शुक्रवार, 6 मई 2016

अगस्ता डील में ढील क्यों?

अति विशिष्ट  व्यक्तियों  को सियाचीन और पूर्वोतर में लाने और ले जाने के लिए खरीदे गए अगस्तावेस्ट्लैंड हेलिकाँप्टर  सौदे में कथित घूसखोरी का जिन्न अब बोतल से बाहर निकल आया है। इससे कांग्रेस नीत पूर्व संप्रग सरकार के साथ साथ राजग सरकार के  दामन पर “दलाली“ के छींटे पडना स्वभाविक है। यह सौदा अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार के समय आगे बढा था मगर सौदे को अंतिम रुप मनमोहन सिंह सरकार ने दिया था। इसलिए इस सौदे में दलाली को लेकर काग्रेस के नेताओं का नाम आ रहे हैं। ताजा रिपोर्टे में बताया गया हे की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने  कंपनी को फवौर करने के लिए फ्लाइट की हाइट घटा दी  थी।  इस खुलासे से भाजपा  की  नींद हराम हो सकती है। बहरहाल, इटली कोर्ट  के दस्तावेजों में किसी “एपी“ सियासी नेता का नाम आया है। भाजपा का कहना है कि यह “एपी“ और कोई नहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी अहमद पटेल है। इसी बात पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी को निशाना बनाया जा रहा है।  इन दिनों  वेस्ट बंगाल  में विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जा रहे है। इसी माह तमिल नाडु और केरल में विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। भाजपा अगस्ता सौदे को चुनाव में खूब भुना रही है और कांग्रेस को जवाब देते नहीं बन पा रहा है। अगस्तावेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे पर खरीद  में कथित दलाली के आरोप लगने से यधपि सौदा 2014 में ही निरस्त कर दिया गया था मगर इस साल अप्रैल में इटली की अदालत के फैसले से  यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। 8 अप्रैल, 2016 को इटली में मिलान स्थित कोर्ट ऑफ अपील ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी के प्रमुख ग्यूसेप ओरसी को सौदा पटाने के लिए भारतीय राजनेताओ, वायु सेना के अफसरों और नौकरषाहों को 30 करोड यूरो की घूस  देने के आरोप में चार साल के कारावास की सजा सुनाई। अपने 225 पृष्ठ  के फेसले में अदालत ने साफ-साफ कहा कि भारतीय नेताओं और नौकरशाहों को घूस देकर ही सौदा पटाया गया था और कानूनन यह एक संगीन अपराध है। अब यह बात तो बच्चा भी कहेगा  कि अगर इटली में रिश्वत  देने के लिए कंपनी के मुखिया को सजा मिल सकती है, तो भारत में घूस लेकर देश  के साथ गद्दारी करने वाले करप्ट  नेताओं, नौकरशाहों और वायु सेना के अधिकारियों को क्यों बखशा  जा रहा है? बुधवार को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने हालांकि देश  को आश्व्स्त  किया कि मोदी सरकार इस मामले में “दूध का दूध और पानी का पानी“ करके रहेगी मगर अब तक का अनुभव इस बात की गवाही नहीं देता है। 25 मार्च 2013 को तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने संसद में कबूल किया था, “ हां, अगस्ता हेलिकॉफ्टर सौदे में भ्रष्टाचार  हुआ है और रिश्वत  ली गई है। तब रक्षा मंत्री ने पूरी शिद्दत से यह भी कहा था कि सीबीआई इस मामले की तेजी से जांच कर रही है। इस बात को गुजरे तीन साल हो गए हैं मगर न तो सीबीआई जांच की कोई खबर है और न ही मोदी सरकार की ओर से इस मामले में खास पहल हुई है। और सच्चाई यह है कि रक्षा सौदे में दलाली का यह मामला दब कर रह जाता अगर इटली कोर्ट का फेसला न आया होता। कांग्रेस के इस आरोप में वजन है कि संप्रग सरकार द्वारा अगस्ता को ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद मोदी सरकार द्वारा इसे फिर ओपन किए जाने पर “दाल में कुछ काला“ नजर आ रहा है।   इस बीच रक्षा सौदों के अंतरराष्ट्रीय  दलाल क्रिस्टियन मिशेल का आरोप है कि भारत और इटली के प्रधानमंत्रियों के बीव संयुक्त राष्ट्र  में लंबी बैठक हुई थी और इसमे कांग्रेस अध्यक्ष को फंसाने की रणनीति बनाई गई थी। माना कि दलाल की बातों पर विश्वास  नहीं किया जा सकता मगर लंबी मुलाकात हुई थी, यह बात सच है। अगस्ता सौदे में मीडिया को भी लपेटा गया है। आरोप है कि मीडिया को साठ लाख यूरो बांटे गए हैं। भाजपा के सांसद कीर्ति सौमेया के कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर लगाए गए ताजा आरोप भी संगीन है। भाजपा के वरिष्ठ नेता   सुब्रमनयम स्वामी का भी दावा है कि उनके पास गांधी परिवार की संदिग्ध सौदों में सलिंप्तता के ठोस सबूत है। अभी और भी कई आरोप-प्रत्यारोप उछाले जा सकते हैं। आरोप-प्रत्यारोपों से कोई हल नहीं निकल सकता। जनमानस न केवल सच्चाई जानना चाहता है, अलबता घूसखोर नेताओं और  नौकरशाहों को सलाखों के पीछे देखना चाहते हैं। इस मामले की भी निष्पक्ष  जांच कराई जानी चाहिए।