शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

Digital India Can Take Country To New Height

भारत को अगर तेज रफ्तार से प्रगति करनी है तो सवा सौ करोड लोगों को हर हाल में जल्द से जल्द  आधुनिक डिजिटल टकनॉलॉजी से सुविधा-सपन्न करना होगा। इन दिनों मुकेश  अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो की पूरे देश  में धूम मची हुई है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन टीवी चैन्लस पर रिलायंस जियो के लिए प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने का संकल्प दोहरा रहे हैं।  इस विज्ञापन को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री पर रिलायंस के लिए मॉडलिंग करने का तंज भी कसा है। तथापि, महानायक के इस विज्ञापन में देश  की डिजिटल इंडिया को लेकर मौजूदा स्थिति का पता  चलता है। देश  को अभी इस दिशा  में लंबा सफर तय करना है और टेलिकॉम कंपनियां इस सफर को आरामदायक और सफल बनाने में महत्वपूृर्ण भूमिका निभा सकती है। निसंदेह, टेलीकॉम कंपनियों नें देश  में संचार क्रांति लाने में महत्वपूर्ण  भूमिका निभाई है। संचार क्रांति आने से देश  के कोने-कोने में मोबाइल, डिजिटल टीवी और इंटरनेट की सुविधा पहुंची है। इंटरनेट के आने से चिठ्ठी लिखने का चलन करीब-करीब खत्म हो चुका है। दुनिया के किसी भी कोने में चटपट ई-मेल अथवा एसएमएस से फौरन संदेश  भेजे जा सकते हैं। इंटरनेट ने वाकई ही पूरी दुनिया को ग्लोबल विलेज बना दिया है। इस स्थिति के  दृष्टिगत देश  को डिजिटल बनाने में कोई ज्यादा परेशानी  नहीं आनी चाहिए। देश  ने इस ओर कदम भी बढा दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जुलाई, 2015 में डिजिटल इंडिया की नींव रखी थी। इस कार्यक्रम के तीन पायदानों  पर सरकार प्राथमिकता से काम कर रही है। डिजिटल बुनियादी ढांचे का सृजन करना पहला पायदान है। इसके तहत देश  के कोने-कोने में इंटरनेट और वाई-फाई की सुविधाएं सृजित करना है। देश  संचार क्रांति के दौरान पहले ही बुनियदी सुविधाओं का मजबूत ढांचा तैयार कर चुका है। अब इसे और ज्यादा व्यापक और सुदृढ बनाना है। डिजिटल सेवाओं की सुनिश्चित  डिलीवरी देना इस कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण पायदान है। रिलायंस और उस जैसी टेलिकॉम कंपनियों का इसमें प्रमुख योगदान रहेगा। डिजिटल साक्षरता इस कार्यक्रम का तीसरा पायदान है और यह सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण  है। देश  में अभी भी लगभग 20 फीसदी लोग साक्षर नहीं है। इस स्थिति में पहले इन लोगों को साक्षर करना होगा और इसके बाद उन्हें डिजिटल साक्षर किया जा सकता है। वैसे विशेषज्ञों को भरोसा है कि डिजिटल साक्षरता की मदद से देश  के बकाया निरक्षरों को भी साक्षर किया जा सकता है। आधिनुक टकनॉलॉजी के कारण ही लोग अपना राजस्व संबंधी सारा रिकार्ड  आनलाइन जांच-परख सकते हैं। इससे लोगों के समय की बचत भी हुई है और पटवारी के नखरों से भी निजात मिली है। अब डिजीलॉकर के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस, गाडी की आरसी, इंसोयरेश  आदि साथ रखने की जरुरत भी नहीं है। मोबाइल पर एक क्लिक से डीएल और आरसी सामने आ जाएगी। इंटरनेट ने हमारी जीवनषैली को वास्तव में कभी आसान और उपयोगी बना दिया है। अब दुनिया के किसी भी हिस्से अथवा किसी भी विषय  की कोई भी सूचना अथवा जानकारी एक क्लिक से इंटरनेट से हासिल की जा सकती है। विकसित देश  आधुनिक टकनॉलॉजी का भरपूर फायदा उठा रहे है। वैश्विक मंदी में भी उन्नत प्रोद्योगिकी के दमखम पर कमजोर अर्थव्यवस्थाएं सरवाई कर पाई हैं। भारत के लिए डिजिटल सुविधाएं आगे बढने का सुनहरा मौका है। मात्र चार साल बाद 2020 में भारत दुनिया का युवातम देश  बन जाएगा। देश  का औसत नागरिक 29 साल का युवा होगा और शहर में ही बसेगा। मगर इस  अमूल्य मानव संपदा का सही दिशा  और कार्य में उपयोग करने के लिए देश  को रोजगार के अधिकाधिक अवसर सृजित करने होंगे। इतने कम समय में यह तभी मुमकिन है अगर डिजिटल इंडिया पर तेजी से काम हो।