गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान यात्रा करके काबिलेतारीफ काम किया है। दो-एक सिरेफिरे आतंकियों के डर से अगर भारत के गृहमंत्री अपनी यात्रा रद्द कर देते, तो देश की नाक कट जाती। कहावत है “ गली-मोहल्ले के कुत्तों के भौंकने के दर से वहां आना-जाना नहीं छोडा जाता“। भारत में भी पाकिस्तान विरोधी संगठन आए दिन पाकिस्तानी खिलाडियों और नेताओं के भारत दौरे को लेकर धमकियां दिया करते हैं मगर इससे न तो पाकिस्तानी खिलाडियों के दौरे रुके हैं और न ही शीर्ष नेताओं की यात्राएं । राजकीय यात्राओं पर आने वाले शीर्ष नेताओं की पुख्ता और भरोसेमंद सुरक्षा की व्यवस्था करना संबंधित देश की संवैधानिक जिम्मेदारी होती है और इसमें जरा सी चूक के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। जनवरी, 2016 में पठानकोट आतंकी हमले के बाद यह किसी भारतीय नेता की पहली पाकिस्तान यात्रा है। निसंदेह, भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ऐसे समय में इस्लामाबाद गए हैं, जब भारत और पाकिस्तान के बीच कडुवाहट चरम पर है। जम्मू-कश्मीर में हिजबुल के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से द्धिपक्षीय संबंध और भी खराब हुए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने वाई को शहीद बताकर और भारत अधिकृत कश्मीर पर अपना दावा जताकर संबंधों को और भी बिगाड दिया है। पाकिस्तान के आतंकी संगठन जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद और हिजबुल मुजाहिद्दिन प्रमुख सैयद सलाल्लुदीन पाकिस्तान सरकार को राजनाथ सिंह की यात्रा को लेकर गंभीर परिणामों की धमकी भी दे चुके हैं। बुधवार को भारत के गृहमंत्री की इस्लामाबाद यात्रा से पहले जमात-उद-दावा और हिजबुल समेत कई भारत विरोधी संगठनों ने पाकिस्तान मे जगह-जगह विरोध प्रर्दशन किए और सरकार से राजनाथ सिंह की अधिकृत अगवानी नहीं करने का दबाब डाला। ताजा घटनाक्रम के दृष्टिगत भारत ने गृहमंत्री की यात्रा को मात्र सार्क गृहमंत्री की बैठक तक सीमित रखा है। स्थापित कूटनीतिक परंपरा को दर किनार कर राजनाथ सिंह अपने पाकिस्तानी समकक्ष गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान से भी मुलाकात नहीं करेंगे। इस यात्रा के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच कोई अधिकृत संवाद भी नहीं होगा,। संक्षेप में भारत के गृहमंत्री इस्लामाबाद की यात्रा पर होते हुए भी पाकिस्तान में नही होंगे। इस्लामाबाद में वीरवार से सार्क के गृह मंत्रियों की बैठक हो रही है। इस बैठक में 9 और 10 नवंबर को इस्लामाबाद और मढी में होने वाले सार्क शिखर सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी । भारत दक्षिण एशिया के आठ देशों के इस अहम संगठन का नेतृत्व करता है और भारत की उपस्थिति के बगैर इस शिखर सम्मेलन का कोई महत्व नहीं है। भारत और पाकिस्तान के अतिरिक्त बांग्लादेश , श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, मालद्धीप और भूटान सार्क के सदस्य हैं। दरअसल, पाकिस्तान के आतंकी संगठनों को डर है कि राजनाथ सिंह सार्क की बैठक में पठानकोट हमले में हाफिज सईद और हिजबुल की नापाक हरकतों की चर्चा करेंगे और उनकी कलई खोलेंगे। जनवरी में पठानकोट हमले से लेकर कश्मीर में मौजूदा हिंसा और आतंक की घटनाओं के लिए हाफिज सईद और हिजबुल मुजाहीद्यीन प्रमुख सैयद सलाल्लुदीन गठजोड को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। दो दिन पहले हिजबुल मुजाहीद्यीन का एक प्रमुख आतंकी श्रीनगर में देखा गया था। गृहमंत्री राजनाथ सिंह की पाकिस्तानी यात्रा से भारत पाकिस्तान को कूटनीति पटखनी देने की स्थिति में है। मौजूदा कटु संबंधों के दृष्टिगत भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नवंबर सार्क सम्मेलन में शामिल होने का सवाल ही नहीं है। और अगर भारत के प्रधानमंत्री इस शिखर सम्मेलन में नहीं जाते हैं, तो पूरी दुनिया में पाकिस्तान की मिट्टी पलीत होना तय है।
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