बुधवार, 21 सितंबर 2016

आर्थिक अस्त्र शस्त्र बेहतर विकल्प

भारत को अगर दुनिया में अपना परचम फहराना है तो उसे अपनी आर्थिक ताकत को तेजी से मजबूत करना होगा और इसे इतना पैना एवं धारधार बनाना होगा कि वह अपने शत्रुओं पर जब चाहे प्रहार कर सके। आर्थिक प्रहार एकमात्र ऐसा अस्त्र है जिससे हम पाकिस्तान को पटखनी दे सकते है।  भारत इस समय अपने घुर प्रतिद्धंद्धी चीन से भी अधिक तेजी से आगे बढ रहा है और यही भारत का सबसे  मजबूत पायदान है, जिसके बूते वह चीन को भी पीछे छोड सकता है। पाकिस्तान की तो आर्थिक क्षेत्र मे भारत के समक्ष कोई औकात ही नहीं है। आतंक और कट्टरवाद में उलझा पाकिस्तान का सकल घरेलू उत्पाद अगले चार सालों में 2020 तक मात्र 2.5 फीसदी की दर से बढने की उम्मीद है। इसकी तुलना में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अगले चार सालों में 5.7 फीसदी के सालाना  दर से बढने की उम्मीद है। चीन के सकल घरेलू उत्पाद की सालाना  वृद्धि दर 4.8 फीसदी रहेगी। यानी भारत से लगभग एक फीसदी कम। भारत की जीडीपी में सालाना वृद्धि का यह आकलन गुडस एंड सर्विसिस टैक्स लागू होने से पहले का है। जीएसटी के लागू होने के बाद भारत के सकल घरेलू उत्पाद में डेढ से दो फीसदी बढोतरी होने की उम्मीद की जा रही है। और ऐसा हुआ तो भारत चीन समेत अन्य सभी उभरती अर्थव्यवस्थाओं  को भी काफी छोड देगा। मोर्गन स्टेनली की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अगले साल भारत और इंडोनेशिया की आर्थिक वृद्धि में सुधार होगा जबकि चीन और दक्षिण कोरिया की आर्थिक वृद्धि में गिरावट के आसार हैं। आतंक और मंदी ने पूरी दुनिया में इस समय खलबली मचा रखी है। मगर भारत में स्थायित्व कायम है और इससे उसकी आर्थिक वृद्धि और मजबूत हो सकती है। ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन  का कर्ज खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है और अगर कर्ज की रफ्तार यही रही तो अगले तीन साल में उसके समक्ष कर्ज का संकट खडा हो सकता है। कर्ज के मामले में भारत की स्थिति भी बेहतर नहीं है मगर भारत के पास दीर्घ-कालीन कर्जे ज्यादा हैं। सुखद स्थिति यह है कि कम  अवधि के विदेशी  कर्ज में 2. 5 फीसदी की गिरावट आई है। एक और अच्छी खबर यह है कि बेंकों की नई गैर-निष्पादित परिसंपतियां (नॉन परर्फोमिंग असेट्स-एनपीए) की रफ्तार  धीमी हो गई है और इससे बैंकिंग क्षेत्र मजबूत हो सकता है। बहरहाल, रविवार को जम्मू-कश्मीर  के उडी में सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर आतंकी हमले भारत का तिलमिलाना स्वभाविक है। मोदी सरकार ने पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने का  संकल्प लिया है और भारत ऐसा करने में सक्षम भी है। मगर पाकिस्तान को अलग-थलग किए जाने से भारत को आतंक का और ज्यादा खतरा हो सकता है। पाकिस्तान में अभी भी कटटरवादी आतंकी संगठनों की तूती बोलती है और वहां की सरकार अपने ही देश  में आतंकी घटनाओं को रोक नहीं पा रही है। पाकिस्तान में आए रोज बम फूटते हैं और निर्दोष  लोग मारे जा रहे हैं। सच यह है कि पाकिस्तान सरकार का आतंकी संगठनों पर कोई वश  नहीं चलता है। इस स्थिति में उससे भारत में फैलाए जा रहे आतंक से निपटने की कोई उम्मीद रखना नादानी है। तथापि पाकिस्तान को अलग-थलग करने से वहा की सरकार कमजोर होगी और आतंकी संगठनों को और ज्यादा ताकत मिलेगी। भारत के लिए यह स्थिति ठीक नहीं होगी। भारत क्यों चाहेगा कि उसके पडोस में सीरिया अथवा इराक जैसे हालात बनें? भारत के पास उसका आर्थिक शस्त्र पुख्ता विकल्प है। पाकिस्तान को आर्थिक और वाणिज्यिक तौर पर निर्भर बना कर भारत जब चाहे उसकी बांहें मरोड सकता है। कहते हैं आर्थिक अस्त्र-श स्त्र जबरदस्त प्रहार करते हैं और आर्थिक रुप से कमजोर व्यक्ति या मुल्क अक्सर कमर झुका कर चलता है।