प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल से कुछ को बाहर करके और नए एवं युवाओं को शामिल करके “एक तीर से कई निशाने“ साधे हैं। प्रधानमंत्री ने फेरबदल से पहले कहा था कि वे मंत्रिमंडल का विस्तार कर रहे हैं, फेरबदल नहीं। मगर उन्होंने भारी फेरबदल किया। पांच मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। 19 नए चेहरे शामिल किए गए हैं और सब-के-सब अनजान चेहरे हैं। “विवादों की रानी“ और पार्टी कौ पोस्टर गर्ल मानी जाने वाली स्मृति ईरानी से मानव संसाधन मंत्रालय छीन लिया गया है और उन्हें गैर-महत्वपूर्ण कपडा उधोग (टेक्स्टाइल) मंत्रालय में भेजा गया है। भाजपा में “मिस्टर संयत और कूल“ प्रकाश जावेडकर को मानव संसाधन मंत्रालय सौंपा गया है। स्मृति ईरानी शिक्षा का भगवाकरण करने में काफी सुस्त रही हैं। भाजपा की जननी राष्ट्रीय स्वंय सेवक को भगवाकरण की जल्दी है। स्मृति की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी अक्सर सवाल उठाए जाते रहे हैं। मानव संसाधन मंत्रालय के तहत यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन, सेंट्रल यूनिवर्सिटीज जैसे कई बड़े और प्रतिष्ठित संस्थान आते हैं। जाहिर है इस मंत्रालय को उच्च शिक्षित और अनुभवी मंत्री की दरकार है। स्मृति ईरानी कुछ ज्यादा ही जोश दिखा रही थी और अक्सर विवादों में उलझी रहती थीं। बहरहाल, प्रकाश जावेडकर शिक्षा के भगवाकरण में तेजी ला सकते हैं। पार्टी के वयोवृद्ध नेता यशवंत सिंहा के पुत्र जयंत सिन्हा को वित्त मंत्रालय से बाहर करके मोदी ने सीनियर सिन्हा के पर कतरे हैं। यशवंत सिन्हा पिछले कुछ समय स बागी तेवर अपनाए हुए हैं। सबसे ज्यादा आश्चर्य अपना दल की बागी नेता अनुप्रिया पटेल को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर हुआ है। मोदी ने ताकतवर सहयोगी दल शिवसेना और अकाली दल को दरकिनार कर कम वजनदार अपना दल को ज्यादा तरजीह दी है । साफ है पंजाब की जगह उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए कहीं ज्यादा अहम है । अनुप्रिया उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से पहली बार अपना दल की सांसद बनी हैं। भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना दल से गठबंधन कर रखा था। लोकसभा चुनाव के बाद पिछले साल अनुप्रिया पटेल को उनकी माताश्री और पार्टी की संचालक कृष्णा पटेल ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए अपना दल से निष्कासित कर दिया था। इससे पार्टी दो फाड हो गई मगर पार्टी का बडा तबका कृष्णा पटेल के साथ ही रहा। 2009 में अपना दल के संस्थापक और अनुप्रिया पटेल के पिता का सडक दुर्घटना में निधन हो जाने के बाद मां-बेटी पार्टी को चला रही थी। अनुप्रिया को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने हालांकि “माताश्री“ कृष्णा पटेल की नाराजगी मोल ले ली है मगर यही भाजपा की रणनीति भी है। अनुप्रिया युवा हैं और तेज-तर्रार भी। वे कुर्मी समुदाय से हैं और इस समुदाय का बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीति में खासा वर्चस्व है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार भी कुर्मी समुदाय से हैं और भाजपा को नीतिश को चुनौती देने के लिए एक युवा चेहरे की दरकार थी। अनुप्रिया में भाजपा यह संभावना तलाश रही है। देर-सबेर अनुप्रिया का भाजपा में शामिल होना तय है। प्रधानमंत्री ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को सामने रखकर नए चेहरे शामिल किए हैं। 2017 के शुरू में उत्तर प्रदेश , पंजाब और उत्तराखंड के चुनाव होने हैं और साल के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश के। इसीलिए उत्तर प्रदेश को खासी तरजीह दी गई है और जातीय समीकरण का खास ख्याल रखा गया है। लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी स्पष्ट बहुमत हासिल करने के प्रति आशान्वित है। मंत्रिमंडल फेरबदल से पहले प्रधानमंत्री ने बाकायदा हर मंत्री के कामकाज का जायजा लिया। कुछ चेहरों को बाहर निकालने और कुछ के विभाग बदलने की यह सोची-समझी रणनीति थी। कुल मिलाकर मंत्रिमंडल फेरबदल से मोदी ने पार्टी के भीतर राजनीतिक समीकरण को नई दिशा दी है। मंत्रियों को भी स्पष्ट संदेश दिया गया है कि जिनकी परफॉरमेंस संतोषजनक नहीं होगी, उन्हें इसका खमियाजा भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
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