संसद की स्थायी समिति का यह सुझाव वाकई काबिलेगौर है कि जल को समवर्ती सूची में शामिल किया जाना चाहिए। समिति का मानना है कि समवर्ती सूची में शामिल किए जाने से सूखे और बाढ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बेहतर ढंग से निपटा जा सकता है। अभी पानी राज्य सूची (स्टेट लिस्ट) में शामिल है, इस कारण केन्द्र का इस पर कोई वश नहीं चलता है। संविधान में कौन-कौन से विषय केन्द्र के अधीन है और कौन से राज्य के, इस बात की सुस्पष्ट व्याख्या है। कुछ ऐसे विषय भी हैं, जिन पर केन्द्र और राज्यों का साझा अधिकार है। ऐसे विषयों को समवर्ती सूची में शामिल किया गया है। भारतीय संविधान में विधायिका (लेजिसलेटिव) कार्यों को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहली लिस्ट संसद के अधिकार क्षेत्र में आने वाले विधायिका विषयों की है। ऐसे विषयों पर संसद ही कानून बना सकती है। दूसरी लिस्ट राज्यों को दिए गए विषयों की है जिन पर विधानसभा-मंडल ही कानून बना सकते हैं। तीसरी समवर्ती अनुसूची में साझे विषय हैं, जिन पर संसद और राज्य विधानसभा दोनो को विधायिका पावर्स दी गई है। ऐसे विषयो पर विधानसभा और संसद दोनों ही कानून बना सकती है और अगर कभी किसी विधानसभा द्वारा कानून संसद द्वारा पारित कानून से टकराव रखता है, तो संसद का कानून ही चलेगा। ऐसी परिस्थिति में विधानसभा का कानून निरस्त हो जाएगा। संविधान ने अवशिष्ट (रेजीडुअल) पावर केद्र सरकार को दी गई है। जल को राज्य की सूची में शामिल किए जाने से केद्र का इस मामले में कोई दखल नहीं है। इस कारण जल के दोहन, प्रबंधन और युक्तिकरण को लेकर संबंधित राज्यों में बराबर टकराव रहता है। पिछले करीब नौ दशक से कर्नाटक और तमिल नाडु के बीच कावेरी नदी के पानी बंटवारे को लेकर जबदस्त टकराव चल रहा है। लगभग आठ सौ किलोमीटर लंबी कावेरी नदी का करीब 44,000 वर्ग किलोमीटर बेसिन क्षेत्र तमिलनाडु में है और 32,000 वर्ग किलोमीटर कर्नाटक में। कर्नाटक का कहना है कि उसे उसके बाजिब हक का पानी नहीं मिल रहा है। इस संबंध में 1892 और 1924 में मद्रास प्रेजिडेंसी और मैसूर रियासत के बीच जो दो समझोते हुए थे, वे पूरी तरह तमिल नाडु के पक्ष में । दोनों राज्यों के बीच जारी लंबे टकराव के बाद 1990 में केद्र ने ट्रिब्यूनल का गठन किया। 16 साल तक सुनवाई चली और फरवरी 2007 को फैसला सुनाया गया। मगर यह फैसला न तो तमिल नाडु को मान्य है, न कर्नाटक और न ही दो और प्रभावित राज्य केरल और पुडुचेरी को। लगभग इसी तरह की स्थिति पंजाब और हरियाणा के बीच जल बंटवारे को लेकर है। हरियाणा को आज तक उसके हक का पानी नहीं मिला है। 1966 से पहले हरियाणा, पंजाब का हिस्सा हुआ करता था। हरियाणा राज्य बनने के बाद दोनों राज्यों में पानी को लेकर टकराव चलता रहा। 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दोनों राज्यों को बराबर 35 लाख एकड फीट जल का बंटवारा किया। पंजाब ने इसे नहीं माना। 1979 में हरियाणा सुप्रीम कोर्ट भी गया। 2002 में कोर्ट ने पंजाब को सतलुज-यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) की खुदाई जारी रखने को कहा। इस पर अमल की बजाय पंजाब ने 2004 में विधानसभा में कानून पारित करके ( टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट) अनुबंध ही निरस्त कर दिया। इसी साल अकाली-भाजपा सरकार ने एसवाईएल के लिए किसानों से अधिगृहीत की गई जमीन को लौटाने के लिए भी विधानसभा में कानून पास कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद पंजाब में नहर के लिए खोदी गई जमीन को भरा जा रहा है। इस मामले में कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल सरकार की हां में हां मिला रहे हैं। इस तरह के हालात देश के संघीय ढांचे को कमजोर करते हैं। पूरे देश में हर साल गर्मियों में भीषण सूखा पडता है और बरसात में बाढ आती है मगर न तो केन्द्र और न ही राज्यों की सरकारें कुछ ठोस कर पा रही हैं। केन्द्र का जल प्रबंधन पर कोई वश नहीं है, और राज्य आपस में लड रहे हैं। आखिर, “न खुद खेलेंगे, न ही औरों को खेलने देंगे“ वाली स्थिति कब तक चलती रहेगी ? जल को समवर्ती सूची में शिफ्ट किया जाना ही एकमात्र कारगर विकल्प नजर आ रहा है। पंजाब और तमिल नाडु जैसे राज्य भले ही इसे मानने मना कर देंगे मगर देश की संसद सर्वोपरि है। उसे संविधान को संशोधित करने का भी अधिकार है। राष्ट्र हित में अगर ऐसा करने की जरुरत पडे, तो इसे अविलंब पूरा किया जाना चाहिए।
यह ब्लॉग खोजें
ब्लॉग आर्काइव
- अप्रैल (2)
- मार्च (1)
- सितंबर (2)
- अगस्त (2)
- जुलाई (3)
- जून (2)
- मई (2)
- अप्रैल (4)
- मार्च (9)
- फ़रवरी (7)
- जनवरी (6)
- दिसंबर (11)
- नवंबर (7)
- अक्टूबर (4)
- सितंबर (10)
- अगस्त (22)
- जुलाई (2)
- जून (11)
- मई (12)
- अप्रैल (7)
- मार्च (6)
- फ़रवरी (1)
- दिसंबर (5)
- नवंबर (4)
- अक्टूबर (5)
- सितंबर (17)
- अगस्त (33)
- जुलाई (28)
- जून (21)
- मई (30)
- अप्रैल (20)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (23)
- जनवरी (23)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (22)
- अक्टूबर (22)
- सितंबर (19)
- अगस्त (22)
- जुलाई (21)
- जून (19)
- मई (20)
- अप्रैल (19)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (20)
- जनवरी (19)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (21)
- अक्टूबर (21)
- सितंबर (21)
- अगस्त (16)
- जुलाई (15)
- जून (20)
- मई (18)
- अप्रैल (21)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (21)
- जनवरी (24)
- दिसंबर (25)
- नवंबर (27)
- अक्टूबर (23)
- सितंबर (27)
- अगस्त (35)
- जुलाई (22)
Copyright 2015 | Chander M Sharma . Blogger द्वारा संचालित.






