रविवार, 10 जुलाई 2016

अब पारित हो जाएगा जीएसटी बिल



लंबे समय से राज्य सभा की धूल चाट रहे गुडस एंड सर्विसिस बिल (जीएसटी) को अब हर हाल में पारित हो जाना चाहिए। और संभावना यही है कि मॉनसून सत्र में यह बिल राज्यसभा से पारित हो जाएगा। देश  इस वजह से पहले ही काफी नुकसान झेल चुका है और इसके लिए कांग्रेस की खामख्वाह की जिद्द जिम्मेदार है। देश  हित से जुडे अहम मामलों को  सियासी हितों के लिए नहीं भुनाया जाना चाहिए, यह बात देश  की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी से ज्यादा और कौन जानता है?  देश  को फिरंगियों के शासन से आजाद कराने में  काग्रेस पार्टी की अहम भूमिका रही है और पार्टी इस पर अक्सर इतराती भी रहती है। पर अब कांग्रेस यह बात कैसे भूल गई है कि जीएसटी जैसे अहम बिल को संसद में पारित होने से रोकना और इसकी राह में रोडे अटकाना कतई राष्ट्रहित  में नहीं है। इससे सत्तारूढ भाजपा का कोई नुकसान नहीं हुआ है। अगर नुकसान हुआ है तो देश  की अर्थव्यवस्था का। जीएसटी से पूरे देश  में एक समान कर व्यवस्था लागू होनी है और इससे सकल घरेलू उत्पादन में डेढ से दो फीसदी का इजाफा हो सकता है। जनमानस सवाल कर सकता है कि जीएसटी को राज्यसभा से पारित नहीं होने देने से देश  को इतना बडा नुकसान कराकर   काग्रेस को क्या मिला? कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाल के अनुसार पार्टी जीएसटी का विरोध नहीं कर रही है क्योंकि इस बिल की परिकल्पना कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने ही की थी। मगर कांग्रेस  की इस बात में कोई दम नहीं है। लोकसभा मई, 2015 में इस बिल को ध्वनि मत से पारित कर चुकी है। तब कांग्रेस ने बिल पर सरकार का समर्थन करने की बजाय सदन का ही बॉयकॉट  कर दिया था। यह विरोध ही तो था। इसके बाद से बिल राज्यसभा में अटका पडा है। राज्यसभा में  बिल को पारित करवाने के लिए मोदी सरकार के पास अब तक आवश्यवक  बहुमत नहीं था। इस बिल को राज्यसभा से पारित कराने के लिए मोदी सरकार को कांग्रेस के समर्थन की जरुरत थी मगर पार्टी ने ऐडी-चोटी का जोर लगाकर इसे पारित नहीं होने दिया। अब जबकि ताजा हालात में कांग्रेस को लग रहा है कि जीएसटी बिल संसद के मॉनसून सत्र में पारित हो जाएगा, पार्टी के सुर बदल गए हैं। बहरहाल, कांग्रेस अब अगर राज्यसभा में सरकार का समर्थन न भी करे, तो भी जीएसटी बिल आसानी से पारित हो सकता है। हाल ही में सपन्न राज्यसभा चुनाव की 58 सीटों मेंसे भाजपा नीत राजग ने 23 सीटों पर विजय प्राप्त की है और इस गठबंधन को 12 सीटों का फायदा हुआ है और कांग्रेस को 6 का नुकसान। इस स्थिति में क्षेत्रीय दलों के सहयोग से सरकार जीएसटी बिल को राज्यसभा में आसानी से पारित करवा सकती है। कांग्रेस के लिए यही बेहतर होगा कि अपनी बची-खुची लाज बचाने की खातिर पार्टी जीएसटी बिल पर सरकार से सहयोग करे। एक अप्रैल, 2016 से तो जीएसटी लागू नहीं हो सका, अब कम-से-कम अगले साल से तो हर हाल में इसे लागू हो जाना चाहिए। संवैधानिक संशोधन बिल होने की वजह से इसे संसद के दो-तिहाई बहुमत के अलावा  कम-से-कम पचास फीसदी विधानसभाओं द्वारा पारित करना भी अनिवार्य है। इसके बाद ही इस बिल को राष्ट्रपति  की सहमति मिल सकती है ओर यह कानून बन सकता है। इस प्रकिया में कुछ समय लग सकता है। बहरहाल, जीएसटी के लागू होने से पूरे देश  में अलग-अलग कर की जगह एक समान एक ही कर लागू होगा। इस समय कुल मिलाकर सोलह कर लगाए जाते हैं और इससे न केवल गुडस और सर्विसिस महंगी हो जाती हैं, अलबत्ता व्यापारियों और उत्पादकों को सौ तरह की औपचारिकताओं से निपटना पडता है। जीएसटी के तहत जीरो रेंटिग (इनपुट शुल्क में राहत) और ज्यादा प्रभावी हो जाएगी। बहुकर और बहु रिटर्न फाइलिंग खत्म हो जाएगी और कर व्यवस्था पारदर्शी  बन जाएगी। और भी कई फायदें होंगे जिससे देश  में उत्पादन बढेगा। इससे सरकार का राजस्व भी बढेगा। कुछ राज्यों की यह आशंका निर्मूल है कि जीएसटी से राज्य की वित्तीय स्वायतता कम होगी। वित्तीय स्वायतता कर लगाने से नहीं, बल्कि आय बढने से मिलती है। जीएसटी के प्रभावी होने पर हर राज्य को ज्यादा राजस्व मिलेगा।