मंगलवार, 13 सितंबर 2016

नहीं चाहिए सरकार का खजाना लुटाने वाले

देश  का अन्नदाता माने जाने वाले पंजाब की दयनीय वित्तीय स्थिति के लिए राज्य के सियासी दल प्रमुख रुप से जिम्मेदार है। चुनाव जीतने के लिए “आसमान से तारे तोड कर“ लाने का वायदा करते-करते सियासी दलों ने पंजाब को वित्तीय कंगाली की कगार पर ला खडा कर दिया है। और इस स्थिति के बावजूद सियासी दल सरकारी खजाने को  लुटाने से बाज नहीं आ रहे है। और अब औरों से कुछ अलग करने का दम भरने वाली आम आदमी पार्टी भी इस कडी में अन्य सियासी दलों के साथ जुड गई है। रविवार को आम आदमी  पार्टी के  राष्ट्रीय  संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का चुनावी घोषणा  पत्र (  इलेक्शन  मेनिफेस्टो) जारी करते हुए किसानों से लेकर सरकारी कर्मचारियो और आम आदमी को लुभाने के लिए वायदों की झडी लगा दी। गरीब किसानों के सारे कर्जे माफ कर दिए जाएंगे। इतना ही नहीं अगर आप की सरकार बनती है तो पार्टी बडे किसानों के ब्याज भी माफ कर देगी। इसके अलावा किसानों का पांच लाख तक का मुफ्त बीमा कराया जाएगा। किसानों को 12 घंटे मुफ्त बिजली दी जाएगी। प्राकृतिक आपदा के समय बीस हजार एकड का मुआवजा देने का भी वायदा किया गया है। किसानों को 12 घंटे मुफ्त बिजली, आटा-दाल, शगुन जैसी लोक-लुभावनी स्कीमों का दायरा बढाने का वायदा करके आम आदमी पार्टी  शिरोमणि अकाली दल से भी आगे निकल गई है। कुल मिलाकर अरविंद केजरीवाल ने 31 वायदे किए हैं और इन्हें अक्षरश : पूरा करने के लिए पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश  का संयुक्त बजट भी कम पड सकता है। गरीब किसानं के कर्ज माफ करने के लिए ही 85,000 करोड रु की दरकार होगी जबकि पंजाब का अपना राजस्व भी इतना नहीं है। पंजाब पर पहले ही 1.15 लाख करोड कर्ज  का बोझ है और सरकार एक सीमा तक ही कर्ज  ले सकतौ है। 12 घंटे मुफ्त बिजली और रियायती दरों पर  आटा-दाल स्कीम के लिए ही कम-से-कम 15 हजार करोड रु की जरूरत पडेगी। आप सरकार अपने वायदे पूरा करने के लिए इतना धन कहां से जुटाएगी, मेनिफेस्टो में इस बात का कोई उल्लेख नहीं है। वैसे, केजरीवाल ने सबसे पहले अपना  मेनिफेस्टो जारी करके अन्य सियासी दलों को पीछे छोड दिया है। इससे उनका तिलमिलाना स्वभाविक है। कांग्रेस ने आप के मेनिफेस्टो को पार्टी का कार्बन कॉपी करार दिया है। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश  कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही किसानों के कर्जे माफ करने का वायदा कर चुके हैं। शिरोमणि अकाली दल का आरोप है कि केजरीवाल को किसानों की समझ ही नहीं हैं। अभी राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों- शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस- का मेनिफेस्टो आना बाकी है। आप के लोक-लुभावने वायदों  का इन दलों के मेनिफेस्टो पर असर पडना तय है और सभी दल मतदाताओं को लुभाने के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की हर संभव कोशिश  करेंगे। बहरहाल, पंजाब में सत्ता पाने के लिए अरविंद केजरीवाल ने भी अन्य राजनीतिक दलों की तरह सबसे आसान रास्ता चुना है। दिल्ली में केजरीवाल  ने आम आदमी की लडाई लडी थी, इसलिए वे जनता के प्रिय बने थे। पंजाब में वे ऐसा कोई करिश्मा   नहीं कर पाए है।। इसके विपरीत  सुच्चा सिंह छोटेपुर प्रकरण से पार्टी को जबरदस्त झटका लगा है। छोटेपुर प्रकरण से लग रहा था कि पंजाब में आप विधानसभा चुनाव से पहले ही बिखर जाएगा मगर केजरीवाल ने स्थिति काफी हद तक संभाल ली है। पंजाब में छोटा किसान आप के साथ है और अब बडे किसानों को ब्याज माफ करने का वायदा करके केजरीवाल ने इस तबके को भी लुभाने की कोशिश  की है। यह बात दीगर है कि  राज्य की खस्ता माली हालत से बडे-बडे तो क्या, छोटे-मोटे वायदे भी पूरे नहीं किए जा सकते। पंजाब को इस समय राज्य के खजाना लूटाने वाला नहीं, बल्कि इसे बचाने वाला नेता चाहिए।