अठारह साल तक अदालतों के चक्कर काटने के बाद आखिर बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान हिरण शिकार के आरोपों से बरी हो ही गए। राजस्थान हाई कोर्ट ने सोमवार को उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया है। कहते हैं “रोग और अभियोग“ बडों-बडों को भी पस्त कर देता है। 1998 में फिल्म “हम साथ-साथ हैं“ की शूटिंग के दौरान जोधपुर स्थित घोडा फार्म हाउस और भवाद गांव में सलमान खान पर काले हिरण के शिकार करने के आरोप थे और दो मामलों में वे प्रमुख आरोपी थे। अधीनस्थ अदालत ने इन मामलों में सलमान खान को क्रमषं पांच साल और एक साल की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध सलमान खान ने राजस्थान हाई कोर्ट में अपील कर रखी थी। न्यायालय ने सुनवाई पूरी करते हुए इस साल 16 मार्च और 13 मई को फैसला सुरक्षित रखा था। सोमवार को न्यायालय ने सलमान खान को दोनों मामलो में दोषमुक्त कर दिया। सलमान खान पर अभी भी कांकाणी हिरण शिकार और अवैध रुप से हथियार रखने का मामला चल रहा है। सलमान खान का अदालती संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। बिश्नोई समाज ने इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का ऐलान किया है। काला हिरण इस समाज के लिए गाय की तरह पूजनीय हे ओर बिश्नोई महिलाएं उन्हें अपना दूध तक पिलाती हैं । सलमान खान को हाई कोर्ट से यह दूसरी बडी राहत है। इससे पहले बंबई हाई कोर्ट ने सलमान खान को 2002 के चर्चित “हिट एंड रन” मामले में भी बरी कर दिया था जबकि सेशन कोर्ट ने इस मामले में उन्हें पांच साल की कैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में सलमान खान पर सितंबर 27, 2002 को देर रात शराब के नशे में अपनी टोयटा लैंड क्रूजर कार से एक आदमी को कुचलने और चार अन्य को गंभीर रुप से घायल करने के आरोप थे। 15 दिसंबर, 2015 को सुनाए गए फैसले में बंबई हाई कोर्ट (मुंबई स्थित हाई कोर्ट को अभी भी बंबई हाई कोर्ट ही कहा जाता है) ने सलमान खान को सभी आरोपों से बरी कर दिया। महाराष्ट्र सरकार तक ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में “विकृत“ बताया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है। इसी माह (पांच जुलाई को) सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। बहरहाल, ताजा फैसले ने आम आदमी की इस धारणा को फिर बलवित कर दिया है कि रसूखदार और बडे लोग कानूनी पेचदगियों का फायदा उठाकर अक्सर बच निकलते हैं और गरीब निर्दोष होते हुए भी फंस जाता है। बुंबई हाई कोर्ट के फेसले पर भी सोशल मीडिया में कडी प्रतिकिताएं व्यक्त की गईं थी और आशंका जाहिर की गई थी कि सलमान खान का रुतबा और पैसा उन्हें बचाने में कामयाब हो रहा है। ताजा फैसले पर भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं आ रही है। दरअसल, भारत में कानून आज भी आम आदमी के जरा भी पक्ष में नही है। अदालतें दलीलों और वकीलों से चलती हैं और इस बिला पर फैसले भी सुनाए जाते हैं। सलमान खान के मामले में भी यही कहा जा सकता है। दोनो मामलों में देश के नामी गिरामी वकील उनके मुकदमे लड रहे हैं और वादी इस मामले में उनकी बराबरी कर ही नहीं सकते। अदालतें सबूतों पर फैसले सुनाती हैं और वकील यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि सबूतों को नष्ट करके आसानी से खूनी को भी निर्दोष साबित किया जा सकता है। राजस्थान के हिरण शिकार मामले में बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में साबित कर दिया कि इस घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। सलमान खान के वकीलों ने न्यायालय में यह भी साबित कर दिया कि सलमान खान की एयरगन से काले हिरण का शिकार नहीं किया जा सकता। सलमान के वकीलों ने और भी कई दलीलें दी जिन्हें अदालत ने मान लिया। अक्सर पाया गया हे कि न्यायालय में सरकारी वकील रसूखदार अभियुक्तों के वकीलों के आगे बौने साबित होते हैं। अब तक यही होता रहा है।
बुधवार, 27 जुलाई 2016
अरे भाई यह कैसा न्याय !
Posted on 8:08 pm by mnfaindia.blogspot.com/
अठारह साल तक अदालतों के चक्कर काटने के बाद आखिर बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान हिरण शिकार के आरोपों से बरी हो ही गए। राजस्थान हाई कोर्ट ने सोमवार को उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया है। कहते हैं “रोग और अभियोग“ बडों-बडों को भी पस्त कर देता है। 1998 में फिल्म “हम साथ-साथ हैं“ की शूटिंग के दौरान जोधपुर स्थित घोडा फार्म हाउस और भवाद गांव में सलमान खान पर काले हिरण के शिकार करने के आरोप थे और दो मामलों में वे प्रमुख आरोपी थे। अधीनस्थ अदालत ने इन मामलों में सलमान खान को क्रमषं पांच साल और एक साल की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध सलमान खान ने राजस्थान हाई कोर्ट में अपील कर रखी थी। न्यायालय ने सुनवाई पूरी करते हुए इस साल 16 मार्च और 13 मई को फैसला सुरक्षित रखा था। सोमवार को न्यायालय ने सलमान खान को दोनों मामलो में दोषमुक्त कर दिया। सलमान खान पर अभी भी कांकाणी हिरण शिकार और अवैध रुप से हथियार रखने का मामला चल रहा है। सलमान खान का अदालती संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। बिश्नोई समाज ने इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का ऐलान किया है। काला हिरण इस समाज के लिए गाय की तरह पूजनीय हे ओर बिश्नोई महिलाएं उन्हें अपना दूध तक पिलाती हैं । सलमान खान को हाई कोर्ट से यह दूसरी बडी राहत है। इससे पहले बंबई हाई कोर्ट ने सलमान खान को 2002 के चर्चित “हिट एंड रन” मामले में भी बरी कर दिया था जबकि सेशन कोर्ट ने इस मामले में उन्हें पांच साल की कैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में सलमान खान पर सितंबर 27, 2002 को देर रात शराब के नशे में अपनी टोयटा लैंड क्रूजर कार से एक आदमी को कुचलने और चार अन्य को गंभीर रुप से घायल करने के आरोप थे। 15 दिसंबर, 2015 को सुनाए गए फैसले में बंबई हाई कोर्ट (मुंबई स्थित हाई कोर्ट को अभी भी बंबई हाई कोर्ट ही कहा जाता है) ने सलमान खान को सभी आरोपों से बरी कर दिया। महाराष्ट्र सरकार तक ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में “विकृत“ बताया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है। इसी माह (पांच जुलाई को) सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। बहरहाल, ताजा फैसले ने आम आदमी की इस धारणा को फिर बलवित कर दिया है कि रसूखदार और बडे लोग कानूनी पेचदगियों का फायदा उठाकर अक्सर बच निकलते हैं और गरीब निर्दोष होते हुए भी फंस जाता है। बुंबई हाई कोर्ट के फेसले पर भी सोशल मीडिया में कडी प्रतिकिताएं व्यक्त की गईं थी और आशंका जाहिर की गई थी कि सलमान खान का रुतबा और पैसा उन्हें बचाने में कामयाब हो रहा है। ताजा फैसले पर भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं आ रही है। दरअसल, भारत में कानून आज भी आम आदमी के जरा भी पक्ष में नही है। अदालतें दलीलों और वकीलों से चलती हैं और इस बिला पर फैसले भी सुनाए जाते हैं। सलमान खान के मामले में भी यही कहा जा सकता है। दोनो मामलों में देश के नामी गिरामी वकील उनके मुकदमे लड रहे हैं और वादी इस मामले में उनकी बराबरी कर ही नहीं सकते। अदालतें सबूतों पर फैसले सुनाती हैं और वकील यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि सबूतों को नष्ट करके आसानी से खूनी को भी निर्दोष साबित किया जा सकता है। राजस्थान के हिरण शिकार मामले में बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में साबित कर दिया कि इस घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। सलमान खान के वकीलों ने न्यायालय में यह भी साबित कर दिया कि सलमान खान की एयरगन से काले हिरण का शिकार नहीं किया जा सकता। सलमान के वकीलों ने और भी कई दलीलें दी जिन्हें अदालत ने मान लिया। अक्सर पाया गया हे कि न्यायालय में सरकारी वकील रसूखदार अभियुक्तों के वकीलों के आगे बौने साबित होते हैं। अब तक यही होता रहा है।






