सोमवार, 19 सितंबर 2016

Whats There In Name? Very Much, Says Haryana

“नाम में क्या रखा है। गुलाब को किसी और नाम से पुकारे जाने पर उसकी महक खत्म नहीं हो जाती “, विख्यात लेखक विलियम शेक्सपियर का यह जुमला काफी लोकप्रिय है। मगर चंडीगढ में नए अंतरराष्ट्रीय  एयरपोर्ट  के नामकरण पर  हरियाणा महान लेखक  से इतेफाक नहीं रखता । अततः नाम ही तो है जो हमारी पहचान बताता है। चंडीगढ में अंतरराष्ट्रीय  एयरपोर्ट पर भी यह बात मौजू बैठती है। अंतरराष्ट्रीय  एयरपोर्ट का नाम चंडीगढ रखा जाए अथवा मोहाली, इस पर खासा विवाद है। हरियाणा चाहता है कि एयरपोर्ट का नाम चंडीगढ रखा जाए क्योंकि अंतरराष्ट्रीय  एयरपोर्ट पंजाब और हरियाणा का संयुक्त प्रकल्प है। हरियाणा ने इस एयरपोर्ट के निर्माण के लिए 250 करोड रु दे रखे हैं। यह रकम इसी शर्त पर दी गई थी कि अंतरराष्ट्रीय   एयरपोर्ट पर पंजाब और हरियाणा का बराबर का हिस्सा है। वीरवार को  अंतरराश्ट्रीय एयरपोट से षारजाह के लिए पहली इंटरनेषनल उडान के उदघाटन पर समाचार पत्रों में जारी विज्ञापनो में एयरपोर्ट  का नाम मोहाली अंतरराश्ट्रीय एयरपोर्ट बताया गया। इस एयरपोर्ट  के नाम को लेकर हरियाणा, पंजाब से पहले भी अपना ऐतराज जता चुका है। वीरवार को विज्ञापनो में पंजाब द्वारा अंतरराश्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम मोहाली एयरपोर्ट  बताए जाने से क्षुब्ध हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पंजाब के मुख्यमंत्री को चिठ्ठी लिखकर अपना सख्त ऐतराज जताया है। हरियाणा का कहना है कि केन्द्र ने अभी इस एयरपोर्ट का नामकरण नहीं किया है। इस स्थिति में इसे मोहाली बताया जाना गलत है। वीरवार को पहली  अंतरराष्ट्रीय   के उदघाटन पर चंडीगढ आए केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अषोक गणपति राजू ने भी माना कि केन्द्र ने अभी चंडीगढ एयरपोर्ट के नामकरण को अंतिम रुप नहीं दिया है। बहरहाल, पंजाब को इस एयरपोर्ट का नाम मोहाली एयरपोर्ट रखने की जल्दी है। राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने जा रहे है और बादल सरकार एयरपोर्ट  को अपनी उपलब्धि बताकर चुनाव में भुनाना चाहती है। हरियाणा के लिए एयरपोर्ट का नाम काफी मायने रखता है। अगर 250 करोड रु देकर नाम भी  अपनी पसंद का नहीं रखवा पाए, तो खट्टर सरकार को विपक्ष की तीखी नुक्ताचीनी का सामना करना पड सकता है। एयरपोर्ट के निर्माण के लिए 250 करोड रु का योगदान हुड्डा सरकार के समय दिया गया था। सतलुज-यमुना लिंक परियोजना को खारिज किए जाने और किसानों को जमीन लौटाए जाने से  हरियाणा पहले ही  पंजाब से बेहद खफा है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री अंतरराष्ट्रीय  उडान के उदघाटन समारोह में शरीक तक नहीं हुए। इस स्थिति में अगर एयरपोर्ट का नाम मोहाली रखा जाता है, तो यह संदेश  जाएगा कि हरियाणा ने 250 करोड रु देने के बावजूद अपना हक छोड दिया है। पंजाब से कोई उम्मीद नहीं की  जा  सकती। सियासी हितों से विवश  पंजाब बहुत पहले हरियाणा से बडे भाई का फर्ज निभाना भूल चूका है। वैसे भी राजनीति में कोई  सगा नहीं होता।  जमीनी सच्चाई यह है कि इस समय पंजाब और हरियाणा के बीच भारत-पाकिस्तान जैसी दीवार खडी हो चुकी है।  केन्द्र ही हरियाणा की आखिरी उम्मीद है। केन्द्र में भाजपा नीत राजग  की सरकार है हालांकि  शिरोमणि अकाली दल सरकार का अहम हिस्सा है। राजग में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश  सिंह बादल का राजनीतिक काफी ऊंचा है। हरियाणा के लिए पंजाब से अंतरराष्ट्रीय  के नामकरण की जंग जीतना  आसान नहीं है। अब तक इंटर स्टेट मामलों मे केन्द्र का रवैया “ गंगा गए गंगा राम, यमुना गए यमुना दास” जैसा  रहा है। मोहाली एयरपोर्ट  मामले में भी ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सक्ती। कम-से-कम विधानसभा चुनाव तक तो कतई नहीं।