बुधवार, 29 जून 2016

भला यह भी कोई उम्र है सन्यास लेने की !

 समकालीन दुनिया में फुटबाल के बेहतरीन खिलाडी लियोनेल मेसी का महज 29 साल की उमर में सन्यास लेना खेल प्रेमियों को खटक रहा है। भला यह भी कोई उमर है सन्यास लेने की ! मेसी अभी अपने केरियर की बुलंदियों पर थे। अर्जेटीनी खिलाडी लियोनेल मेसी, पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो और ब्राजील के नेमार डी सिल्वा सैंटोस जूनियर (नेमार के नाम से मशहूर) इस समय दुनिया के तीन सर्वश्रेष्ठ  फुटबाल खिलाडी माने जाते हैं और तीनों की कोई सानी नहीं रखता है। मेसी की सानी करना तो फिलहाल बेहद मुश्किल  है। वे दुनिया के एकमात्र ऐसे खिलाडी हैं, जिन्होंने लगातार सात सीजन में 40 से ज्यादा गोल किए हैं। मेसी पांच बार फीफा बैलोन डी”या अवार्ड जीत चुके हैं। और  24 साल 6 महीने की आयु में तीन बार  फीफा बैलोन डी”या अवार्ड जीतने वाले एकमात्र युवातम  खिलाडी हैं। 2012 में  91 गोल दाग कर मेसी ने नया गिनीज विश्व  रिकॉर्ड स्थापित किया था।  फीफा के प्रो वर्ल्ड- इलेवन में (2007-2015) मेसी नौ बार नामित हो चुके हैं। क्रिस्टियानो रोनाल्डो दूसरे ऐसे खिलाडी हैं जो नौ बार  प्रो वर्ल्ड- इलेवन में चयनित किए जा चुके हैं। मेसी दुनिया के एकमात्र ऐसे खिलाडी हैं जिन्होंने प्रोफेशनल लीग मेचों में हर टीम के खिलाफ लगातार गोल दागे हैं। 27 साल की उमर में  यूरोपियन क्लब के लिए चार सौ गोल दागने वाले वे युवातम खिलाडी हैं।  मेसी ने और भी कई रिकार्ड बनाए हैं और लिस्ट बहुत लंबी है। वे दुनिया के दूसरे सबसे अमीर खिलाडी हैं और सालाना 543 करोड रु कमाते हैं।  मेसी ने एकाएक सन्यास क्यों लिया? क्या वे कोपा अमेरिका में लगतार दूसरी बार पेनल्टी शूट  आउट मिस करने पर बेहद निराश  थे या अर्जेटीना के लगातार तीसरी बार कोपा फाइनल हारने से। कोपा अमेरिका के फाइनल में चिली के खिलाफ  पेनल्टी शूट  में मेसी की चूक के कारण अर्जेटीना को  हार का सामना करना पडा हालांकि एक और खिलाडी भी पैनल्टी  शूटटआउट चूक गया था। मगर मेसी जैसे महानतम खिलाडी से इस तरह की चूक की उम्मीद नहीं की जा सकती। पिछले साल भी मेसी पेनल्टी शूटआउट  चूक गए थे और अर्जेटीना फाइनल में चिली से हार गया था। मेसी सरीखे दिग्गज खिलाडी की मौजूदगी के बावजूद अर्जेटीना कोपा अमेरिका में पिछले तीन साल से लगातार फाइनल में हार रहा है। 2014 में अर्जेटीना जर्मनी से हारा।  2015 और अब 2016 में चिली से।  2008 में मेसी ने अर्जेटीना को ओलंपिक में गोल्ड मेडल दिलवाया था। इसले अलावा  अर्जेटीना विगत 23 साल से  कोई भी बडा खिताब नहीं जीत पाया है। टीम ने अंतिम बार 1993 में कोपा कप जीता था। संभवतय, बार-बार की चूक और टीम की फाइनल में हार की वजह से मेसी निराश  हो गए थे। ओलंपिक में जगह नहीं मिलने से भी मेसी निराश  थे। मेसी ने यह कह कर स्वीकारा भी कि वे चार बार अर्जेटीना के लिए बडे टूर्नामेंट  खेल चुके हैं मगर हर बार हार का सामना करना पडा। इस बार कोपा अमेरिका में चिली से हारने पर मेसी काफी व्यथित थे। खेल प्रतियोगिताओं में हार-जीत का क्रम चलता रहता है और इससे किसी खिलाडी की प्रतिभा कम नहीं हो जाती। वस्तुतः, खेल प्रतियोगिता खिलाडी को गिरकर उठने और फिर आगे बढकर प्रतिद्धंद्धी का डटकर मुकाबला करने की सीख देती है। मेसी का अंतरराष्ट्रीय  खेलों से सन्यास लेने से फुटबाल जगत एक प्रतिभावान खिलाडी से महरुम हो जाएगा। अभी उनमें काफी प्रतिभा थी और वे कम-से-कम तीन-चार साल और खेल सकते थे। मेसी के साथ ही इस बार यूरो कप से स्वीडन के बेहतरीन खिलाडी ज्लाटन इब्राहिमोविच ने भी सन्यास ले लिया है मगर वे 35 साल के हैं और यही अंतरराष्ट्रीय  प्रतियोगिता से सन्यास लेने का सही समय है। मेसी अपेक्षाकृत अभी युवा हैं और यह उमर सन्यास लेने की नहीं होती। फुटबाल प्रेमी लंबे समय तक सफेद-आसमानी रंग की जर्सी में मेसी के जलवे को मिस करते रहेंगे।