सोमवार, 26 सितंबर 2016

जीएसटी अगले 1 अप्रैल से ?

विलंब से ही सही,  शुक्र है अततः वस्तु एवं सेवा कर (गुडस एंड सर्विसिस -जीएसटी) बिल संसद  में पारित हो ही गया। और अब तमाम बाधाएं लांघते हुए  शुक्र है केद्र और राज्य 1 अप्रैल, 017 से जीएसटी को लागू करने के लिए सहमत हो गए हैं। जीएसटी जितनी जल्दी लागू होगा, यह देश  के लिए उतना ही हितकर होगा। विशेषज्ञों का आकलन है कि जीएसटी के लागू होने से देश  के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कम-से-कम डेढ से दो फीसदी का इजाफा हो सकता है। अगर  इसे संजीदगी से लागू किया जाए, तो जीडीपी तीन फीसदी तक बढ सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारत दुनिया की सबसे तेज बढती अर्थव्यवस्था बन जाएगी। वीरवार को अपनी पहली बैठक में जीएसटी परिषद में कई मुद्दो पर भारी मतभेदों के बावजूद जीएसटी को 1 अप्रैल, 2017 से लागू किए जाने पर पूर्ण सहमति थी। तथापि, कहना आसान है, करना बेहद मुश्किल ( इजीयर सैड देन डन)। जीएसटी परिषद  की पहली ही   बैठक में तमिल नाडु और उत्तर प्रदेश  ने “ वन-स्टेट, वन वोट“ सिद्धांत का मुखर विरोध करते हुए कहा की बडे राज्यों को छोटे राजों के बराबर रखना अन्यायपूर्ण है। यह बात दीगर है कि परिषद ने इस विरोध को खारिज कर दिया। जीएसटी में व्यापारियों की छूट सीमा पर भी कोई सहमति नहीं बन पाई। कुछ राज्य माहवार 10 लाख रु कारोबार करने वालों को छूट देने के पक्ष में थे। अधिकांष राज्य इस सीमा को 25 लाख रु तक के टर्नओवर को जीएसतटी से बाहर रखने के पक्ष में थे। बहरहाल, शु क्रवार को तय किया गया कि  25 लाख रु से कम का सालाना कारोबार करने वालों पर जीएसटी नहीं लगेगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली के अनुसार परिषद ने योजनाबद्ध बिक्री कर (सेल्स टेक्स) के
विवादास्पद मामले को भी सुलझा लिया है और इस पर सहमति बन गई है। शुक्रवार की बैठक में दोहरे नियंत्रण (डुअल कंट्रोल) के मामले को भी सुलझा लिया गया है। टैक्स लाइबिलिटी तय करने के लिए केन्द्र अथवा राज्य स्तर पर एक ही प्राधिकरण होगा, केद्र और राज्य स्तर पर अलग-अलग नहीं। इस मामले में उधोग और व्यापार जगत को इस बात पर निराशा हो सकती है कि एक समन्वित प्राधिकरण का खाका नहीं बन पाया है।  जीएसटी रेट और स्लैब पर बैठक में सहमति नही बन पाई और इसे अगले माह अक्टूबर में होने वालौ बैठक के लिए छोड दिया गया। यह मुद्दा काफी संवेदनशील  है और इस पर कुछ राज्य और समय चाहते हैं। केन्द्र सरकार टैक्स रेट 18-19 फीसदी के बीच तय करने के पक्ष में है मगर अधिकतर राज्य इसे 22 से 23 फीसदी निर्धारित करने के पक्ष में है।  जीएसटी रेट और स्लैब के अलावा  एरिया-बेस्ड छूट का मामला भी अभी सुलझ नहीं पाया है। बहरहाल, जीएसटी परिषद में कई विवादास्पद मुद्दों पर सहमति बनना सुखद पहल है और इससे उम्मीद की जा सकती है कि देश  इस क्रांतिकारी कर को अगले साल 1 अप्रैल से लागू होने के मार्ग  पर प्रशस्त हो रहा है। मगर अभी भी केन्द्र और राज्यों को अप्रैल 2017 से पहले तीन प्रमुख बिल संसद और विधानसभाओं से पारित करवाने हैं। और सबसे अहम कानून जीएसटी रेट और उसके स्लैब से संबंधित है। यह कानून तब तक पारित नहीं हो सकता, जब तक जीएसटी परिषद रेट और इसके स्लैब निर्धारित नहीं कर लेती। जीएसटी परिषद को अगले माह होने वालीे बैठक में रेट तय करना ही पडेगा ताकि   केन्द्र सरकार नवंबर में  शुरु होने वाले संसद  के  शीतकालीन सत्र में तीनों बिलों को पारित कर सके। जीएसटी लागू करने के लिए केद्र और राज्यों को युद्ध स्तर पर काम करना होगा।