हिल गई दुनिया
अमेरिका समेत बडी न्यूक्लिर ताकतें अपनी पहुंच और सैन्य शक्ति की कितनी भी शेघी बघार लें, पर दुनिया के खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने फिर उन्हें हिलाकर रख दिया है। अमेरिका के फ्लोरिडा प्रांत के ओरलेंडों शहर में समलैंगिक नाइटक्लब में इस्लामिक स्टेट से संबंध हमलावर ने देखते-देखते 50 लोगों का नरसंहार कर डाला और 53 को गंभीर रुप से जख्मी कर दिया। हमलावर चार घंटे तक मौत का तांडव करता रहा। ओरलेंडों पुलिस को घटनास्थल तक पहुंचने में चार घंटे लग गए। अमेरिका के इतिहास में 9/11 के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के बाद यह दूसरा बडा घातक हमला था । इस हमले ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। रुस से लेकर ब्राजील तक और इग्लैंड और यूरोप से लेकर अफ्गानिस्तान और पाकिस्तान तक हर देश मे इस नृशंष कृत्य की भर्त्सना की जा रही है। इस्लामिक स्टेट हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इतरा रहा है। हाल ही में इस्लामिक स्टेट से जुडी एक हैकर साइट पर आईएस ने 8,318 नामों की किल (मार गिराओ) लिस्ट जारी की थी जिसमें 8000 अमेरिकियों को भी “टारगेट“ बताया गया था। इससे पहले मार्च माह में आईएस ने 39 पेज की सूची जारी की थी जिसमें न्यू जर्सी के कई सीनियर पुलिस अधिकारियों का नाम था। अब तक यही माना जा रहा था कि इस्लामिक स्टेट अपना खौफ फैलाने के लिए यह सब कर रहा है मगर पहले पेरिस, फिर बेल्जियम और यूरोपियन यूनियन की राजधानी ब्रसल्स और अब अमेरिका के ओरलेंडो हमलों ने जता दिया है कि इस्लमिक स्टेट से जुडे आतंकी दुनिया में मौत का तांडव करने पर आमादा है। फ्रांस, बेल्जियम और अमेरिका के हमलों में सबसे बडी समानता यह है कि हमलावर स्थानीय थे। और यही स्थिति अमेरिका और यूरोप के लिए खतरनाक है। अमेरिका और यूरोप बहु नस्लीय (मल्टी-रेसियल) समाज हैं और इन देशों के रूढिवादी (कंजरवेटिव) इस नीति का मुखर विरोध भी कर रहे हैं। इस सच्चाई के चलते अमेरिका, फ्रांस और आस्ट्रिया में रूढिवादी राजनीतिक दल अथवा विचारधारा उतरोत्तर प्रगतिशील दलों पर भारी पडते जा रहे हैं। फ्रांस में मरीन ली पेन और उनकी कंजरवेटिव पार्टी नेशनल फ्रंट राष्ट्रपति फ्रांकोइस ओलांदे की सोशलिस्ट पार्टी पर भारी पडती जा रही है। हाल ही में कराए गए सर्वे में बताया गया है कि ली पेन तेजी से लोकप्रियता में आगे बढ रही है और 2017 को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारुढ दल सोशलिस्ट पार्टी को कडी चुनौती पेश कर सकती है। आस्ट्रिया में इस साल मई में सपन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव में ग्रीन समर्थित निर्दलीय अलेक्जेंडर वान डेर बमुश्किल अति दक्षिणपंथी नॉर्बर्ट हॉफर को हरा पाए । और अब अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर है। ग्रांड ओल्ड (जीओपी) रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप डेमोक्रटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को कडी चुनौती दे रहे हैं। अमेरिका में नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। ट्रंप ने अपने प्राइमरी चुनाव के दौरान मुसलमानों के खिलाफ आग उगली है और वे बार-बार कह रहे हैं कि अमेरिका में आतंक फैलाने में स्थानीय मुसलमानों का बहुत बडा हाथ है। इस बात को लेकर ट्रंप श्वेतों से मुसलमानों की अमेरिका में एंट्री पर प्रतिबंध लगाने का वायदा भी कर चुके हैं। ओरलेंडो हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप का मुस्लिम विरोध और तल्ख हो गया है और उन्होंने बराक ओबामा को भी इस बात के लिए आडे हाथ लिया है कि राष्ट्रपति ने मुसलमानों को दोषी नहीं ठहराया। ट्रंप के मुस्लिम विरोधी स्टैंड के कारण अमेरिका में मुसलमानों के खिलाफ नस्लीय हिंसा में खासा इजाफा हुआ हैं। जार्जटाउन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर क्रिस्चियन एंड मुस्लिम अंडरस्टैडिंग के अध्ययन मुताबिक 2015 में ट्रंप के रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी दौड में शामिल होते ही मुसलमानों के प्रति नस्लीय अपराधों में 20 से 30 फीसदी का इजाफा हुआ है । अकेले दिसंबर 2015 में मुसलमानों पर 53 हमले हुए हैं। 2015 में 12 हत्याओं के साथ मुसलमानों पर 174 हमले हुए थे। अमेरिकी समाज भारत की अपेक्षा ज्यादा सहिष्णु माना जाता है मगर जिस तरह भारत में भगवा पार्टी के नेताओं की मुस्लिम विरोधी बातों से देश में असहिष्णुता बढी है, उसी तरह ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव में उतरने और उनकी मुस्लिम विरोधी बातों से अमेरिकी समाज भी उतरोतर असहिष्णु होता जा रहा है। और ओरलेंडो जैसे हमले असहिष्णुता को बढाने में मदद करते हैं।
अमेरिका समेत बडी न्यूक्लिर ताकतें अपनी पहुंच और सैन्य शक्ति की कितनी भी शेघी बघार लें, पर दुनिया के खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने फिर उन्हें हिलाकर रख दिया है। अमेरिका के फ्लोरिडा प्रांत के ओरलेंडों शहर में समलैंगिक नाइटक्लब में इस्लामिक स्टेट से संबंध हमलावर ने देखते-देखते 50 लोगों का नरसंहार कर डाला और 53 को गंभीर रुप से जख्मी कर दिया। हमलावर चार घंटे तक मौत का तांडव करता रहा। ओरलेंडों पुलिस को घटनास्थल तक पहुंचने में चार घंटे लग गए। अमेरिका के इतिहास में 9/11 के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के बाद यह दूसरा बडा घातक हमला था । इस हमले ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। रुस से लेकर ब्राजील तक और इग्लैंड और यूरोप से लेकर अफ्गानिस्तान और पाकिस्तान तक हर देश मे इस नृशंष कृत्य की भर्त्सना की जा रही है। इस्लामिक स्टेट हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इतरा रहा है। हाल ही में इस्लामिक स्टेट से जुडी एक हैकर साइट पर आईएस ने 8,318 नामों की किल (मार गिराओ) लिस्ट जारी की थी जिसमें 8000 अमेरिकियों को भी “टारगेट“ बताया गया था। इससे पहले मार्च माह में आईएस ने 39 पेज की सूची जारी की थी जिसमें न्यू जर्सी के कई सीनियर पुलिस अधिकारियों का नाम था। अब तक यही माना जा रहा था कि इस्लामिक स्टेट अपना खौफ फैलाने के लिए यह सब कर रहा है मगर पहले पेरिस, फिर बेल्जियम और यूरोपियन यूनियन की राजधानी ब्रसल्स और अब अमेरिका के ओरलेंडो हमलों ने जता दिया है कि इस्लमिक स्टेट से जुडे आतंकी दुनिया में मौत का तांडव करने पर आमादा है। फ्रांस, बेल्जियम और अमेरिका के हमलों में सबसे बडी समानता यह है कि हमलावर स्थानीय थे। और यही स्थिति अमेरिका और यूरोप के लिए खतरनाक है। अमेरिका और यूरोप बहु नस्लीय (मल्टी-रेसियल) समाज हैं और इन देशों के रूढिवादी (कंजरवेटिव) इस नीति का मुखर विरोध भी कर रहे हैं। इस सच्चाई के चलते अमेरिका, फ्रांस और आस्ट्रिया में रूढिवादी राजनीतिक दल अथवा विचारधारा उतरोत्तर प्रगतिशील दलों पर भारी पडते जा रहे हैं। फ्रांस में मरीन ली पेन और उनकी कंजरवेटिव पार्टी नेशनल फ्रंट राष्ट्रपति फ्रांकोइस ओलांदे की सोशलिस्ट पार्टी पर भारी पडती जा रही है। हाल ही में कराए गए सर्वे में बताया गया है कि ली पेन तेजी से लोकप्रियता में आगे बढ रही है और 2017 को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारुढ दल सोशलिस्ट पार्टी को कडी चुनौती पेश कर सकती है। आस्ट्रिया में इस साल मई में सपन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव में ग्रीन समर्थित निर्दलीय अलेक्जेंडर वान डेर बमुश्किल अति दक्षिणपंथी नॉर्बर्ट हॉफर को हरा पाए । और अब अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर है। ग्रांड ओल्ड (जीओपी) रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप डेमोक्रटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को कडी चुनौती दे रहे हैं। अमेरिका में नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। ट्रंप ने अपने प्राइमरी चुनाव के दौरान मुसलमानों के खिलाफ आग उगली है और वे बार-बार कह रहे हैं कि अमेरिका में आतंक फैलाने में स्थानीय मुसलमानों का बहुत बडा हाथ है। इस बात को लेकर ट्रंप श्वेतों से मुसलमानों की अमेरिका में एंट्री पर प्रतिबंध लगाने का वायदा भी कर चुके हैं। ओरलेंडो हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप का मुस्लिम विरोध और तल्ख हो गया है और उन्होंने बराक ओबामा को भी इस बात के लिए आडे हाथ लिया है कि राष्ट्रपति ने मुसलमानों को दोषी नहीं ठहराया। ट्रंप के मुस्लिम विरोधी स्टैंड के कारण अमेरिका में मुसलमानों के खिलाफ नस्लीय हिंसा में खासा इजाफा हुआ हैं। जार्जटाउन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर क्रिस्चियन एंड मुस्लिम अंडरस्टैडिंग के अध्ययन मुताबिक 2015 में ट्रंप के रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी दौड में शामिल होते ही मुसलमानों के प्रति नस्लीय अपराधों में 20 से 30 फीसदी का इजाफा हुआ है । अकेले दिसंबर 2015 में मुसलमानों पर 53 हमले हुए हैं। 2015 में 12 हत्याओं के साथ मुसलमानों पर 174 हमले हुए थे। अमेरिकी समाज भारत की अपेक्षा ज्यादा सहिष्णु माना जाता है मगर जिस तरह भारत में भगवा पार्टी के नेताओं की मुस्लिम विरोधी बातों से देश में असहिष्णुता बढी है, उसी तरह ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव में उतरने और उनकी मुस्लिम विरोधी बातों से अमेरिकी समाज भी उतरोतर असहिष्णु होता जा रहा है। और ओरलेंडो जैसे हमले असहिष्णुता को बढाने में मदद करते हैं।






