ब्राजील की राजधानी रियो डी जेनेरिया में पांच अगस्त से शुरु हो रहे ओलंपिक से पहले रेसलर नरसिंह यादव और शॉटपुट (गोला फेंक) खिलाडी इन्द्रजीत सिंह के डोपिंग टेस्ट में फेल होने से भारत को तगडा झटका लगा है। हरियाणा से संबंधित इन्द्रजीत ने 2014 में एशियन खेलों में कांस्य पद जीता था। नरसिंह यादव ने 2010 की कॉमनवैल्थ गेम्स में 74 किलो भार वर्ग फ्री-स्टाइल में स्वर्ण पदक जीता था। ओलपिंक में भारत का रिकार्ड अच्छा नहीं रहा है और इस बार भी ज्यादा पदक जीतने की बहुत कम उम्मीद है। दोनों खिलाडियों पर प्रतिबंधित पदार्थ मेथानडिएनोने के सेवन का आरोप है। दोनों के शरीर में इस प्रतिबंधित प्रदार्थ के अंश पाए गए हैं। इससे भी अधिक दुखद बात यह है कि दोनों खिलाडियों ने कहा है कि उनके खिलाफ साजिश हुई है। रेसलर नरसिंह यादव का दूसरा डोपिंग टेस्ट भी फेल हो गया और उनके शरीर में फिर प्रतिबंधित प्रदार्थ के अंश मिले। इससे स्पष्ट है कि यादव ने प्रतिबंधित मेथानडिएनोन का सेवन किया था। विशेषज्ञों के मुताबिक मेथानडिएनोन के अंश कम-से-कम आठ सप्ताह तक शरीर में मौजूद रहते हैं और इस दौरान अगर डोपिंग टेस्ट किया जाता है, तो नतीजा बदलता नहीं है। मेथानडिएनोन एक उपजय (एनाबोलिक) स्टेराइड है और एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड का रासायनिक संषोधित संस्करण है। यह स्टेरॉयड बाल्डी बिल्डरों में काफी प्रचलित है। नरसिहं यादव अब तक कहते रहें हैं कि उनके खिलाफ साजिश हुई है। उन्होंने कभी स्टेरॉयड लिया ही नहीं। रेसलिंग फेडेरेशन ऑफ इंडिया भी उनके बचाव में आ गई है। सोनीपत स्थित स्पोर्टस अथॉरिटी में इंडिया (साई) परिसर में जिस युवक ने उनके खाने में मिलावट की थी, उसकी पहचान भी हो गई है। इससे लग रहा है कि यादव डोपिंग के डंक से बच सकते हैं। वीरवार को नाडा के एंटी डोपिंग अनुशासन समिति के समक्ष वकीलों के साथ अपना पक्ष रखते समय उन्होंने माना कि डोपिंग हुई है मगर यह अनजाने में हुई। इसी तरह शॉटपुटर इंद्रजीत सिंह भी यही कह रहे हैं कि वे साजिश का शिकार हुए हैं। हर खिलाडी डोपिंग के बाद यही कहता है मगर नाडा को इन सब बातों से कोई सरोकार नहीं है। फिलहाल, स्थिति यह है को नरसिंह यादव रियो से बाहर हैं और उनकी जगह प्रवीण राणा को नामित किया गया है। सवाल यह है कि खिलाडी डोपिंग टेस्ट से पहले प्रतिबंधित स्टेरॉयड का सेवन करते ही क्यों हैं? जबकि वे यह बात भली-भांति जानते हैं कि ऐसा करने से उन पर प्रतिबंध लग सकता है। खिलाडी इस सच्चाई से भी वाकिफ हैं कि मेथानडिएनोन जैसे आधुनिक स्टेरॉयड का शरीर में लंबे समय ( 8 से 11 सप्ताह) तक रहता है और इस स्थिति में वे डोपिंग के डंक से बच नहीं सकते। रेसलर नरसिंह यादव और इन्द्रजीत सिंह के स्पष्टीकरण में वजन है कि डोपिंग टेस्ट से पहले भला कोई खिलाडी स्टेरॉयड क्यों लेगा़? जाहिर है, पूरे मामले की दाल में कुछ-न-कुछ काला जरुर है। और अगर नरसिंह राव अथवा इन्द्रजीत सिंह के खिलाफ साजिश हुई है तो देष के लिए यह शर्म की बात है। यादव के मामले में शक की सुई रेसलर सुशील कुमार की ओर उठ रही है। सुशील कुमार और नरसिंह ओलंपिक में भाग लेने के लिए अपने-अपने दावे को लेकर अदालत तक जा चुके हैं और फैसला यादव के पक्ष में रहा है। भारत रियो ओलंपिक में अब तक का सबसे बडा 121 एथलीटसं का दल भेज रहा है मगर भारतीय खिलाडी मैडल ला पाएंगे, ऐसी उम्मीद काफी कम है। सुशील कुमार मैडल विनर हो सकते थे मगर वे अदालती लडाई हार गए। भारत ने पहली बार 2012 के लंदन ओलंपिक में सबसे ज्यादा 6 (दो रजत और चार कांस्य) पदक जीते थे। बींजिग ओलंपिक में भारत ने तीन पदक जीते थे। रियो की शुरुआत अच्छी नहीं रही है।
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