रविवार को जम्मू-कश्मीर में सेना के उडी स्थित ब्रिगेड हैडक्वार्टर पर पाकिस्तानी आतंकियों के हमले से पूरा देश जितना स्तब्ध था, उतना ही चिंतित भी। सुबह-सुबह सैन्य हैडक्वार्टर पर हमला करके मुठ्ठी भर आतंकियों ने 17 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया और तीस से ज्यादा को गंभीर रुप से जख्मी कर दिया। चारों आतंकी भी मारे गए। इस हमले की खबर फैलते ही पूरे देश में गली-गली, घर-घर और सडक से सता के गलियारों तक एक ही आवाज उठी “ बस अब बहुत हो गया, पाकिस्तान को माकूल जवाब दिया जाए “। और अगर देश के जनमानस की सुनी जाए, तो भारत को फौरन पाकिस्तान पर सैन्य हमला कर देना चाहिए, फिर चाहे इसके परिणाम कितने ही खतरनाक क्यों न होॅ। अगर पाकिस्तान पर हमला नहीं कर सकते हैं तो पिछले साल जिस तरह सेना ने म्यामार में घुसकर आतंकियों को मार गिराया था, वैसी सैन्य कार्रवाई तो की ही जा सकती है। मगर ऐसा करना आसान नहीं है। इससे पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड सकता है। तथापि, सच्चाई यह भी है कि युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं है। दुनिया युद्ध के घातक परिणाम भुगत चुकी है। द्धितीय विश्व युद्ध की विभीषिका के घातक परिणाम जापान के लोग आज भी भुगत रहे है। एशिया में सीरिया, इराक, अफगानिस्तान और यमन युद्ध में करीब-करीब तबाह हो चुके हैं और इन देशों की आधी से ज्यादा आबादी भुखमरी की कगार पर है। कडवी सच्चाई यह है कि विज्ञान और प्रोन्नत टकनॉलॅाजी के इस युग में पारंपरिक (कन्वेशनल) युद्ध की जगह रासायनिक हथियारो का युद्ध लडा जाएगा। अगर भारत और पाकिस्तान के बीच रासायनिक हथियारों का युद्ध होता है, दोनो देशो की अवाम को इसके बेहद खतरनाक परिणाम भुगतने पड सकते हैं। 1947 में विभाजन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच 3 युद्ध हो चुके हैं मगर इनसे किसी समस्या का हल नहीं हो पाया है। पाकिस्तान अपनी बेजा हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के फलस्वरुप पूर्वी पाकिस्तान के अलग होकर बांग्लादेश के बनने के बाद भी पाकिस्तान ने कोई सबक नहीं सीखा है। सच यह है कि पाकिस्तान के सियासी और कटटरपंथी नेता भारत की तरक्की और खुशाहली से जलते हैं। इसीलिए भारत को अस्थिर बनाने की लगातार कोशिश करते रहते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच 1800 किलोमीटर लंबी सीमा पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा खतरनाक बॉर्डर है, जहां दो न्यूक्लियर हथियारों से लैस ताकतों का हर रोज शत्रुतापूर्ण आमना-सामना होता है। इससे पूरी दुनिया चिंतित है। भारत 2004 के बाद से एक नए सैन्य सिद्धांत (मिल्ट्री डाक्टराइन) “ कोल्ड स्टार्ट“ के तहत पाकिस्तान को रोकने की कोशिश कर रहा है। इसके तहत जरुरत पडने पर भारत, पाकिस्तान पर सीमित सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी लगभग पांच लाख सेना को 72 घंटों में लामबंद कर सकता है। पारंपरिक वॉर में भारत, पाकिस्तान पर बहुत ज्यादा भारी पडता है और उसे चंद घंटों में धूल चटा सकता है। इससे भयभीत पाकिस्तान ने काफी मात्रा में रासायनिक हथियार जमा कर रखे हैं। पाकिस्तान बार-बार धमकी देता रहता है कि भारत को पाकिस्तान पर आक्रमण करने से रोकने के लिए वह रासायनिक हथियार इस्तेमाल कर सकता है। यानी पाकिस्तान पारंपरिक युद्ध की बजाए भारत से रासायनिक युद्ध लड सकता है। रासायनिक युद्ध न तो भारत की अवाम के हित में और न ही पाकिस्तानी अवाम के। चंद सिरफिरे लोगों के लिए अवाम को रासायनिक युद्ध की भठठी नहीं झोंका जा सकता। इसी जमीनी सच्चाई के दृष्टिगत मोदी सरकार ने पाकिस्तान को कूटनीति से परास्त करने का सही निर्णय लिया है। पाकिस्तान खुद आतंक की भीषण आग में जल रहा है और वह दिन दूर नही जब यह आतंकी देश इस आग में जल कर भस्म हो जाएगा।
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