शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

सेना के पराक्रम को सलाम

     
भारतीय सेना के प्रराक्रम को कोटि-कोटि सलाम। पाकिस्तानी आतंकियों के अडडों पर  भारतीय सेना के सटीक सर्जिकल ऑपरेशन से समस्त भारत का सीना 56 इंच चौडा हो गया है। देश  भर में  जश्न मनाया जा रहा है और आतिशबाजी की जा रही है। इस कार्रवाई ने शहीदों के परिजनों के जख्मों पर मलहम-पट्टी का काम किया है। सेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल से कहीं आगे  जाकर पाकिस्तान अधिकृत  कश्मीर में दो किलोमीटर अंदर घुसकर आतंकियों के 7 ठिकानों को नेस्तानाबूद कर डाला और 38 आतंकियों को मार गिराया।  सेना के इस् पराक्रम से 125 करोड भारतीयों के सीने में सुलग रही “बदले की आग““ काफी हद तक शांत  हो गई है। यही तो देश  चाहता था। उडी आतंकी हमले में  शहीद हुए 19 सैनिकों का बलिदान जाया न जाए, पाकिस्तान को उसकी जुबान में जवाब देना लाजिमी था। देश  की मांग थी कि जिस तरह जून 2015 को भारतीय सेना ने 40 मिनट के सर्जिकल ऑपरेशन  में म्यांमार में घुसकर 35 आतंकियों को मार गिराया था, उसी तरह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकियों को मार गिराया जाना चाहिए। और सेना ने वही किया। सेना पहले से इस कार्रवाई की ओर इशारा रकर रही थी। उडी आतंकी हमले के बाद सेना ने पाकिस्तान को साफ-साफ चेतावनी दी थी कि  वह समय आने पर माकूल जवाब देगी। इस कार्रवाई से स्तब्ध और तिलमिलाया पाकिस्तान भले ही गला फाड-फाड कर इस सैन्य कार्रवाई को “छलावा“ बताए मगर सच्चाई छिपाए भी छिप नहीं सकती। पाकिस्तान की फरेबी फितरत के दृष्टिगत भारत ने पूरी कार्रवाई को कैमरे और वीडियो में रिकॉर्ड किया है। भारत ने  इस सर्जिकल कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान को भी अवगत करा दिया गया था। भारतीय सेना के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिल्ट्री ऑपरेशन ले़, जनरल रणबीर सिंह ने साफ-साफ शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान को जबाव देना बनता था। उडी आतंकी हमले के अलावा जम्मू-कश्मीर  में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों की घुसपैठ लगातार बढ रही थी। इसी माह 11 और  18 सितंबर को पूंछ और उडी में दो बडे हमले हुए। इस साल ब तक सेना पाकिस्तान से भेजे गए आतंकियों के 20 से ज्यादा घुसपैठ के प्रयास विफल कर चुकी है।  पकडे गए आतंकियों ने अपने कबूलनामे में पाकिस्तान की सलिंप्तता को स्पष्ट शब्दों में बयां किया है। पाकिस्तान के उव्च अधिकारियों को इन कबूलनामों से अवगत भी कराया गया है और दूतावासीय असेस की सुविधा भी दी गई मगर इस्लामाबाद है कि अपनी बेजा हरकतों से बाज नहीं आता है। भारत और पाकिस्तान के बीच 2004 को हुए करार के मुताबिक इस्लामाबाद ने नई दिल्ली को वचन दे रखा है कि वह अपनी जमीन को आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा। मगर पाकिस्तान  हर बार अपने वायदे से मुकरता रहा है। पूरी दुनिया यह बात जानती है कि अंतरराष्ट्रीय  सीमा पर दोनों देशों  की सेनाओं का सख्त पहरा रहता  है। सेना और सरकार की मदद के बगैर पाकिस्तान से भारत में परिंदा तक पर नहीं मार सकता। जाहिर भारत में आने वाले आतंकियों को पाकिस्तान की हर तरह से भरपूर मदद मिल रही है और पाकिस्तानी सेना ही आतंकियों को भारत में घुसपैठ करा रही है। कोई भी देश  ज्यादा देर तक इस स्थिति को सहन नहीं करेगा। बहरहाल,  पाकिस्तानी आतंकियों के “लंचपैडस“ को  नष्ट  करने की भारतीय सेना की कार्रवाई से दो बातें  स्पष्ट  है। पहली यह है कि भारत अब “रक्षात्मक“ (डेफेसिंव“ की जगह अब “आक्रामक“ (ओफेसिंव) हो गया है। मोदी सरकार की यह नई रणनीति काबिलेतारीफ है। देश  भी यही चाहता है। पाकिस्तान जैसे पांखडी और फितरती पडोसी से आक्रामक होकर ही निपटा जा सकता है। दूसरी यह कि भारत अपनी “संप्रभुता“ की रक्षा के लिए एलओसी को भी लांघ सकता है। आज तक भारत ने ऐसा नहीं किया था। मगर यह आक्रमक रणनीति भारत को युद्ध की भट्ठी में भी झोंक सकती है। पाकिस्तान चुप बैठने से रहा और भारत पर हमला कर सकता है। पूरे देश  को इस स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।