बुधवार, 6 जुलाई 2016

इतिहास से सबक लें

आम आदमी पार्टी के साथ इन दिनों सब कुछ बुरा ही हो रहा है। एक रोज आप  के विधायक को महिला से बदसलूकी के लिए गिरफ्तार कर लिया जाता है, जैसे पूरे देश  में ऐसा करने वाले वह एकमात्र नेता हैं। अगले दिन आप के विधायक पर पंजाब के एक कस्बे में कुरान की बेअदबी के लिए मामला दर्ज  किया जाता है। इस घटना की स्याही सूखी भी नहीं थी कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव वरिष्ठ  आईएएस अधिकारी राजेन्द्र कुमार को पचास करोड के कथित घपले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार कर लिया जाता है। कुमार के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए सीबीआई पिछले साल दिसंबर में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके दफ्तर को भी खंगाल चुकी है। इस पर भी खासा हंगामा हुआ था। इस पर सीबीआई की विशेष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ न्यायालय की अवमानना चलाने का संदर्भ भी भेजा था। अदालत ने तब सीबीआई को इस बात के लिए फटकार लगाई थी कि जांच एजेंसी कानून के दायरे में काम नहीं कर रही है। सीबीआई अदालत में कुमार के खिलाफ घूसखोरी का एक भी सबूत पेश  नहीं कर पाई थी। पूरी दुनिया जानती है कि सीबीआई पिंजरे में कैद सरकारी तोता है और यह एजेंसी वही करती है, जो उसे करने के लिए कहा जाता है। यही सीबीआई हिमाचल प्रदेश  मे मुख्यमंत्री का सरकारी और निजी निवास भी खंगाल चुकी है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत पाने के बाद अब आम आदमी पार्टी ने पंजाब का रुख किया है। लोकसभा चुनाव में आप ने पंजाब में तेरह मेंसे चार सीटें जीती थी जबकि पूरे देश  में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। पंजाब में जनवरी-फरवरी 2017 में विधानसभा चुनाव होने है। आम आदमी पार्टी पंजाब में सत्तारूढ  शिरोमणि अकाली दल-भाजपा  गठबंधन को कडी चुनौती पेश  कर रही है और यही बात मोदी सरकार पचा नहीं पा रही है। पिछले दस साल से पंजाब में  शिअद-भाजपा गठबंधन सत्ता में है। इस स्थिति के दृष्टिगत  सत्तारूढ  गठबंधन के खिलाफ एंटी इंकूबेंसी फेक्टर सक्रिय हो सकता है। इससे आप को फायदा हो सकता है। पंजाब में काग्रेस भी लंबे समय तक सत्ता में रही है। इसलिए मतदाता विकल्प की तलाश  में है। इसी बात से भयभीत  सत्तारूढ  गठबंधन और कांग्रेस दोनों के आक्रमण का केन्द्रबिंदु आम आदमी पार्टी है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार का परफॉरमेंस अपेक्षाकृत बेहतर रही है। आम आदमी को मुफ्त में पानी मिल रहा है और आधे दाम पर बिजली। पेयजल के संकट से काफी हद तक निजात मिली है। घूसखोरी भी  काफी कम हुआ है। पंजाब में  शिरोमणि अकाली दल-भाजपा  गठबंधन के करप्ट  शासन से जनता आजिज आ चुकी है। भ्रष्टाचार   मुक्त शासन आम आदमी पार्टी का सबसे बडा चुनावी वायदा है। कहते हैं कि साफ छवि ईमानदार आदमी की दुखदी रग होती है। ईमानदार को बेइमान साबित कर दो वह कहीं का नहीं रहेगा। अरविंद केजरीवाल को तो भ्रष्टाचार में फंसा नहीं सकते, इसलिए उनके प्रधान सचिव को ही धर लिया गया। सौ बार झूठ बोला जाए तो अन्तोगत्वा वह सच मान लिया जाता है।  मोदी सरकार ने भी यही रणनीति अपनाई है।  राजेन्द्र कुमार की गिरफ्तारी से  जनता में यह संदेश  तो गया ही है कि अरविंद केजरीवाल भी दूध के धुले नहीं है।  केजरीवाल की तरह राजेन्द्र कुमार भी आईआईटी के पूर्व  छात्र हैं और इसी वजह मुख्यमंत्री ने उन्हें अपना प्रधान सचिव चुना था। कुमार दोषी  हैं या नहीं, इस बात का फैसला अदालत करेगी।  मगर एक सच्चाई यह भी है कि कलियुग में भी अंत में हमेशा  सच्चाई की जीत होती है। भाजपा के नई पीढी के नेता भले ही न जानते हों मगर वयोवृद्ध नेता यह बात भली-भांति जानते हैं कि आपतकाल में इंदिरा गांधी सरकार ने भी यही किया था जो मोदी सरकार अब कर रही है। नेताओं को झूठे मामलों में फंसाकर कुछ भी हासिल नहीं होता है। जनता सब जानती है और  समय आने पर दंडित भी करती है। भाजपा को दिल्ली विधानसभा चुनाव की शर्मनाक पराजय से कुछ तो सबक लेना चाहिए।