अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव प्रचार और भारत में 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के चुनाव प्रचार में काफी समानता है। और समानता भी इतनी करीबी कि डोनाल्ड ट्रंप को “ अमेरिका का मोदी“ माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव में भाजपाई जिस तरह मुसलमानों के खिलाफ आग उगला करते थे, ठीक उसी तरह डोनाल्ड ट्रंप भी मुसलमानों के खिलाफ बोल रहे हैं। भारत में भाजपाई लोकसभा चुनाव के दौरान मुसलमानों को पाकिस्तान चले जाने का मश्विरा दिया करते थे। उसी तर्ज पर अमेरिका में ट्रंप मुसलमानों की एंट्री रोकने का ऐलान करा चुके हैं । भाजपाई नेता पाकिस्तान को सबक सिखाने की बातें करते रहे हैं तो ट्रंप मेक्सिको को। इसके लिए ट्रंप बार्डर पर दीवार खडी करने पर आमादा हैं। मुस्लिम विरोधी बोलकर भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए जिस तरह से मतदाताओं का ध्रुवीकरण कराया था, उसी तरह ट्रंप भी अश्वेतों के खिलाफ आग उगल कर अमेरिकी श्वेतों का ध्रुवीकरण करा रहे हैं। भारत में जिस तरह हिंदू मतदाताओं का वर्चस्व है, उसी तरह अमेरिका में लगभग 75 फीसदी श्वेत मतदाता है। भारत में अल्पसंख्यक भगवा पार्टी के समर्थक नहीं है, उसी तरह अमेरिका के अधिकांश अश्वेत रिपब्लिकन पार्टी के विरोधी है और डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक हैं। इस बात का ख्याल करते हुए मुस्लिम और अश्वेत विरोधी मुद्दे उछाल कर ट्रंप भी मतदाताओं का ध्रुवीकरण करा रहे हैं। इस साल नवंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव होना है। मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा चुनाव मैदान में नहीं है। अमेरिका में संवैधानिक व्यवस्था है कि एक उम्मीदवार केवल दो बार ही राष्ट्रपति का चुनाव लड सकता है। बराक ओबामा लगातार दो बार बतौर डेमोक्रेटिक पार्टी उम्मीदवार अमेरिका के राष्ट्रपति चुने जा चुके हैं, इसलिए वे तीसरी बार चुनाव नहीं लड सकते। डेमोक्रेटिक पार्टी से पूर्व राष्ट्रपति और बिल क्लिंटन की पत्नी पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी अग्रणी उम्मीदवार है और उनकी उम्मीदवार भी करीब-करीब तय मानी जा रही है। डेमोक्रटिक पार्टी का उम्मीदवार बनने के लिए हिलेरी एक कदम दूर है। उम्मीदवारी पाने के लिए कुल 4763 डेलिगेटस मेंसे 2383 के समर्थन की जरुरत होती है और हिलेरी को अभी तक 2306 का समर्थन मिल चुका है। पार्टी में उनके प्रमुख विरोधी बर्नी सैंडर्स को 1539 डेलिगेटस का समर्थन है। बहरहाल, वीरवार को ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी पक्की होने के साथ ही उनके विरोधियों के होश फाख्ता हो गए हैं। विषेशतय, उन लोगों के जो ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने पर अमेरिका छोड जाने की धमकी देते रहे हैं। हाल ही में कराए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार (मॉर्निंग कनस्लट- वॉकस पोल) 28 फीसदी अमेरिकी ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने पर अमेरिका छोड सकते हैं। गुगल की रिपोर्ट के अनुसार इस साल मार्च में ट्रंप द्वारा सात प्राइमरी में जीत दर्ज करने के तुरंत बाद अमेरिकियों द्वारा कनाडा बस जाने की सर्च में 350 फीसदी का इजाफा हुआ था। लोगों की इस मानसिकता के चलते पॉपर्टी एजेंट अखबारों और सोशल मीडिया पर “ गिव मी ए कॉल, आई केन हेल्प यू सैल युअर हाउस“ के विज्ञापन देकर बहती गंगा मे हाथ धो रहे हैं। अरबपति सफल बिजनेसमैन डोनाल्ड ट्रंप की शख्सियत जितनी विवादित है, उतनी ही विवादित उनकी सोच और बोल हैं। कोई उहें नाजी मानता है तो कोई लंपट। अधिकतर घरेलू महिलाएं उन्हें नापसंद करती हैं। सार्वजनिक मंचों से वे उल-जलूल बातें करते रहे हैं। अपनी रंगीली तबियत के लिए ट्रंप खासे चर्चित रहे हैं। तीन बार विवाहित ट्रंप के अनेक महिलाओ से संबंध रहे हैं। उदार अमेरिकी समाज में हालांकि इसे भारत की तरह बुरा नहीं माना जाता मगर राष्ट्रपति के उम्मीदवार के लिए यह आडे आ सकती है। तथापि ट्रंप का जितना तल्ख विरोध हो रहा है, उतनी ही तेजी से वे अमेरिकी जनमानस में लोकप्रिय हो रहे हैं। मार्च में ट्रंप डेमोक्रेटिक फ्रंट-रनर हिलेरी क्लिंटन से काफी पीछे थे मगर मई आते-आते वे अपने प्रमुख प्रतिद्धंद्धी को भी पीछे छोड गए है। चुनाव एनालिस्ट्स का आकलन है कि नवंबर तक ट्रंप हिलेरी से काफी आगे निकल जाएंगे। इसकी प्रमुख वजह है कि श्वेत अमेरिकी भी ट्रंप को उतना पसंद नहीं करते हैं, जितना हिलेरी किलंटन को नापसंद करते है। इसी कारण डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव जीत सकते हैं। वैसे भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिछले दो टर्म से लगातार राष्ट्रपति चुनाव जीत रहे हैं। इस बार रिपब्लिकन की बारी है।
यह ब्लॉग खोजें
ब्लॉग आर्काइव
- अप्रैल (2)
- मार्च (1)
- सितंबर (2)
- अगस्त (2)
- जुलाई (3)
- जून (2)
- मई (2)
- अप्रैल (4)
- मार्च (9)
- फ़रवरी (7)
- जनवरी (6)
- दिसंबर (11)
- नवंबर (7)
- अक्टूबर (4)
- सितंबर (10)
- अगस्त (22)
- जुलाई (2)
- जून (11)
- मई (12)
- अप्रैल (7)
- मार्च (6)
- फ़रवरी (1)
- दिसंबर (5)
- नवंबर (4)
- अक्टूबर (5)
- सितंबर (17)
- अगस्त (33)
- जुलाई (28)
- जून (21)
- मई (30)
- अप्रैल (20)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (23)
- जनवरी (23)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (22)
- अक्टूबर (22)
- सितंबर (19)
- अगस्त (22)
- जुलाई (21)
- जून (19)
- मई (20)
- अप्रैल (19)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (20)
- जनवरी (19)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (21)
- अक्टूबर (21)
- सितंबर (21)
- अगस्त (16)
- जुलाई (15)
- जून (20)
- मई (18)
- अप्रैल (21)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (21)
- जनवरी (24)
- दिसंबर (25)
- नवंबर (27)
- अक्टूबर (23)
- सितंबर (27)
- अगस्त (35)
- जुलाई (22)
Copyright 2015 | Chander M Sharma . Blogger द्वारा संचालित.






