उत्तर प्रदेश के बुलंदषहर मे मां-बेटी के साथ बलात्कार की घटना ने फिर देश को शर्मसार किया है। इस जघन्य कृत्य ने साबित कर दिया है कि देश के सबसे बडे राज्य उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है और राज्य में गुंडों और मव्वालियों का राज चलता है। वैसे भी समाजवादी पार्टी को लेकर जनमानस में यही धारणा है कि उसके राज में आपराधिक घटनाए बढ जाती हैं। शुक्रवार देर रात नोएडा से शाहजहांपुर में अपने पैतृक गांव जा रहे परिवार की कार टायर बुलंदशहर के निकट कार अचानक फट गया। कार में दो भाई, उनकी पत्नियां और 13 साल की बेटी और भतीजा समेत छह लोग सवार थे। कार रोककर वे जैसे ही टायर चैक करने लगे, बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। परिवार को बंधक बनाकर एक महिला और उसकी 13 साल की बेटी से 12 लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया और बाद में बदमाश गहने और नकदी लेकर शनिवार सुबह फरार हो गए। रविवार को इस घटना की खबर मीडिया में प्रसारित-प्रकाशित होते ही उत्तर प्रदेश सरकार जागी और एसएसपी समेत पूरा थाना निलंबित कर दिया गया। जिस जगह बदमाश दो महिलाओ की आबरु लूट रहे थे, उससे कुछ दूरी पर थाना स्थित था। राज्य के डीजीपी भी भागे-भागे बुलंदशहर पहुंचे और “ सांप निकल गया, लाठी पीटते रह गए“। बुलंदशहर से पहले हरियाणा में जाट आरक्षण के दौरान मुरथल मे महिलाओं की अस्मत लूटी गई थी। इस मामले में भी पुलिस -प्रशासन की निष्क्रियता उजागर हुई थी। थोडे समय तक मुरथल बलात्कार कांड सुर्खियों में छाया रहा मगर फिर सब कुछ शांत हो गया। हर बार यही होता है। जब कभी भी किसी महिला की अस्मत लूटी जाती है, पूरे देश में दो-चार दिन के लिए महिला की सुरक्षा को लेकर खूब शोर मचाया जाता है मगर फिर सब कुछ भुला दिया जाता है। गत वीरवार को राजधानी दिल्ली में 16 वर्षीय लडकी का सामूहिक बलात्कार किए जाने के बाद उसे जिंदा जला दिया गया। दिसंबर, 2012 में दिल्ली में एक मेडिकल छात्रा ( चर्चित निर्भय रेप कांड) से छह लोगों द्वारा नृशंष सामूहिक बलात्कार ने पूरे देश को हिला दिया था। सामूहिक बलात्कार की इस घटना में एक नाबालिग भी शामिल था मगर देश कानून इस तरह का है कि इस मामले के चार आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई, पांचवे ने जेल में खुदकुशी कर ली मगर छठा तब का नाबालिग तीन साल सुधार गृह में रहकर अब आजाद घूम रहा है। तब रेप को लेकर सख्त कानून बनाने की मांग भी उठी थी मगर राजनीतिक “निहित स्वार्थों“ में दबकर रह गई। आंकडों के अनुसार भारत में हर साल लगभग 25,000 महिलाओं की अस्मत लूटी जाती है। आंकडें यह भी बताते हैं कि बलात्कार के 60 फीसदी मामलों में नाबालिग संलिप्त होते हैं। इस बात के दृष्टिगत, स्पष्ट है कि 60 फीसदी बलात्कारी नाबालिग होने के कारण सख्त सजा से बच निकलते हैं। आंकडों से यह भी पता चलता है कि 50 फीसदी नाबालिग दोबारा बलात्कार का प्रयास करते हैं। महिलाओं का यौन शोषण भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की बडी समस्या है। सयुंक्त राष्ट्र संघ के 65 देशों में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया है कि हर साल इन देशों में 2,50,00 महिलाओं से जोर-जबरदस्ती करके यौन संबंध बनाए जाते हैं। पूरी दुनिया मे तो बलात्कार के मामले कहीं ज्यादा है। दक्षिण अफ्रीका में सबसे ज्यादा बलात्कार के मामले रिपोर्ट किए जाते है। इस मामले में अमेरिका और इंग्लैंड भारत से कहीं आगे है। मगर अमेरिका और इंग्लैंड की तुलना में भारत में बलात्कार के असली आंकडे कहीं ज्यादा हैं। अधिकांश मामले लोकलाज के कारण रिपोर्ट ही नहीं किए जाते हैं। बहरहाल, बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार कांड ने महिलाओं की सुरक्षा पर फिर प्रष्नचिंह खडा कर दिया है। आखिर, देश की बहू-बेटियों का कब तक इस तरह से नृशंष और अमानवीय यौन शोषण होता रहेगा।
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