्रमुख सिफारिशें हैं। अगर इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो बीसीसीआई अध्यक्ष समेत कई पदाधिकारी बाहर हो जाएंगे। बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर खुद 14 साल से हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद पर जमे हुए हैं। लोढा समिति की सिफारिशें लागू होने से उन्हें एक पद छोडना पडेगा। लोढा समिति की सिफारिशों को लागू करने से मना करके बीसीसीआई ने साफ कर दिया है कि उसे सुधार में कोई दिलचस्पी नहीं है जबकि बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर यह बात भली-भांति जानते थे कि देश की शीर्ष अदालत की अवमानना करना उन्हें महंगा पड सकता है। युवा सांसद अनुराग ठाकुर की यह बदकिस्मती है कि उन्होंनें बीसीसीआई अध्यक्ष का पदभार नाजुक समय में संभाला है। अनुराग ठाकुर को राजनीति में अभी लंबा सफर तय करना है। उनके लिए बेहतर यही होगा कि वे अविलंब संजीदगी से लोढा समिति की सिफारिशों को अक्षरश: लागू करवाएं और क्रिकेट के इतिहास में अपने लिए स्वर्णिम स्थान बनाएं। खलनायक की भूमिका से उनके राजनीतिक कैरियर पर असर पड सकता है। यही तो उनके विरोधी साबित करना चाहते हैं।
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