अमेरिका में इस साल नवंबर माह में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुईं हैं। विशेषकर, निवेश क इस चुनाव में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। दुनिया की सबसे बडी अर्थव्यवस्था अमेरिका के शीर्षस्थ पद के चुनाव पर में निवेशकों की दिलचस्पी स्वभाविक है। सोमवार को पूरी दुनिया की स्टॉक मार्केट में लगभग भूचाल सा आ गया था। सोमवार को न्यूयार्क में राष्ट्रपति उम्मीदवारों के बीच होने वाली राष्ट्रीय बहस से पहले ही मार्केट में डोनाल्ड ट्रंप को लेकर अफरा-तफरी फैल गई । जर्मनी के शीर्ष ड्यूश बैंक की खस्ता हाल ने आग में घी का काम किया। निवेशकों को इस बात का भय सता रहा है कि अगर खरबपति बिजनेसमैन डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति चुने जाते हैं, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इसका प्रतिकूल असर पड सकता है। ट्रंप हर पहलू का नफे-नुकसान में आकलन करते है। सरकार और अर्थव्यवस्था नफे-नुकसान के नजरिए से नहीं चलती। डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार है। वैसे अमेरिका की दो प्रमुख रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों में टिकट पाने की पुख्ता प्रकिया है। संभावित उम्मीदवारों को हर राज्य के पार्टी डेलेगेटस का बहुमत समर्थन हासिल करना पडता है। अमेरिकी की अधिकांश जनता पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी किलंटन की ईमेल प्रकरण में विवादास्पद भूमिका से भी नाराज है मगर डोनाल्ड ट्रंप को भी ज्यादा पसंद नहीं करते हैं। ट्रंप ने श्वेत बनाम अश्वेत का मुद्दा उठाकर अमेरिका के अश्वेतों को खासा नाराज कर रखा है। अश्वेत पूरी तरह से हिलेरी क्लिंटन के साथ हैं। मुसलमानों को आतंकी बताकर और अमेरिका में उनकी एंट्री पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान करके ट्रंप ने मुस्लिम समुदाय की नाराजगी मोल ले रखी है। अमेरिका के पडोसी मेक्सिको की सीमा पर दीवार खडी करने की घोषणा करके ट्रंप ने अमेरिका में बसे मेक्सिकन लोगों को नाराज कर रखा है। रुस के राश्ट्रपति पुतिन की तारीफ करके अमेरिकी पूंजीपतियों को और चीन के साथ सभी वाणिज्यिक संधियों का पुनरावलोकन की बात करके चीनी समुदाय को नाराज कर दिया। महिलाओं को भोग की वस्तु मानने के लिए अमेरिका का यह शक्तिशाली तबका डोनाल्ड ट्रंप का मुखर विरोधी है। अमेरिका बहु-नस्लीय देश है और यहां की अर्थव्यवस्था में हर नागरिक का अहम योगदान है। पार्टी नामांकन अभियान के शुरुआत में ट्रंप हिलेरी से काफी पीछे थे मगर ताजा चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में वे डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के बराबर आ गए हैं। अभी चुनाव के लिए दो माह का समय है और अगर मतदाताओ का रुझान यही रहा तो वे हिलेरी से आगे निकल सकते हैं। सोमवार को दुनिया भर की मार्केट में यही आशंका बलवित रही और अधिकतर शेयर औंधे मुंह गिर गए। तथापि, मंगलवार को स्थिति एकदम बदल गई। सोमवार को हिलेरी और ट्रंप के बीच हुई बहस में क्लिंटन ने डोनाल्ड को ऐसे पछाडा कि पूरी दुनिया की मार्केट में आशा की एक नई किरण प्रज्वलित हो गई। एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी के मुताबिक सोमवार की बहस के बाद 62 फीसदी अमेरिकी जनमानस ने माना कि हिलेरी ने बाजी जीत ली जबकि मात्र 27 फीसदी ट्रंप के पक्ष में थे। बहस के बाद के स्नैप पोल भी हिलेरी के पक्ष में हैं। नतीजतन, मंगलवार को मार्केटस में तेजी छाई रही और शेयरों में भारी उछाल आया। ट्रंप के मुखर विरोधी मेक्सिको की मुद्रा पीसो में डॉलर के मुकाबले 2 फीसदी का उछाल दर्ज हुआ। अभी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारो में 9 और 19 अक्टूबर को बहस के दो दौर होने बाकी है। आठ नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव से पहले इन दोनों डेबेटस पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। अगर ट्रंप हिलेरी पर भारी पडते हैं, बाजार में फिर अफरा-तफरा फैल सकती है। इस बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने पर मार्केट्स को किस भयावह स्थिति का सामना करना पड सकता है ?
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