मंगलवार, 9 अगस्त 2016

मोदी की चेतावनी


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का  “गौ-रक्षा“ की आड में समाज को बांटने वालों के खिलाफ मोर्चा  खोलने से समाज-विरोधी गतिविधियों पर अंकुश  लगने की उम्मीद की जा सकती है। विलंब से ही सही, लेकिन देश  के प्रधानमंत्री की चेतावनी जाया नहीं जाएगी।  गत दो दिन में कई बार अलग-अलग मंचों से तथा-कथित गो रक्षा की आड में दलितों पर अत्याचार करने वालों को  प्रधानमंत्री सख्त चेतावनी दे चुके हैं। सुसभ्य और सुसंस्कृत समाज में समाज को बांटने और कमजोर वर्गों पर अत्याचार करने वालों के लिए कोई जगह नहीं होती है। गो माता की सेवा करना और उसकी रक्षा करना, हर हिंदु अपना परम कर्तव्य मानता है मगर तथा-कथित गो-रक्षा यह बात भूल जाते हैं कि दलित भी हिंदू हैं और उन पर अत्याचार करना समाज को विखंडित करना है। प्रधानमंत्री गुजरात के उना में कथित गो-रक्षकों द्वारा दलितों की निर्मम पिटाई से बेहद क्षुब्ध हैं। गुजरात प्रधानमंत्री का पैतृक राज्य है और अगर उनके अपने ही राज्य मे दलित सुरक्षित न हो, तो पूरे देश  में गलत संदेश  जाता है। प्रधानमंत्री की नाराजगी का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि रविवार को तेलगांना दौरे के दौरान उन्होंने यहां तक कह डाला कि “ मुझे गोली मार दो, मगर दलित भाइयों पर हमले बंद करना बंद करो“। प्रधानमंत्री का इतना कहना भर काफी है कि फर्जी गो-रक्षक देश  में टकराव पैदा करना चाहते हैं, इसलिए उन्हें दंडित करना जरुरी है। बाकी का काम पुलिस और कानून खुद करेगा। निसंदेह, ऐसे लोगों को कडी से कडी सजा मिलनी ही चाहिए जो मृत पशु  की कथित रक्षा की खातिर इंसान को जीते जी मारना चाहते हैं। कथित गो-रक्षकों द्वारा दलित उत्पीडन से न केवल  गुजरात, बल्कि पूरे देश  के दलित उबले हुए हैं और इससे भाजपा को आने वाले विधानसभाई चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है। अगले साल के  शुरु में उत्तर प्रदेश  और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और साल के उत्तरार्ध में गुजरात और हिमाचल प्रदेश  में। गुजरात में लंबे समय से सतारुढ भाजपा को 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से कडी चुनौती मिल सकती है। देश  के एक अग्रणी समाचार पत्र ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है कि पाटीदार आरक्षण (पटेल) आंदोलन से भाजपा का इस समुदाय में मजबूत जनाधार कमजोर हुआ है। इसी आंदोलन के चलते भाजपा को गुजरात में आंनदीबेन पटेल को मुख्यमंत्री  पद से हटाना पडा। और अब उना दलित उत्पीडन प्रकरण ने भाजपा के समक्ष एक और चुनौती खडी कर दी है। देश में दलित और जनजातियों की 25 फीसदी (एक चौथाई) आबादी है। दलितों की  सबसे ज्यादा आबादी (लगभग 32 फीसदी ) पंजाब में है और इस राज्य के दलित आमतौर पर कांग्रेस के समर्थक है मगर लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते दलितों ने भाजपा का साथ दिया था। उत्तर प्रदेश  में अगर भाजपा को सता में आना है  तो दलितों का साथ जरुरी है मगर हालिया घटनाएं भाजपा के इन मंसूबों पर पानी फेर सकती है। बहरहाल, प्रधानमंत्री ने गो-रक्षकों को लताड लगाकर दलितों के जख्मों पर मलहम-पट्टी लगाने की कोशिश  की है और साथ में राजनीतिक निशाना भी साधा है। सुखद स्थिति यह है कि प्रधानमंत्री के साथ-साथ  राष्ट्रीय  स्वंय सेवक (आरएसएस) ने भी तथा-कथित गो-रक्षकों के खिलाफ मोर्चा खोला है। सामाजिक टकराव पैदा करने वाले फर्जी गो-रक्षकों का चिंहित करना वास्तव में जरुरी है। देश  के हालात ठीक नहीं है। प्रायोजित सीमापार आतंक से निपटना पहले ही बडी चुनौती है। भाजपाई अल्पसंख्यकों के खिलाफ आग उगल कर माहौल को तनावपूर्ण  बना देते हैं और अब तथा-कथित गो-रक्षक हिंदू समाज को भी बांट रहे हैं। इसे हर हाल में रोकना होगा।